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नावेद को भारत की सीमा में घुसाने में किस-किस ने की मदद?

Sat, 08 Aug 2015 10:14 AM IST
Updated Sat, 08 Aug 2015 10:14 AM IST
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Naved reveals horror trail about his pak to India journey

जम्मू के उधमपुर से गिरफ्तार किए गए आतंकी नावेद से पूछताछ के दौरान कई अहम बातों का खुलासा हुआ है। उसने बताया कि 27 मई को कैसे उसकी पाकिस्तान समर्थित कश्मीर से भारत आने के सफर की शुरूआत हुई।

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उसने बताया कि वह कैसे भारत में घुसा, कहां छिपा रहा, किसने उसकी मदद की, कैसे वह उधमपुर पहुंचा और फिर कैसे बीएसएफ के काफिले पर हमला किया। इस दौरान उसने उन लोगों के नाम भी बताए जिन्होंने इस सफर के दौरान उसकी हर तरह से मदद की और जरूरी चीजें मुहैया कराई।
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नावेद के अनुसार उसने अपनी यात्रा की शुरुआता पाकिस्तान के हलान से शुरू की और 2 जून को वह नियंत्रण सीमा पर पहुंचा। उसके साथ तीन और लोग भी थे जिनमें से उसका साथी नोमान भी एक था जिसकी उधमपुर में सेना के बस को निशाना बनाकर हमला करने के दौरान मौत हो गई थी।

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जीपीएस के सहारे ठिकाने पर पहुंचे

Naved reveals horror trail about his pak to India journey
भारत की सीमा में घुसने के बाद वे जीपीएस की सहायता से करीब 20 किमी तक चलते रहे। उसके साथ जो दो अन्य लोग थे उनकी पहचान ओकाशा पख्तून और मोहम्मद भाई के नाम से हुई जो पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के रहने वाले थे।

उसने बताया कि 7 जुलाई को वह तंगमार्ग-बाबा रिषी मार्ग पहुंचे जहां एक स्थानीय निवासी उनको लेने आया। उसकी पहचान आशिक भट इलियास औबैदा के नाम से हुई। वहां से वे चारों दो अलग गुटों में बंट गए और वहां के स्थानीय लोगों की मदद से अलग-अलग जगहों पर रहने लगे।

सूत्रों के मुताबिक नावेद की निशानदेही पर उन लोगों कि तलाश शुरू कर दी गई है जिन्होंने इसकी मदद की। नावेद ने पूछताछ करने वाले अधिकारियों को यह भी बताया कि घाटी में लश्कर के कुछ लोग उसके पास आए थे जिन्होंने उनको कुछ पैसे हो अन्य जरूरी सामान दिए।

स्थानीय लोग करते हैं मदद

Naved reveals horror trail about his pak to India journey

नवेद ने पुलिस को बताया कि उन लोगों ने सेना के गतिविधियों की भी जानकारी उसको दी। इसके बाद 23 जुलाई को एक ट्रक ड्राइवर ने उनके ठिकाने से उसे और नोमान के अलावा लश्कर-ए-तैयबा के छह अन्य आतंकियों को साथ लेकर पुलवामा छोड़ आया।

उसने दावा किया कि लश्कर के छह आतंकियों जिसमें दक्षिण कश्मीर का एक डिवीजनल कमांडर भी शामिल है, जिसकी स्थानीय लोग मदद करते हैं। नावेद ने बताया कि कासिम नाम के लश्कर के एक अन्य आतंकी ने उन लोगों को आगे की रणनीति के बारे में बताया और उनके लिए एक गाड़ी की व्यवस्था की। उन लोगों ने रात को करीब 2 बजे एक ट्रक में छिपकर टोल प्लाजा को पार किया।

इसके बाद वे दोनों (नावेद और नोमान) पटनीटाप के नजदीक तमातर में रुके और अगली सुबह वह जम्मू के लिए निकल गए। उसने यह भी बताया कि उधमपुर आते समय वे एक कश्मीरी होटल में भी रुके जहां उन्होंने चाय नाश्ता किया। इसके बाद वो उधमपुर पहुंचे और बीएसएफ के काफिले पर हमला कर दिया।

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