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आदर्श घोटाले में मेरी भूमिका नहीं:देश्ामुख
मुम्बई/एजेंसी
Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने बुधवार को दोहराया कि आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। अलबत्ता उन्होंने अपने मंत्रालय के पूर्व सहयोगियों अशोक चव्हाण और जयंत पटेल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। देशमुख, आदर्श हाउसिंग सोसायटी के फ्लैटों के आवंटन में अनियमितताओं की जांच कर रहे दो सदस्यीय आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने घोटाले के लिए एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण और तत्कालीन वित्त मंत्री पटेल को जिम्मेदार ठहराया।
देशमुख ने कहा कि उन्होंने आदर्श सोसायटी से सम्बंधित फाइलों पर हस्ताक्षर तब किए थे, जब दोनों मंत्रियों ने सहमति जताई थी। देशमुख इस समय केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हैं। उनसे दो सदस्यीय आयोग ने लगातार दूसरे दिन पूछताछ की। इस न्यायिक आयोग के दो सदस्यों में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जेए पाटील तथा राज्य के पूर्व मुख्य सचिव पी सुब्रह्मण्यम शामिल हैं।
देशमुख ने मंगलवार को आयोग से कहा था कि उन्होंने आदर्श सोसायटी से सम्बंधित फाइलों को स्वीकृति इसलिए दी थी, क्योंकि वरिष्ठ नौकरशाह इन फाइलों की जांच पहले ही कर चुके थे। इससे पहले, सोमवार को आयोग ने महाराष्ट्र के एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे से पूछताछ की थी। शिंदे ने कहा था कि सरकारी भूमि के आवंटन और आदर्श हाउसिंग सोसायटी की इमारत में अतिरिक्त तल बनाने की मंजूरी से सम्बंधित फैसले देशमुख के कार्यकाल के दौरान लिए गए थे।
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दो सदस्यीय न्यायिक आयोग का ध्यान फिलहाल इस बात पर है कि आदर्श हाउसिंग सोसायटी को स्वीकृतियां कैसे दी गईं, इस पर तीन पूर्व मुख्यमंत्री क्या कहते हैं। आयोग ने चव्हाण को पूछताछ के लिए 30 जून को बुलाया है। आदर्श सोसायटी घोटाला, दक्षिणी मुम्बई के कोलाबा इलाके के एक प्रमुख भूखंड पर बनी 31 मंजिली इमारत से जुड़ा हुआ है, जिसका निर्माण इस सोसायटी ने कराया था।
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देशमुख ने कहा कि उन्होंने आदर्श सोसायटी से सम्बंधित फाइलों पर हस्ताक्षर तब किए थे, जब दोनों मंत्रियों ने सहमति जताई थी। देशमुख इस समय केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हैं। उनसे दो सदस्यीय आयोग ने लगातार दूसरे दिन पूछताछ की। इस न्यायिक आयोग के दो सदस्यों में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जेए पाटील तथा राज्य के पूर्व मुख्य सचिव पी सुब्रह्मण्यम शामिल हैं।
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देशमुख ने मंगलवार को आयोग से कहा था कि उन्होंने आदर्श सोसायटी से सम्बंधित फाइलों को स्वीकृति इसलिए दी थी, क्योंकि वरिष्ठ नौकरशाह इन फाइलों की जांच पहले ही कर चुके थे। इससे पहले, सोमवार को आयोग ने महाराष्ट्र के एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे से पूछताछ की थी। शिंदे ने कहा था कि सरकारी भूमि के आवंटन और आदर्श हाउसिंग सोसायटी की इमारत में अतिरिक्त तल बनाने की मंजूरी से सम्बंधित फैसले देशमुख के कार्यकाल के दौरान लिए गए थे।
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दो सदस्यीय न्यायिक आयोग का ध्यान फिलहाल इस बात पर है कि आदर्श हाउसिंग सोसायटी को स्वीकृतियां कैसे दी गईं, इस पर तीन पूर्व मुख्यमंत्री क्या कहते हैं। आयोग ने चव्हाण को पूछताछ के लिए 30 जून को बुलाया है। आदर्श सोसायटी घोटाला, दक्षिणी मुम्बई के कोलाबा इलाके के एक प्रमुख भूखंड पर बनी 31 मंजिली इमारत से जुड़ा हुआ है, जिसका निर्माण इस सोसायटी ने कराया था।