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यूपी में बिजली किल्लत झेलने को रहें तैयार
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Fri, 14 Sep 2012 12:55 PM IST
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उत्तर प्रदेश में अगले महीने दुर्गापूजा व दशहरा के दौरान बिजली की किल्लत हो सकती है। उत्तरी क्षेत्र विद्युत समिति (एनआरपीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक अक्तूबर में उत्तरी ग्रिड से जुड़े उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों में बिजली की किल्लत रहने वाली है। यूपी में मांग के मुकाबले 24 फीसदी से ज्यादा बिजली की कमी रहने का अनुमान लगाया गया है। चूंकि अक्तूबर से शुरू हो रहे फेस्टिवल सीजन को देखते हुए एनआरपीसी ने उत्तरी क्षेत्र के सभी राज्यों से आपूर्ति की प्लानिंग व बिजली की कमी को पूरा करने की कार्य योजना तैयार करने को कहा है।
इस मुद्दे पर दिल्ली में शुक्रवार एनआरपीसी की ऑपरेशन कोआर्डिनेशन उपसमिति (ओसीसी) की बैठक होगी। इसमें राज्यों से यह भी पूछा जाएगा कि संभावित कमी को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
एनआरपीसी की रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर में यूपी में बिजली की औसत मांग 12,000 मेगावाट के आसपास रहने की संभावना है जबकि संभावित उपलब्धता 9,103 मेगावाट रहेगी। यानी मांग और उपलब्धता में 2,897 मेगावाट का अंतर बना रहेगा।
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शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं के अनुसार चूंकि अगले महीने नवरात्र पड़ रहा है इसलिए मांग में और इजाफा हो सकता है। प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता में भारी अंतर को पूरा करने के लिए एनआरपीसी ने यूपी समेत सभी राज्यों से बिजली की कमी से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने और पहले से ही अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने को कहा है ताकि ग्रिड का संचालन सुचारु रूप से हो सके।
यूपी में 24 फीसदी कमी का अनुमान
एनआरपीसी द्वारा कराए गए आकलन के अनुसार अक्तूबर में चंडीगढ़, दिल्ली व हिमाचल प्रदेश को छोड़कर उत्तरी ग्रिड से बाकी छह राज्यों में बिजली की कमी बनी रहेगी। यूपी में सबसे ज्यादा 24.1 फीसदी की कमी का अनुमान है जबकि पंजाब में 28.7 फीसदी, उत्तराखंड में 5.6, राजस्थान में 8.0, जम्मू कश्मीर में 17.9 और हरियाणा में 8.6 फीसदी बिजली की कमी रहने की आशंका जताई गई है।
जहां तक यूपी का सवाल है तो फिलहाल प्रदेश के उपभोक्ताओं को अभी और बिजली संकट झेलना पड़ेगा। मौजूदा समय में बिजली की मांग और उपलब्धता में लगभग 2,000 मेगावाट का अंतर बना हुआ है। अगले महीने इसमें कमी के बजाय बढ़ोतरी होने की संभावना है।
संभावित लोड का आकलन करके अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करने की कोशिश की जा रही है। ताकि बेहतर आपूर्ति हो सके।
-एपी मिश्रा, प्रबंध निदेशक, पावर कॉर्पोरेशन
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इस मुद्दे पर दिल्ली में शुक्रवार एनआरपीसी की ऑपरेशन कोआर्डिनेशन उपसमिति (ओसीसी) की बैठक होगी। इसमें राज्यों से यह भी पूछा जाएगा कि संभावित कमी को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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एनआरपीसी की रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर में यूपी में बिजली की औसत मांग 12,000 मेगावाट के आसपास रहने की संभावना है जबकि संभावित उपलब्धता 9,103 मेगावाट रहेगी। यानी मांग और उपलब्धता में 2,897 मेगावाट का अंतर बना रहेगा।
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शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं के अनुसार चूंकि अगले महीने नवरात्र पड़ रहा है इसलिए मांग में और इजाफा हो सकता है। प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता में भारी अंतर को पूरा करने के लिए एनआरपीसी ने यूपी समेत सभी राज्यों से बिजली की कमी से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने और पहले से ही अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करने को कहा है ताकि ग्रिड का संचालन सुचारु रूप से हो सके।
यूपी में 24 फीसदी कमी का अनुमान
एनआरपीसी द्वारा कराए गए आकलन के अनुसार अक्तूबर में चंडीगढ़, दिल्ली व हिमाचल प्रदेश को छोड़कर उत्तरी ग्रिड से बाकी छह राज्यों में बिजली की कमी बनी रहेगी। यूपी में सबसे ज्यादा 24.1 फीसदी की कमी का अनुमान है जबकि पंजाब में 28.7 फीसदी, उत्तराखंड में 5.6, राजस्थान में 8.0, जम्मू कश्मीर में 17.9 और हरियाणा में 8.6 फीसदी बिजली की कमी रहने की आशंका जताई गई है।
जहां तक यूपी का सवाल है तो फिलहाल प्रदेश के उपभोक्ताओं को अभी और बिजली संकट झेलना पड़ेगा। मौजूदा समय में बिजली की मांग और उपलब्धता में लगभग 2,000 मेगावाट का अंतर बना हुआ है। अगले महीने इसमें कमी के बजाय बढ़ोतरी होने की संभावना है।
संभावित लोड का आकलन करके अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करने की कोशिश की जा रही है। ताकि बेहतर आपूर्ति हो सके।
-एपी मिश्रा, प्रबंध निदेशक, पावर कॉर्पोरेशन