नेशनल हेराल्ड की जमीन पर थी बैंक बनाने की तैयारी
नेहरु-गांधी परिवार से जुड़ी मेसर्स एसोसिएट जर्नल्स कंपनी के अखबार नेशनल हेराल्ड के लिए मुंबई के पश्चिम उपनगर बांद्रा में दी गई जमीन पर महाराष्ट्र का सबसे बड़ा को-ऑपरेटिव बैंक बनाने की योजना थी। इसके लिए स्वरूप ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज ने 10 लाख रुपये भी दिए थे। सूचना के अधिकार के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है।
इस करार से पता चलता है कि अखबार, पुस्तकालय व अनुसंधान केंद्र के लिए सरकार से हासिल की गई जमीन के व्यवसायिक इस्तेमाल की पहले से ही योजना थी।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने बताया कि मुंबई उपनगर जिलाधिकारी कार्यालय ने स्वरूप ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज से मेसर्स एसोसिएट जर्नल्स कंपनी के करार का खुलासा किया है।
बैंक बनाने के लिए हुआ है करार
स्वरूप ग्रुप ने तीन दिसंबर 2003 को मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी को पत्र
भेजा था। जिसमें उसने दावा किया था कि सॉफ्टवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर
डेवलपमेंट क्षेत्र में कार्यरत ग्रुप ने मेसर्स एसोसिएट जर्नल्स कंपनी के
साथ रिसर्च के लिए लाइब्रेरी और महाराष्ट्र की सबसे बड़ी को-ऑपरेटिव बैंक
बनाने के लिए करार किया है।
उन्हें सुझाव दिया गया है कि जमीन की शेष रकम
अदा करे इसलिए 10 लाख रुपये का चेक भेज रहे हैं। बकाया राशि की जानकारी दें
ताकि उसे किश्तों में अदा किया जा सके। गलगली ने बताया कि स्वरूप ग्रुप का
चेक कुछ कारणों से स्वीकार नही किया गया। उसके बाद कंपनी ने पुन: 24 मई
2004 को 10 लाख रुपये का चेक भेजकर पुराना चेक मुंबई उपनगर जिलाधिकारी
कार्यालय से वापस लिया।
मुंबई उपनगर जिलाधिकारी ने पांच फरवरी 2005 को
मेसर्स एसोसिएट जर्नल्स कंपनी के अध्यक्ष को पत्र भेजकर कहा था कि 99 लाख
71 हजार 894 रुपये अदा करे या उतने ही रकम की बिना शर्त बैंक गारंटी दे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूबे के अतिरिक्त मुख्य सचिव गौतम चटर्जी
की अध्यक्षता में नेशनल हेराल्ड मामले की जांच का आदेश दिया है।