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पश्चिमी यूपी में फैल रहा है नक्सली नेटवर्क

Sun, 18 May 2014 07:47 PM IST
Updated Sun, 18 May 2014 07:47 PM IST
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naxal network in western uttar pradesh

नोएडा में नक्सली कृष्णा की गिरफ्तारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैलते इनके नेटवर्क की सच्चाई बता रही है। पूर्व में मेरठ में एसटीएफ ने जब माओवादी संगठन के जोनल कमांडर को गिरफ्तार किया, तब उसने भी पूछताछ में यही कहा था कि उसके कुछ साथी इस इलाके  में सक्रिय हैं।

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छह जनवरी 2014 को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने चंदन जी उर्फ चनारिक दास पुत्र मुगेश्वर दास निवासी गांव सलाईटांड थाना डुमरिया जिला गया (बिहार) को भैसाली अड्डे के पास से गिरफ्तार किया था।
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उसके खिलाफ जनवरी 2013 में तीन आईईडी बरामद होने, अक्तूबर 2012 में लैंड माइन ब्लास्ट कर सीआरपीएफ की गाड़ी उड़ाने और डुमरिया थाना क्षेत्र में हत्या का मामला दर्ज है।

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यूपी में छुपे हैं नक्सली?

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पूछताछ में नक्सली चंदन ने इस बात को स्वीकार किया था कि उसके साथ हमेशा 15 से 20 नक्सली रहते हैं। वह भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में छिपे हो सकते हैं।

शुक्रवार रात नोएडा के फेज टू थाना क्षेत्र से नक्सली कृष्णा को गिरफ्तार किया। कृष्णा भी बिहार के गया का रहने वाला है। उसकी गिरफ्तारी से फिर चिंता पैदा हो गई है कि माओवादी संगठन से जुड़े अन्य भी नक्सली पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिपे हो सकते हैं।

क्योंकि जनवरी में गिरफ्तार चंदन जी उर्फ चनारिक दास छह माह से दिल्ली, पंजाब के अलावा मेरठ, मुजफ्फरनगर, ग्रेटर नोएडा में रहकर नक्सली गतिविधियों के लिए नेटवर्क खड़ा करने में जुटा था।

पुलिस कर रही है जांच

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चंदन को वेस्ट यूपी में नेटवर्क फैलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं, चंदन मेरठ, मुजफ्फरनगर और दिल्ली में रहकर नक्सली गतिविधियां संचालित कर रहा था। उसने एक माह से खतौली में डेरा जमाया था।

सीओ एसटीएफ अनित कुमार ने बताया कि नोएडा में गिरफ्तार नक्सली कृष्णा से पूछताछ की गई। कुछ अहम जानकारियों मिली हैं, जिनके आधार पर जांच चल रही है।

किरायेदारों पर रखें नजर

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सूत्रों के मुताबिक, नक्सली चंदन विभिन्न जगहों पर किराए के मकान में रहा। गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से परिचय पत्र के साथ एक मोबाइल भी बरामद हुआ था।

इससे जुड़े नंबरों के आधार पर उसके संपर्कों को खंगाला गया। वहीं मकान मालिकों को भी अपने किरायेदारों को लेकर सचेत रहने की जरूरत है।

कंप्यूटर संचालन में मास्टर है कृष्णा

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माओवादी संगठन का जोनल कमांडर कृष्णा बेहद शातिर है। एसटीएफ की छानबीन में मालूम चला कि वह कंप्यूटर चलाने में मास्टर है। उसने बिहार में अपने घर के भीतर ही पोर्टेबल प्रिंटिंग मशीन लगा रखी थी। जिससे वह माओवादी संगठन का साहित्य छापता था।

एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक कृष्णा पर करीब एक लाख रुपये का इनाम घोषित है। उसके खिलाफ हत्या और लैंड माइन ब्लास्ट करने समेत करीब 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। बिहार पुलिस ने फरारी के चलते कुछ दिन पहले गया जिले में स्थित उसके मकान की कुर्की की।

पुलिस को मकान में प्रिंटिंग मशीन, कंप्यूटर और माओवादी संगठन के लिए छापा गया साहित्य बरामद हुआ। शुक्रवार रात नोएडा में गिरफ्तार कृष्णा से पूछताछ में कई राज सामने आए हैं। वह कई माह से नोएडा स्थित एक फैक्ट्री में प्रोडक्शन हेल्पर के तौर पर नौकरी कर रहा था।

उसका एक साथी संदीप उर्फ प्रदीप यादव भी साथ रहा। एसटीएफ ने बिहार पुलिस से संपर्क किया, तो पता चला कि संदीप के पास एके 47 और अन्य अत्याधुनिक हथियार हैं। संदीप अभी फरार है।

गुड़गांव में कराया इलाज

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नक्सली कृष्णा छह माह पहले एनसीआर आया था। वह उस समय जख्मी था। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि वह बिहार में लैंडमाइन ब्लास्ट के दौरान खुद भी घायल हो गया था। उसने गुड़गांव स्थित एक हास्पिटल में इलाज कराया। इसके बाद कुछ दिन के लिए दिल्ली और मुंबई में परिचितों के पास रहने चला गया।

छिपने का सुरक्षित ठिकाना

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नक्सली एनसीआर और पश्चिम यूपी को सुरक्षित ठिकाना बना रहे हैं। बिहार में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो इनमें से कुछ भागकर यहां आ जाते हैं।

यहां अपना नाम पता बदलकर रहते हैं। वे यहां नौकरी करने लगते हैं। दिल्ली, एनसीआर और पश्चिम उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में बिहार के लोग मजदूरी करते हैं। ये उनसे जान पहचान बना लेते हैं।

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