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गंगा में तैरती लाशों पर केंद्र और यूपी को कड़ी फटकार

Tue, 19 Jan 2016 09:39 AM IST
Updated Tue, 19 Jan 2016 09:39 AM IST
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national green tribunal comments on ganga's

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भले ही नारे स्वच्छ और निर्मल गंगा के गूंज रहे हों लेकिन हकीकत कुछ और ही है। गंगा में प्रदूषण की स्थिति यह है कि नदी में इंसान और जानवरों के लाशें तैरती दिखाई दे रही हैं।

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश की गई तस्वीरों पर गौर करने के बाद ग्रीन बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार की कथनी (नारों) और करनी (काम) में अंतर दिखाई दे है।
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वाराणसी में गंगा के प्रदूषित होने पर केंद्र और यूपी प्रशासन की लापरवाही को लेकर ग्रीन बेंच ने दोनों को फटकार भी लगाई। बेंच ने कहा कि इस मामले पर जांच कर तत्काल कदम उठाइए। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।
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संयुक्त जांच के निर्देश

national green tribunal comments on ganga's

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को एडवोकेट व पर्यावरणविद एमसी मेहता के मामले को लेकर सुनवाई की। इस दौरान एडवोकेट गौरव कुमार बंसल ने ट्रिब्यूनल के समक्ष वाराणसी में गंगा की स्थिति को लेकर तस्वीरें पेश कीं।

एडवोकेट बंसल ने कहा कि जानवर और इंसानों के लाश गंगा नदी में तैर रहे हैं। जबकि प्रशासन इस मामले पर खामोश है। ग्रीन बेंच ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधि को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच गंगा के मिलन बिंदु पर संयुक्त जांच के लिए भी निर्देश दिया है।

मालूम हो कि हाल ही में एनजीटी ने जल संसाधन मंत्रालय के जरिये नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी को कहा था कि वह गंगा सफाई को लेकर यूपी और उत्तराखंड को बिना ग्रीन बेंच की अनुमति के फंड न दें।

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