नावेद को भारत की सीमा में घुसाने में किस-किस ने की मदद?
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जम्मू के उधमपुर से गिरफ्तार किए गए आतंकी नावेद से पूछताछ के दौरान कई अहम बातों का खुलासा हुआ है। उसने बताया कि 27 मई को कैसे उसकी पाकिस्तान समर्थित कश्मीर से भारत आने के सफर की शुरूआत हुई।
उसने बताया कि वह कैसे भारत में घुसा, कहां छिपा रहा, किसने उसकी मदद की, कैसे वह उधमपुर पहुंचा और फिर कैसे बीएसएफ के काफिले पर हमला किया। इस दौरान उसने उन लोगों के नाम भी बताए जिन्होंने इस सफर के दौरान उसकी हर तरह से मदद की और जरूरी चीजें मुहैया कराई।
नावेद के अनुसार उसने अपनी यात्रा की शुरुआता पाकिस्तान के हलान से शुरू की और 2 जून को वह नियंत्रण सीमा पर पहुंचा। उसके साथ तीन और लोग भी थे जिनमें से उसका साथी नोमान भी एक था जिसकी उधमपुर में सेना के बस को निशाना बनाकर हमला करने के दौरान मौत हो गई थी।
जीपीएस के सहारे ठिकाने पर पहुंचे
उसने बताया कि 7 जुलाई को वह तंगमार्ग-बाबा रिषी मार्ग पहुंचे जहां एक स्थानीय निवासी उनको लेने आया। उसकी पहचान आशिक भट इलियास औबैदा के नाम से हुई। वहां से वे चारों दो अलग गुटों में बंट गए और वहां के स्थानीय लोगों की मदद से अलग-अलग जगहों पर रहने लगे।
सूत्रों के मुताबिक नावेद की निशानदेही पर उन लोगों कि तलाश शुरू कर दी गई है जिन्होंने इसकी मदद की। नावेद ने पूछताछ करने वाले अधिकारियों को यह भी बताया कि घाटी में लश्कर के कुछ लोग उसके पास आए थे जिन्होंने उनको कुछ पैसे हो अन्य जरूरी सामान दिए।
स्थानीय लोग करते हैं मदद
नवेद ने पुलिस को बताया कि उन लोगों ने सेना के गतिविधियों की भी जानकारी उसको दी। इसके बाद 23 जुलाई को एक ट्रक ड्राइवर ने उनके ठिकाने से उसे और नोमान के अलावा लश्कर-ए-तैयबा के छह अन्य आतंकियों को साथ लेकर पुलवामा छोड़ आया।
उसने दावा किया कि लश्कर के छह आतंकियों जिसमें दक्षिण कश्मीर का एक डिवीजनल कमांडर भी शामिल है, जिसकी स्थानीय लोग मदद करते हैं। नावेद ने बताया कि कासिम नाम के लश्कर के एक अन्य आतंकी ने उन लोगों को आगे की रणनीति के बारे में बताया और उनके लिए एक गाड़ी की व्यवस्था की। उन लोगों ने रात को करीब 2 बजे एक ट्रक में छिपकर टोल प्लाजा को पार किया।
इसके बाद वे दोनों (नावेद और नोमान) पटनीटाप के नजदीक तमातर में रुके और अगली सुबह वह जम्मू के लिए निकल गए। उसने यह भी बताया कि उधमपुर आते समय वे एक कश्मीरी होटल में भी रुके जहां उन्होंने चाय नाश्ता किया। इसके बाद वो उधमपुर पहुंचे और बीएसएफ के काफिले पर हमला कर दिया।