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प्रणब की निष्पक्ष जांच हो, फिर बनें उम्मीदवार

गाजियाबाद/ब्यूरो Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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Arvind-Kejriwal-targets-Pranab-Mukherjee?
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रायसीना हिल्स की ओर बढ़ रहे वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का टीम अन्ना ने फिर विरोध किया है। टीम के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास ने चावल निर्यात, स्कार्पीन पनडुब्बी और नेवी वॉर रूम लीक मामले में प्रणब मुखर्जी की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग भी की। साथ ही राष्ट्रपति पद की गरिमा को बचाए रखने के लिए उन्होंने प्रणब को मैदान से हटने की भी सलाह दी है।
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सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल और विश्वास ने कहा कि वर्ष 2007 के अंत में चावल की कमी को देखते हुए बासमती को छोड़कर अन्य चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इससे चावल के रेट अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी बढ़ गए। इसके बाद गरीब देशों को नुकसान का हवाला देकर सस्ते दामों पर चावल निर्यात करने की इजाजत दी गई।
इंसानियत के नाम पर 10 लाख टन चावल निर्यात में घपला हुआ। घाना सरकार ने इस घोटाले का खुलासा किया था और भारत सरकार को पत्र लिखकर वाणिज्य और विदेश मंत्री की भूमिका की जांच का निवेदन किया था। उस समय प्रणब विदेश मंत्री थे। लेकिन किसी तरह की जांच नहीं कराई गई। इससे पहले रक्षा मंत्री के पद पर रहते हुए प्रणब ने 7 अक्तूबर, 2005 को स्कार्पीन पनडुब्बी का करार किया था। इसमें दलालों की भूमिका पाई गई। ठेका थेल्स कंपनी को दिलवाने के लिए चार फीसदी कमीशन का मामला सामने आया मगर प्रणब ने इस मामले में जांच से इनकार कर दिया था।
उन्होंने कहा कि 2005 में ही नेवी वार रूम से एक पेन ड्राइव गायब हो गई। यह पेन ड्राइव विंग कमांडर सुर्वे से पाई गई। यह अभिषेक वर्मा, रवि शंकरण और कुलभूषण पराशर को दिखाई गई थी। इन तीनों पर रक्षा सौदों के आरोप लगते रहे हैं। मगर इन तीनों आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई। प्रणब ने बयान दिया था कि सेना के तीनों अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत नहीं थी क्योंकि पेन ड्राइव में ऐसी कोई विशेष जानकारी नहीं थी।

काफी हंगामे के बाद सीबीआई ने जांच की और चार्जशीट में कहा कि जो जानकारी लीक हुई थी उससे देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था। इसके बाद भी प्रणब ने अभिषेक वर्मा और अन्य लोगों को बचाने की कोशिश की। उन्होंने मांग की कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच के बाद ही प्रणब को राष्ट्रपति बनना चाहिए।

टीम अन्ना के आरोप बेबुनियाद: प्रणब
राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी ने टीम अन्ना की ओर से उन पर लगाए गए आरोपों को दो टूक खारिज कर दिया है। प्रणब ने इन आरोपों को किसी खास मंशा से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्च नैतिक मानदंडों का दावा करने वाली टीम अन्ना ने खुद नैतिक मूल्यों को हवा में उड़ा दिया।

शीर्ष संवैधानिक संस्था न बने टीम अन्ना: भाजपा
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से पहले उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच की टीम अन्ना की मांग को लेकर भाजपा ने टीम पर निशाना साधा है। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि टीम अन्ना को शीर्ष संवैधानिक संस्था बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। किसी को भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए उनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है। टीम अन्ना के लिए ऐसे बयान देना उचित नहीं है।

हालांकि भाजपा के ही नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रणब मुखर्जी को सिविल सोसाइटी के आरोपों से पाक साफ होकर बाहर आना चाहिए। यह साफ होना चाहिए कि उन्हें उम्मीदवार बनाने में कोई राजनीतिक सौदेबाजी तो नहीं हुई है।
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