फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   National hareld case would be a game changer for congress?

नेशनल हेरल्ड केसः कांग्रेस को फायदा या नुकसान?

Sun, 20 Dec 2015 03:25 PM IST
Updated Sun, 20 Dec 2015 03:25 PM IST
विज्ञापन
National hareld case would be a game changer for congress?

पिछले आम चुनावों में हाशिये पर पहुंच गई कांग्रेस पार्टी के लिए नेशनल हेरल्ड मामला किसी संजीवनी से कम नहीं लग रहा है। पेशी होने के एक दिन पहले तक जमानत न लेने और फिर सोनिया और राहुल के अदालत में पेश होने की खासी रही। लेकिन सोनिया गांधी को क्या इससे कोई राजनीतिक फायदा मिलेगा?

विज्ञापन


बीबीसी से बातचीत में राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई कहते हैं, “सोनिया गांधी को इस मामले में दो कारणों से अपना राजनीतिक भविष्य दिखाई दे रहा है। एक तो ये कि इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और सरकार में एक भ्रम की स्थिति बनी हुई है।”
विज्ञापन


वो कहते हैं, “सुब्रमण्यम स्वामी ने ये इल्जाम लगाया, जबकि उनका कहना है कि ऐसा उन्होंने निजी तौर पर किया है। इसके बाद ईडी के जिस अधिकारी ने कहा था इसमें कोई ठोस मामला नहीं बनता, उसका ट्रांसफर हो गया।” रशीद किदवई के मुताबिक, दूसरा कारण ये है कि नेशनल हेरल्ड का पूरा मामला भ्रष्टाचार के मामले से थोड़ा अलग है। यूपीए सरकार के दौरान ही वो अखबार बंद हो गया था और उसकी तमाम जमीनें मुकदमेबाजी में फंसी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

राहुल को आगे लाने की कोशिश

National hareld case would be a game changer for congress?

जानकार ये मानते हैं कि ऐसे में सोनिया गांधी का आंकलन हो सकता है कि मुकदमे में उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं, लेकिन इसका राजनीतिक फायदा उठाया जा सकता है। और ये तो कांग्रेस जोरशोर से कह ही रही है कि मोदी सरकार राजनीतिक बदले की मंशा से काम कर रही है।

किदवई कहते हैं, “इस मामले का सबसे बड़ा पहलू ये है कि अगर कोई कहता है कि धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार हुआ तो पीड़ित पक्ष भी होना चाहिए लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी तो पीड़ित नहीं हैं। इसमें कई पहलू हैं, कांग्रेस को न तो कानूनन दोषमुक्त किया जा सकता है और न ही दोषी ठहराया जा सकता है।” इन सब का आंकलन करते हुए पूरे मामले का राजनीतिक फायदा उठाने की कांग्रेस की कोशिश है। रशीद किदवई उनके मुताबिक, “कांग्रेस इस समय सबसे बुरी स्थिति में है। संगठन में तरह के स्वर गूंज रहे हैं।

एक धड़ा इस बात की पैरवी कर रहा है कि सोनिया कमान संभाल कर रखें, तो दूसरा धड़ा राहुल को आगे लाना चाहता है। लेकिन पेशी के दौरान का नजारा बताता है कि दोनों ही धड़े एकजुट हुए हैं।” लेकिन पेशी के दौरान शक्ति प्रदर्शन के खास मायने हैं। इस दौरान पार्टी के सभी कद्दावर नेता एकजुट नजर आए और पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी एक साथ दिखी।

कांग्रेस के अस्तित्व की लड़ाई

National hareld case would be a game changer for congress?

रशीद किदवई कहते हैं, “असल में कांग्रेस के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है। वो वैचारिक लड़ाई में लगातार पिछड़ रही है। जिन राज्यों में भाजपा हार रही है वहां भी कांग्रेस की जीत नहीं हो रही है। ऐसे कठिन समय में इस मुद्दे के जरिए कांग्रेस के हाथ ऐसा मौका लगा जो पार्टी के लिए ऑक्सीजन की तरह है।”

उनके मुताबिक, “कांग्रेस इस मुद्दे पर देश में अपने लिए एक सहानुभूति का माहौल बनाना चाहती है। वो ये दिखाना चाहती है कि 10 सालों के राज में राहुल और सोनिया पर सीधे कोई बड़ा इल्जाम नहीं लगा। और ये भी दिखाना चाहती है कि नेशनल हेरल्ड से कैसे कमाई की जा सकती है, एक ऐसा अखबार जो अपनी ही मौत मर गया।”

कांग्रेस को लगता है कि इस अवसर पर कम से कम अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सकता है ताकि वो सड़कों पर उतरें। ऐसा संघर्ष का माहौल बनाने के लिए एक संदेश देने की जरूरत महसूस की जा रही थी, जो 16 मई 2014 के बाद से कांग्रेस में गायब सा हो गया था। कांग्रेस का ये मकसद भी भली प्रकार हल हो रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed