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मायाराज के बिजली समझौतों को मिली मंजूरी
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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मायावती शासन की आबकारी नीति पर मुहर लगा चुकी अखिलेश सरकार ने अब पिछली सरकार के एक और फैसले पर मुहर लगा दी है।
मायावती के शासन में प्रदेश में 10 हजार मेगावाट उत्पादन को बिजली घर लगाने के लिए निजी कंपनियों से समझौता हुआ था, पर कंपनियां समझौते में दी गई अवधि के भीतर काम शुरू नहीं कर पाईं। अब अखिलेश सरकार ने कंपनियों को काम शुरू करने के लिए 18 महीने की मोहलत और दे दी है।
औद्योगिक विकास आयुक्त एवं प्रमुख सचिव ऊर्जा अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में रविवार को यहां हुई एनर्जी टास्क फोर्स (ईटीएफ) की बैठक में 9 विद्युत परियोजनाओं के लिए विकासकर्ताओं (कंपनियों) को 18 महीने की मोहलत और देने की संस्तुति कर दी गई।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने किया विरोध
इसके अलावा हरदुआगंज परियोजना में 600 मेगावाट की एक और उत्पादन इकाई लगाने के फैसले के साथ ही कुछ अन्य योजनाओं पर भी विचार किया गया। उधर, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने मुख्यमंत्री अखिलेश से मांग की है कि पिछली सरकार द्वारा बिजली घर लगाने के लिए निजी कंपनियों से किए गए सभी एमओयू (मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैडिंग) निरस्त किए जाएं और किसी भी हालत में इन एमओयू की अवधि न बढ़ाई जाए।
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मायावती के शासन में प्रदेश में 10 हजार मेगावाट उत्पादन को बिजली घर लगाने के लिए निजी कंपनियों से समझौता हुआ था, पर कंपनियां समझौते में दी गई अवधि के भीतर काम शुरू नहीं कर पाईं। अब अखिलेश सरकार ने कंपनियों को काम शुरू करने के लिए 18 महीने की मोहलत और दे दी है।
औद्योगिक विकास आयुक्त एवं प्रमुख सचिव ऊर्जा अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में रविवार को यहां हुई एनर्जी टास्क फोर्स (ईटीएफ) की बैठक में 9 विद्युत परियोजनाओं के लिए विकासकर्ताओं (कंपनियों) को 18 महीने की मोहलत और देने की संस्तुति कर दी गई।
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ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने किया विरोध
इसके अलावा हरदुआगंज परियोजना में 600 मेगावाट की एक और उत्पादन इकाई लगाने के फैसले के साथ ही कुछ अन्य योजनाओं पर भी विचार किया गया। उधर, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने मुख्यमंत्री अखिलेश से मांग की है कि पिछली सरकार द्वारा बिजली घर लगाने के लिए निजी कंपनियों से किए गए सभी एमओयू (मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैडिंग) निरस्त किए जाएं और किसी भी हालत में इन एमओयू की अवधि न बढ़ाई जाए।
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