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'नवाज शरीफ वही करते हैं जो पाक सेना कहती है'

Wed, 09 Dec 2015 11:22 AM IST
Updated Wed, 09 Dec 2015 11:22 AM IST
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Nawaz do what the military calls

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 'हार्ट ऑफ एशिया' सम्मेलन के लिए पाकिस्तान में हैं, जहां वो बुधवार को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज से मिली हैं।

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लेकिन क्या भारतीय विदेश मंत्री की इस यात्रा से क्या दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ़ पिघलेगी? पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त जी पार्थसारथी इसे लेकर बहुत आशावान नहीं हैं। बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह ने उनसे सुषमा स्वराज की यात्रा की अहमियत को लेकर बात की, पढ़ें उनकी राय।
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सुषमा स्वराज द्विपक्षीय दौरे पर नहीं गई हैं, वह वहां अफगानिस्तान के बारे में हो रहे शिखर सम्मेलन में गई हैं और ऐसी बैठकों में हमने पहले भी भागीदारी की है। पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक माध्यमों के जरिए भारत का संपर्क रहा है। यह तय हो गया था कि एक नई बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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हर बार बेपटरी होती रही है बातचीत

Nawaz do what the military calls

इसीलिए दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश सचिव बैंकॉक में मिले, बैंकॉक में इसलिए मिले क्योंकि दिल्ली में हमने नीति बनाई है कि हम अलगाववादियों को पाकिस्तान से मिलने की इजाज़त नहीं देंगे।

दूसरी बात कि ऐसी बैठकें अगर दिल्ली या इस्लामाबाद में हों और प्रेस को पता चले तो ज़्यादा पब्लिसिटी हो जाती है और हम गंभीरता से बातचीत नहीं कर पाते।

बुधवार को होने वाली बैठक की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहली बार पाकिस्तान की ओर से उनका वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भाग ले रहा है, पाकिस्तान के मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एक पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल हैं।

पाकिस्तान में चलती है फौज की नीति

Nawaz do what the military calls

बाकी दुनिया की तरह हम अब यह जान गए हैं कि पाकिस्तान में फौज विदेश नीति को रूप देती और इसे बनाती है और नवाज़ शरीफ वही करते हैं, जो फौजकहती है। तो कम से कम यह एक मौक़ा है कि हम वरिष्ठ सैन्य अधिकारी से बात कर सकते हैं।

हालांकि मैं नहीं समझता कि पाकिस्तान में फ़िज़ा बदल गई है, उनकी मजबूरियां हैं। जहां तक हमें संकेत हैं कि जनरल राहील शरीफ़ को अमरीका में काफी सख्ती से कहा गया था कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद पर कड़ा प्रतिबंध लगाएं और ढील न दें।

दूसरे, हमें भी सारी दुनिया से यह सलाह मिल रही है कि कम से कम इनसे (पाकिस्तान से) संपर्क रखें, इसी कारण बैकॉक की बैठक हुई है। इस बैठक की जो उसकी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति निकली है उससे साफ है कि वह सुरक्षा मामलों पर केंद्रित थी, जहां आतंकवाद और जम्मू कश्मीर पर बात हुई। यह नहीं कि कैसे सुलझाया जाए बल्कि कैसे वहां शांति स्थापित रखी जाए।

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