नवाज ने मोदी से मुलाकात के पहले दिखाई भारत को आंखें
नवाज शरीफ ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता की संभावनाओं पर एक बार फिर पानी फेर दिया है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत की आपत्तियों को दरकिनार कर कहा है कि भारत से शांति वार्ता आरंभ करने से पहले पाकिस्तान कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से बातचीत करेगा। उन्होंने कहा है कि कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को विश्वास में लेने के बाद ही भारत से बातचीत बहाल की जाएगी।
उल्लेखनीय है कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत के कारण भारत अगस्त में प्रस्तावित सचिव स्तर की बातचीत रदद् कर चुका है। पिछले 5 महीनों में कश्मीर में अंतराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर हुई गोलीबारी के कारण दोनों मुल्कों के राजनीतिक रिश्तों में काफी तल्खी आ गई है। ऐसे में नवाज का बयानों शांति की संभावनाओं पर कुठाराघात माना जा रहा है।
कश्मीरी नेताओं को नवाज शरीफ ने पुचकारा
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में कश्मीर परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि कश्मीर का मसला बातचीत से हल हो, पाकिस्तान की समझ हमेशा यही रही है।
उन्होंने कहा, 'मेरी सरकार ने भारत के साथ बातचीत शुरु भी की थी, लेकिन भारत ने बातचीत रदद् कर दी। मैंने फैसला किया है कि भारत के साथ बातचीत शुरु करने से पहले कश्मीरी नेताओं से बातचीत की जाएगी।'
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का मानना है कि कश्मीर का मसला संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दिए प्रस्ताव गए के आधार पर ही हल किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि शरीफ का बयान अगल हफ्ते शुरु हो रहे सार्क सम्मेलन से ठीक पहले आया। सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ मौजूद रहेंगे।
अगले हफ्ते आमने सामने होंगे मोदी और नवाज
सार्क सम्मेलन में मोदी और शरीफ की द्वीपक्षीय मुलाकात होने की संभावना कम ही है। गुरुवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता तसनीम असलम ने बताया कि सार्क सम्मेलन में पाकिस्तान और भारत के बीच द्वीपक्षीय बातचीत की कोई योजना नहीं है।
उल्लेखनीय है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की मुलाकात मई में हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अपने शपथग्रहण समारोह में उन्हें आमंत्रित किया था। शपथ ग्रहण के अगले दिन दोनों नेताओं के बीच बातचीत भी हुई थी।
उस मुलाकात के बाद माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधारा होगा। लेकिन अगस्त महीनें में कश्मीर अलगाववादी नेताओं और भारत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त के बीच हुई म़ुलाकात और सीमा पर हो रही गोलीबारी के कारण दोनों देशों के राजनीतिक रिश्ते तल्ख होते चले गए।