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भारत ने दिखाई ताकत, ब्रह्मोस का सफल परीक्षण
पणजी/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 07 Oct 2012 03:27 PM IST
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भारतीय नौसेना ने रविवार को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया। 290 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल 300 किलोग्राम पारंपरिक आयुध ले जाने में सक्षम है।
सूत्रों के मुताबिक मिसाइल का गोवा तट से भारतीय नौसेना के निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस तेग से प्रायोगिक परीक्षण किया गया। मिसाइल ने उच्च स्तर के कौशल का प्रदर्शन किया और लक्षित जहाज को निशाना बनाया जिसमें अब भी आग लगी हुई है।
रूस के यांतर शिपयार्ड में बनाए गए आईएनएस तेग ने पिछले साल नौसेना में शामिल किए जाने से पूर्व रूस में परीक्षण के दौरान सफलतापूर्वक मिसाइल दागी थी। दो अन्य युद्धपोतों आईएनएस तरकश और आईएनएस त्रिकंद को इस बेहद घातक मिसाइल से लैस किया जाएगा।
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रक्षा अधिकारियों के मुताबिक दो चरणों वाली इस मिसाइल का पहला चरण ठोस और दूसरा रैमजेट लिक्विड प्रोपेलेंट है। इस मिसाइल को पहले ही सेना और नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इस मिसाइल का वायुसेना संस्करण अंतिम चरण में है।
भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से बनी इस मिसाइल की चौड़ाई 670 मिलीमीटर और वजन करीब तीन टन है। नौ मीटर लंबी इस मिसाइल के लिए राडार पर नजर आए बगैर सतह पर स्थित ठिकानों को निशाना बनाना बेहद आसान है। यह मिसाइल अत्यंत कम निचाई पर भी उड़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि ध्वनि से कई गुना रफ्तार वाली ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है। ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की राजधानी मास्को की जीवनरेखा समझी जाने वाली नदी मस्कवा के नाम पर रखा गया है।
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सूत्रों के मुताबिक मिसाइल का गोवा तट से भारतीय नौसेना के निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस तेग से प्रायोगिक परीक्षण किया गया। मिसाइल ने उच्च स्तर के कौशल का प्रदर्शन किया और लक्षित जहाज को निशाना बनाया जिसमें अब भी आग लगी हुई है।
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रूस के यांतर शिपयार्ड में बनाए गए आईएनएस तेग ने पिछले साल नौसेना में शामिल किए जाने से पूर्व रूस में परीक्षण के दौरान सफलतापूर्वक मिसाइल दागी थी। दो अन्य युद्धपोतों आईएनएस तरकश और आईएनएस त्रिकंद को इस बेहद घातक मिसाइल से लैस किया जाएगा।
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रक्षा अधिकारियों के मुताबिक दो चरणों वाली इस मिसाइल का पहला चरण ठोस और दूसरा रैमजेट लिक्विड प्रोपेलेंट है। इस मिसाइल को पहले ही सेना और नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इस मिसाइल का वायुसेना संस्करण अंतिम चरण में है।
भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से बनी इस मिसाइल की चौड़ाई 670 मिलीमीटर और वजन करीब तीन टन है। नौ मीटर लंबी इस मिसाइल के लिए राडार पर नजर आए बगैर सतह पर स्थित ठिकानों को निशाना बनाना बेहद आसान है। यह मिसाइल अत्यंत कम निचाई पर भी उड़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि ध्वनि से कई गुना रफ्तार वाली ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है। ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की राजधानी मास्को की जीवनरेखा समझी जाने वाली नदी मस्कवा के नाम पर रखा गया है।