फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   naxal surrenders in jharkhand

गीता और सुनीता के हाथ में पुलिस की बंदूक़

Sat, 25 Oct 2014 03:38 PM IST
नीरज सिन्हा/रांची से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
नीरज सिन्हा/रांची से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए Updated Sat, 25 Oct 2014 03:38 PM IST
विज्ञापन
naxal surrenders in jharkhand

नक्सली दस्ते में कथित तौर पर हथियार ढोने और जंगल-पहाड़ में क्रांतिकारी गीत गाने वाली गीता और सुनीता अब पुलिस की बंदूक उठाएंगी।

विज्ञापन


सरकार ने गीता और सुनीता समेत आत्मसमर्पण करने वाले पांच पूर्व नक्सलियों को पुलिस की नौकरी दी है।

गीता गंझू और सुनीता के अलावा जिन्हें पुलिस की नौकरी मिली है उनमें सुरेश मुंडा, पांडू पाहन और इंदी पाहन शामिल हैं।

बीबीसी से बातचीत में गीता और सुनीता ने बताया कि उनका बचपन नक्सली दस्ते में बीता और अब वे जवानी के दिन नक्सलियों के ख़िलाफ़ पुलिस अभियान में शामिल होकर गुजारना चाहती हैं।


नई ज़िंदगी की आस

सुनीता बताती हैं कि वो 2008 में हथियारबंद दस्ते में शामिल हुई थीं और 2010 मे उन्होंने आत्मसमर्पण किया।

गीता का कहना है कि नक्सली दस्ते में रहकर कठिन परिस्थितियों का सामना करती रहीं।

इंदी पाहन 2007 में माओवादी संगठन में शामिल हुए थे और 2012 में उन्होंने आत्मसमर्पण किया था। वह हथियारबंद दस्ते में कमांडर के ओहदे पर थे।

इंदी कहते हैं कि अब वह घर परिवार के लिए नई ज़िंदगी जीना चाहते हैं।

माओवादी बनकर उन्होंने बहुत कुछ खोया है।

सरकारी नौकरी

झारखंड राज्य बनने के 14 सालों में पहली बार सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले पांच पूर्व नक्सलियों को सरकारी नौकरी दी है।

अब तक झारखंड में 68 कथित नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें भाकपा माओवादी संगठन के 52 और पीएलएफआई के 16 लोग बताए जाते हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नौकरी का पत्र देते हुए माओवादियों से बंदूक छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है।

विशेष शाखा के अपर पुलिस महानिदेशक रेजी डुंगडुंग ने बताया कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को नौकरी, जमीन तथा पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता देने की नीति बनाई है।
विज्ञापन


पुलिस ने बताया है कि जिन पांच पूर्व नक्सलियों को नौकरी दी गई है, वे सभी मामलों से बरी हो चुके हैं और नौकरी पाने की शर्तें भी पूरी करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed