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यूपी का करिश्माई आश्रम! जहां छूमंतर हो जाती हैं गंभीर बीमारियां

Wed, 20 May 2015 05:00 PM IST
Updated Wed, 20 May 2015 05:00 PM IST
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natural treatment in arogya ashram

हवा, पानी, मिट्टी, अग्नि और धूप। यानी पंच तत्व। कहा जाता है कि इन्हीं पांच तत्वों से हमारा शरीर बना है। इनके बिना रोज की दिनचर्या की कल्पना असंभव है, तो इनमें लाइलाज बीमारियों का राज और इलाज भी छिपा है।

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बागपत रोड स्थित गांव पांचली खुर्द में वर्ष-1972 से संचालित महात्मा जगदीश्वरानंद आरोग्य आश्रम में इन्हीं पांच तत्वों से तमाम बीमारियों का उपचार किया जा रहा है। बड़े-बड़े अस्पतालों से जवाब मिलने के बाद लोग यहां आ रहे हैं और स्वस्थ होकर जा रहे हैं।
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आश्रम में गरीबों को निशुल्क इलाज मिलता है, वहीं अन्य को एक निर्धारित शुल्क अदा करना पड़ता है। मरीज किस क्लास के कमरे में रहना चाहता है, उसका चार्ज अलग-अलग है। यहां रोजाना का खर्च 250 से 800 रुपये तक है। आगे की स्लाइड में पढ़िए कि कैसे-कैसे रोगी यहां ठीक हो चुके हैं।

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उल्टे हाथ से नहीं पकड़ पाते थे सीधा कान

natural treatment in arogya ashram

केपी सिंह गोवा में फाइनेंस का काम करते हैं। वे अपने उल्टे हाथ से सीधा कान नहीं पकड़ पाते थे। यानी उनके हाथ का मूवमेंट लगभग खत्म हो चला था। गोवा से लेकर मुंबई तक कई चिकित्सकों को दिखाया।

किसी ने दवा चलाई तो किसी ने ऑपरेशन की सलाह दी। वे सभी जगह से हार गए। इस बीच, उन्हें पांचली खुर्द के आरोग्य आश्रम के बारे में पता चला तो वे अपनी पत्नी के साथ यहां आ गए। महज 21 दिन के उपचार के बाद ही अब वे अपने उल्टे हाथ से सीधा कान पकड़ लेते हैं तो कमर के पीछे दोनों हाथ की अंगुलियों को भी।

ये भी हुए इस बीमारी से ठीक
बिजनौर के आदित्य वीर सिंह लंबे समय से जोड़ों के दर्द से पीड़ित थे। तमाम जगह दिखाया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। वर्ष-2007 में उन्हें किसी ने आरोग्य आश्रम के बारे में बताया तो वे यहां आए और लगभग एक माह तक उपचार लिया। कुछ आराम मिला तो बीच में ही उपचार छोड़कर चले गए। अब वे दोबारा आश्रम पहुंचे हैं। वे कहते हैं कि मुझे सारे शरीर में दर्द रहता था, लेकिन उपचार लेने के बाद सिर्फ कमर में दर्द रह गया। अब कमर का दर्द ठीक कराने के लिए ही आया हूं।

14 लोगों की टीम करती है मरीजों का उपचार

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पिलखुवा, हापुड़ के यश गर्ग सोरायसिस से पीड़ित थे। कई जगह उपचार कराया। कई चिकित्सकों ने तो यह कह दिया कि एलोपैथी में इसका कोई इलाज नहीं है। इस बीच, पांचली खुर्द के आश्रम के बारे में पता चलने पर वे यहां आ गए। यहां महज 13 दिन के उपचार के बाद उनकी बीमारी लगभग 40 फीसदी ठीक हो गई है।

महात्मा जगदीश्वरानंद आरोग्य आश्रम में मुख्य चिकित्सक डॉ. काशीनाथ किरनापुरे समेत 14 लोगों की टीम मरीजों का उपचार करती है। यहां एक समय में 60 लोगों का उपचार किया जाता है। हालांकि, मरीजों की संख्या ज्यादा होती है। ऐसे में लोगों को थोड़ा इंतजार करना पड़ता है।

डॉ. काशीनाथ किरनापुरे कहते हैं कि यहां देर है, लेकिन अंधेर नहीं। इस बात की तो गारंटी है कि मरीज ठीक होकर जाएगा। बस इलाज के लिए साहस, संयम और धैर्य की जरूरत है। उन्होंने बताया कि एक साल में 700-800 मरीज उपचार के लिए आते हैं। इसमें 90 फीसदी पूरी तरह ठीक होकर जाते हैं। 10 फीसदी वे लोग हैं, जो उपचार के कड़े नियमों का पालन नहीं कर पाते।

जान लीज‌िए क्या है उपचार का तरीका

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आरोग्याश्रम के नियम कुछ कड़े हैं। मरीज को 24 घंटे आश्रम में रहना होता है। आश्रम के हिसाब से ही भोजन और उपचार लेना होता है। इलाज के दौरान भोजन में सुबह एक गिलास जूस, दोपहर में उबली हुई लौकी, अंकुरित अनाज और सलाद दिया जाता है।

शाम को एक गिलास सब्जी का जूस दिया जाता है। अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर है तो उसे थोड़ी अच्छी डाइट दी जाती है। उपचार के लिए सुबह साढ़े पांच बजे एनीमा दिया जाता है। नेती कराई जाती है और फिर योग।

इन सब के बाद बीमारी के अनुसार व्यक्ति को गर्म पट्टी का लेप दिया जाता है। गर्म और ठंडे पानी से स्नान कराया जाता है। अग्नि (स्टीम बनाकर) से भी उपचार दिया जाता है। बीमारी के अनुसार धूप और हवा का भी उपचार में अहम महत्व है। आरोग्याश्रम का दावा है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति का एक दिन में औसतन आधा किलो वजन कम होता है।

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