कैसे व्हाट्सऐप ने नौशाद को अपनों से मिलाया
12 साल से बिछड़ा बेटा, मां-बाप से मिला तो मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए। बेटे को मिलवाने में व्यापार मंडल महामंत्री अमित अरोरा का प्रयास रंग लाया। उन्होंने व्हाट्सएप के जरिए बेटे को अपने परिवार से मिलवा दिया।
10 साल की उम्र में नौशाद दिल्ली से अपने घर से भाग निकला और किसी तरह मैलानी पहुंच गया। यहां उसे लोगों ने शरण दी। वह होटल पर काम कर गुजर-बसर करने लगा।
नौशाद (22) के मुताबिक थोड़ा समझदार होने पर वह वापस दिल्ली गया, लेकिन अपना घर नहीं ढूंढ़ पाया, जिस पर वह वापस मैलानी आ गया और होटलों पर काम करने लगा। उसने अपने मां-बाप से मिलने और घर पहुंचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी।
यह बात व्यापार मंडल महामंत्री अमित अरोरा को पता चली तो उन्होंने नौशाद को उसके मां-बाप से मिलवाने की ठान ली। उन्होंने व्हाट्सएप और फेसबुक पर नौशाद की फोटो डाल अपने मित्रों से मदद मांगी।
फोटो दिखाते ही पहचान गया नौशाद
नौशाद, पते के नाम पर दीनपुर (दिल्ली), मां-बाप, भाइयों और एकमात्र बहन का नाम बताता था। अमित ने वह सब भी व्हाट्सएप पर डाला। दिल्ली में रहने वाले शशिकांत सिंह ने इस पर गौर किया और उन्होंने दीनपुर में रहने वाले अपने मित्रों से संपर्क कर नौशाद की खोज करने को कहा।
इसी दौरान नौशाद को माता-पिता मिल गए। व्हाट्सएप के जरिए ही माता-पिता के फोटो अमित के पास आए। अमित ने फोटो नौशाद को दिखाए तो वह फौरन उन्हें पहचान गया।
अमित ने नौशाद के पिता से संपर्क कर उन्हें यहां बुलाया। बुधवार की सुबह माता-पिता मैलानी पहुंचे और 12 साल से बिछड़े अपने बेटे से मिले। बेटे को पाकर मां की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
नौशाद के पिता इदरीस ने बताया कि वह मूलत: बिहार के रहने वाले हैं और रोजी की तलाश में पंजाब से दिल्ली पहुंच गए और दीनपुर, नजफगढ़, पश्चिमी दिल्ली में बस गए।
बताया कि नौशाद कक्षा सात में पढ़ता था, डांटने पर वह घर से भाग गया। काफी खोजबीन के बाद भी न मिलने पर वह मन मसोस कर बैठ गए। अब बेटे को पाकर वह खुश हैं।
नौशाद की खुशी का नहीं कोई ठिकाना
मां-बाप को पाकर नौशाद ने बाजार से लेकर मोहल्ला धर्मशाला, दामोदरपुर तक में घर-घर जाकर मिठाई बांटी। नौशाद ने बताया कि उसने मुकद्दस रमजान माह में पूरी तरावीह की नमाज अदा की और बार-बार खुदा से अपने मां-बाप और घरवालों से मिलवा देने की दुआ मांगीं। खुदा ने उसकी दुआ पूरी कर दी।
इदरीस खां ने बताया कि उनके चार बेटे तनवीर, मिट्ठू, नौशाद, दिलशाद तथा एक बेटी हैं। पहले नौशाद घर छोड़कर चला गया। तीन साल पहले सबसे छोटा बेटा दिलशाद भी घर छोड़कर चला गया। उसका भी कोई अता-पता नहीं है।
व्यापार मंडल महामंत्री अमित अरोरा को बिछड़ों को उनके परिवारवालों से मिलाने का जुनून है। अब तक वह तीन लोगों को पहले ही उनके घरवालों तक पहुंचा चुके हैं। अब नौशाद को उसके मां-बाप से मिलवाने का उनका चौथा मामला है। उनका कहना है कि इस काम में उन्हें अपार खुशी मिलती है। हालांकि इसमें उनका काफी खर्चा हो जाता है लेकिन बिछड़ों के मिल जाने के बाद उन्हें सुकून होता है।