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प्रेग्नेंसी किशोरियों की मौत का सबसे बड़ा कारण
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
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किशोरियों के असमय मौत का सबसे बड़ा कारण कम उम्र में उनका गर्भ्र धारण करना है। हाल ही में जारी एक संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में हर साल प्रसव के दौरान संक्रमण या किसी अन्य बीमारी के कारण 10 लाख किशोरियों की मौत हो जाती है। इस समस्या का सबसे बड़ा कारण किशोरियों को गर्भनिरोधक उपायों की कम जानकारी अथवा इन सुविधाओं का वक्त पर न मिल पाना बताया गया है।
SAVE THE CHILDREN और EVERY WOMAN'S RIGHT नामक संस्थाओं ने मिलकर किशोरियों के असमय मौत के कारणों को पता लगाने के लिए सर्वे कराया। सर्वे के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 साल तक के उम्र की लड़कियों के गर्भधारण करने पर उनकी मौत की संभावना काफी बढ़ जाती है।
वहीं 20 साल के उम्र में गर्भधारण करने वाली लड़कियों के असमय मौत की संभावना पांच फीसदी घट जाती है। खास बात यह है कि कम उम्र की मां से पैदा हुए बच्चों के मौत की भी संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम उम्र की मां से पैदा हुए करीब एक लाख बच्चों की हर साल असमय मौत हो जाती है।
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भारत की स्थिति काफी खराब
रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों में 40 प्रतिशत किशोरियों को उनकी इच्छा के विरुद्घ मां बनने के लिए मजबूर किया जाता है। इसके अलावा महिलाओं के एक बड़े वर्ग को परिवार नियोजन की सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है।
यह स्थिति सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र दक्षिण एशिया में ज्यादा होती है। भारत में हर साल 6.4 करोड़ महिलाओं की मौत गर्भावस्था के दौरान हो जाती है। वहीं पाकिस्तान में सालाना 1.5 करोड़ और बांग्लादेश में एक करोड़ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान काल के गाल में समा जाती हैं।
कम जानकारी बनती है जंजाल
रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक़ भारत में 15 से 19 साल के बीच 47 प्रतिशत लड़कियां सामान्य से कम वजन की हैं जबकि 56 प्रतिशत महिलाएं रक्त हीनता से पीड़ित हैं।
साल 2008 में भारत की 15 से 24 साल की लड़कियों पर यौन शिक्षा के ऊपर एक सर्वे कराया गया था। सर्वे में शामिल लड़कियों में आधी से ज्यादा ने कहा कि उन्हें कभी कोई यौन-शिक्षा नहीं मिली। जबकि 30 प्रतिशत लड़कियों को कंडोम तक की जानकारी नहीं थी और 77 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने कभी किसी से गर्भनिरोध के बारे में बात नहीं की।
कम उम्र में गर्भवती होने को बाल विवाह से जोड़ा जाता है। हर साल 18 वर्ष से कम उम्र की लगभग एक करोड़ लड़कियों (प्रतिदन औसतन 25,000 लड़कियां) की शादी होती है। भारत में हर साल 15 से 19 साल के बीच शादी होने वालों की संख्या 30 प्रतिशत है। इस उम्र में शादी करने वाले लड़कों की संख्या मात्र 5 प्रतिशत है। भारत में हुए सर्वेक्षणों मे पाया गया कि वर्तमान में शादीशुदा महिलाओं में हर पांच में से एक महिला ही अपने पति के साथ परिवार नियोजन की चर्चा करती हैं।
2012 में 80 लाख मौतों का अनुमान
save the children संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि कम उम्र में गर्भधारण करने पर किशोरियों को कई तरह की शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में परिजन किशोरियों की सही देखभाल और उपचार कराने के बजाय उनसे किनारा कर लेते हैं। इससे होने वाले बच्चों की सेहत को भी खतरा रहता है।
उन्होंने बताया कि अगर मां 18 साल से कम उम्र की है तो उसके नवजात शिशु के मौत की आशंका बढ़ जाती है। सेव द चिल्ड्रिन नामक संस्था ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार विकासशील देशों में 2012 में 80 लाख अनायास या प्रीमेच्योर बच्चे की मौत हो जाएगी।
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SAVE THE CHILDREN और EVERY WOMAN'S RIGHT नामक संस्थाओं ने मिलकर किशोरियों के असमय मौत के कारणों को पता लगाने के लिए सर्वे कराया। सर्वे के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 साल तक के उम्र की लड़कियों के गर्भधारण करने पर उनकी मौत की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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वहीं 20 साल के उम्र में गर्भधारण करने वाली लड़कियों के असमय मौत की संभावना पांच फीसदी घट जाती है। खास बात यह है कि कम उम्र की मां से पैदा हुए बच्चों के मौत की भी संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम उम्र की मां से पैदा हुए करीब एक लाख बच्चों की हर साल असमय मौत हो जाती है।
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भारत की स्थिति काफी खराब
रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों में 40 प्रतिशत किशोरियों को उनकी इच्छा के विरुद्घ मां बनने के लिए मजबूर किया जाता है। इसके अलावा महिलाओं के एक बड़े वर्ग को परिवार नियोजन की सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है।
यह स्थिति सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र दक्षिण एशिया में ज्यादा होती है। भारत में हर साल 6.4 करोड़ महिलाओं की मौत गर्भावस्था के दौरान हो जाती है। वहीं पाकिस्तान में सालाना 1.5 करोड़ और बांग्लादेश में एक करोड़ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान काल के गाल में समा जाती हैं।
कम जानकारी बनती है जंजाल
रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक़ भारत में 15 से 19 साल के बीच 47 प्रतिशत लड़कियां सामान्य से कम वजन की हैं जबकि 56 प्रतिशत महिलाएं रक्त हीनता से पीड़ित हैं।
साल 2008 में भारत की 15 से 24 साल की लड़कियों पर यौन शिक्षा के ऊपर एक सर्वे कराया गया था। सर्वे में शामिल लड़कियों में आधी से ज्यादा ने कहा कि उन्हें कभी कोई यौन-शिक्षा नहीं मिली। जबकि 30 प्रतिशत लड़कियों को कंडोम तक की जानकारी नहीं थी और 77 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने कभी किसी से गर्भनिरोध के बारे में बात नहीं की।
कम उम्र में गर्भवती होने को बाल विवाह से जोड़ा जाता है। हर साल 18 वर्ष से कम उम्र की लगभग एक करोड़ लड़कियों (प्रतिदन औसतन 25,000 लड़कियां) की शादी होती है। भारत में हर साल 15 से 19 साल के बीच शादी होने वालों की संख्या 30 प्रतिशत है। इस उम्र में शादी करने वाले लड़कों की संख्या मात्र 5 प्रतिशत है। भारत में हुए सर्वेक्षणों मे पाया गया कि वर्तमान में शादीशुदा महिलाओं में हर पांच में से एक महिला ही अपने पति के साथ परिवार नियोजन की चर्चा करती हैं।
2012 में 80 लाख मौतों का अनुमान
save the children संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि कम उम्र में गर्भधारण करने पर किशोरियों को कई तरह की शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में परिजन किशोरियों की सही देखभाल और उपचार कराने के बजाय उनसे किनारा कर लेते हैं। इससे होने वाले बच्चों की सेहत को भी खतरा रहता है।
उन्होंने बताया कि अगर मां 18 साल से कम उम्र की है तो उसके नवजात शिशु के मौत की आशंका बढ़ जाती है। सेव द चिल्ड्रिन नामक संस्था ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार विकासशील देशों में 2012 में 80 लाख अनायास या प्रीमेच्योर बच्चे की मौत हो जाएगी।