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प्रणब के विरोध पर प्रसेनजीत माकपा से निष्कासित
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के फैसले का विरोध करने पर पार्टी नेता प्रसेनजीत बोस को शनिवार को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। बोस पार्टी की अनुसंधान इकाई के संयोजक थे।
उन्होंने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और मुखर्जी को समर्थन दिए जाने के पार्टी के फैसले के खिलाफ खुला पत्र जारी किया था। पार्टी ने हालांकि घोषणा की कि बोस के इस्तीफे संबंधी पत्र को खारिज कर दिया गया और इसके बदले उन्हें निष्कासित कर दिया गया।
माकपा के बयान में कहा गया है, "पोलितब्यूरो ने पार्टी की अनुसंधान इकाई के संयोजक प्रसेनजीत बोस द्वारा पेश इस्तीफे संबंधी पत्र को खारिज कर दिया।" बयान में कहा गया है, "पार्टी पत्र में कही गई उन बातों को खारिज करती है जो पार्टी की राजनीतिक सोच को बदनाम करने की नीयत से लिखी गई है। पोलितब्यूरो प्रसेनजीत बोस को पार्टी के संविधान के अनुच्छेद 8 (2) के तहत माकपा की सदस्यता से निष्कासित करता है।"
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की डिग्री हासिल कर चुके बोस टीवी चैनलों पर होने वाली बहसों में अक्सर शामिल होते रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को जारी अपने पत्र में लिखा था कि माकपा ने मुखर्जी को समर्थन देकर 'भयंकर भूल' की है।
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उन्होंने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और मुखर्जी को समर्थन दिए जाने के पार्टी के फैसले के खिलाफ खुला पत्र जारी किया था। पार्टी ने हालांकि घोषणा की कि बोस के इस्तीफे संबंधी पत्र को खारिज कर दिया गया और इसके बदले उन्हें निष्कासित कर दिया गया।
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माकपा के बयान में कहा गया है, "पोलितब्यूरो ने पार्टी की अनुसंधान इकाई के संयोजक प्रसेनजीत बोस द्वारा पेश इस्तीफे संबंधी पत्र को खारिज कर दिया।" बयान में कहा गया है, "पार्टी पत्र में कही गई उन बातों को खारिज करती है जो पार्टी की राजनीतिक सोच को बदनाम करने की नीयत से लिखी गई है। पोलितब्यूरो प्रसेनजीत बोस को पार्टी के संविधान के अनुच्छेद 8 (2) के तहत माकपा की सदस्यता से निष्कासित करता है।"
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की डिग्री हासिल कर चुके बोस टीवी चैनलों पर होने वाली बहसों में अक्सर शामिल होते रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को जारी अपने पत्र में लिखा था कि माकपा ने मुखर्जी को समर्थन देकर 'भयंकर भूल' की है।