चीन पर लगाम के लिए नौसेना होगी मजबूत
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हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दखल से चिंतित भारत भी अपनी नौसेना को तेजी से अत्याधुनिक बनाने में जुट गया है। हिमालय में चीन के साथ सीमा विवाद, चीनी पनडुब्बियों की श्रीलंका में मौजूदगी और मालदीव के साथ ड्रैगन की बढ़ती नजदीकियों ने भारत की बेचैनी बढ़ा दी है।
यही वजह है कि भारत ने अपने नौसैनिक बेड़े को अत्याधुनिक पनडुब्बियों से लैस करने और उसे ताकतवर बनाने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए वह ऑस्ट्रेलिया और जापान से नौसैनिक सहयोग लेने पर विचार कर सकता है।
चीन की हिंद महासागर में गतिविधियां बढ़ गई हैं। वह अपने कुल तेल के 4/5 हिस्से का आयात हिंद महासागर से ही करता है। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर में उसकी नौसैनिक दादागिरी ने भी पड़ोसियों को चिंता में डाल दिया है।
ताकत बढ़ाने के लिए की तैयारी
नौसेना के पूर्व प्रमुख अरुण प्रकाश कहते हैं, ‘जिस तरह का पनडुब्बी बेड़ा हमारे पास है, हमें चिंता होनी ही चाहिए। जिस तरह से चीन की हिमालय, दक्षिण चीन सागर और अब हिंद महासागर में दखल बढ़ी है, हमें और ज्यादा चिंता करनी चाहिए। अच्छी बात यह है कि जिस तरह के संकेत इस नई सरकार से मिल रहे हैं, उससे लगता है कि वह समस्या के प्रति सजग है।’
उन्होंने कहा कि हालांकि अपनी स्थिति मजबूत करने में थोड़ा वक्त लगेगा। इसके लिए हमें अपनी कूटनीति में इन बातों को शामिल करना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नौसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए छह डीजल-बिजली जैसे परंपरागत ईंधनों से चलने वाली छह पनडुब्बियों (500 अरब रुपये की लागत) को बनाने की प्रक्रिया में तेज कर दी है।
इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डीसीएनएस को मुंबई बंदरगाह पर लगाया गया है। इसके अलावा भारत ने नाभिकीय मिसाइलों से लैस पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी का विकास किया है, जिसका इसी महीने समुद्री परीक्षण होना है। इसे नौसेना के बेड़े में 2016 के आखिर तक शामिल किया जाएगा। भारत ने 2012 में रूस से परमाणु चालित पनडुब्बी पट्टे पर ली है और दूसरी पनडुब्बी लेने की बातचीत कर रहा है।
लक्षद्वीप को सामरिक चौकी बना रही नौसेना
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग आफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल एसनीएस चीमा का कहना है कि लक्षद्वीप द्वीपसमूह में ढांचागत सुविधाएं विकसित करने की नौसेना की योजना है। इसे नौसेना सामरिक चौकी के रूप में इस्तेमाल करने के लिए तैयार कर रही है। इस दिशा में हाल ही में केंद्र सरकार ने बित्रा द्वीप को विकसित करने मंजूरी दी है। यह नौसेना की चौथी टुकड़ी होगी। इससे पहले लक्षद्वीप में मिनीकॉय, कावारात्ती, अंद्रोथ रही हैं।
क्षमताएं:
भारत के पास फिलहाल डीजल-बिजली चालित 13 पनडुब्बियां हैं। इनमें से केवल आधी ही संचालन में हैं। पिछले साल इनमें से एक विस्फोट के बाद समुद्र में समा गई थी, जबकि एक और पनडुब्बी में आग लग गई थी। वहीं चीन के पास 60 परंपरागत और 10 परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियां हैं। भारतीय नौसेना के पास जहां दो विमानवाहक समेत 150 जहाज हैं, तो वहीं चीन के नौसैनिक बेड़े में तकरीबन 800 जहाज हैं।
हिंद महासागर में चीन ने उतार रखी हैं परमाणु पनडुब्बियां: नौसेना प्रमुख
नौसेना प्रमुख रॉबिन धवन ने कहा है कि हिंद महासागर में चीन की गतिविधि कई गुणा बढ़ गई है। इतना ही नहीं चीन की नौसेना ने महासागर में परमाणु पनडुब्बियों को भी उतार रखा है। चूंकि यह अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र है इसलिए भारत इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। धवन ने माना कि भारतीय नौसेना में जहाजों की कमी है। लेकिन इन कमियों के बावजूद अपने क्षेत्र में नौसेना का पकड़ काफी मजबूत है।
धवन ने बुधवार को समुद्री क्षेत्रों की चुनौतियां बताते हुए कहा कि पानी में पाकिस्तानी जहाजों की मौजूदगी आतंकी खतरों से खाली नहीं है। धवन ने सितंबर महीने में पाकिस्तानी आतंकवादियों के पीएनएस जुल्फीकार नाम के जहाज को अगवा करने की नाकाम कोशिश को बड़े खतरे की घंटी बताया। धवन ने आईएनएस सिंधुरक्षक पनडुब्बी हादसे में मानवीय त्रुटि से इनकार नहीं किया है।