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बिल गेट्स का सपना है किफायती टॉयलेट
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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दुनिया को नए आईटी युग में पहुंचाने वाले माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स अब नया सपना देख रहे हैं। किफायती टॉयलेट का सपना। उन्होंने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से ऐसा टॉयलेट तैयार करने की अपील की है, जो इतनी कम कीमत में तैयार हो कि सबको सुलभ हो सके। यही नहीं, इस टॉयलेट में पानी का इस्तेमाल भी न करना पड़े और इसमें कतई बदबू न हो। उन्हें विश्वास है कि जल्द ही वैज्ञानिक ऐसा टॉयलेट तैयार करने में कामयाब होंगे।
गेट्स ने दुनिया के बेहतरीन वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए अगस्त में सिएटल (अमेरिका) बुलवाया है। भारत आए गेट्स ने यहां मीडिया से कहा कि यह टॉयलेट मेरा बहुत ही खास सपना है। लेकिन आखिरी कतई नहीं।
गेट्स ने बताया कि हम दुनिया भर के लोगों को कम से कम कीमत में तैयार होने वाला टॉयलेट विकसित करने को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस दिशा में धन भी खर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा टॉयलेट संभव है, जिसमें पानी की जरूरत न पड़े और जो साफ-सफाई के मामले में फ्लश टॉयलेट से भी बढ़िया हो।
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गेट्स को आशा है कि वैज्ञानिक और इंजीनियर जल्दी ही इस दिशा में कामयाब होंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो? वह कहते हैं कि हम हार नहीं मानेंगे। युवा और नए वैज्ञानिकों को इस दिशा में काम करने के लिए धन देंगे।
उल्लेखनीय है कि भारत जैसे विकासशील देशों में किफायती टॉयलेट की सख्त जरूरत है। भारत में मात्र 46.9 प्रतिशत घरों में टॉयलेट हैं। जबकि 3.2 लोग सार्वजनिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं 49.8 प्रतिशत जनसंख्या आज भी खुले में शौच निवृत्त होती है।
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गेट्स ने दुनिया के बेहतरीन वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए अगस्त में सिएटल (अमेरिका) बुलवाया है। भारत आए गेट्स ने यहां मीडिया से कहा कि यह टॉयलेट मेरा बहुत ही खास सपना है। लेकिन आखिरी कतई नहीं।
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गेट्स ने बताया कि हम दुनिया भर के लोगों को कम से कम कीमत में तैयार होने वाला टॉयलेट विकसित करने को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस दिशा में धन भी खर्च कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा टॉयलेट संभव है, जिसमें पानी की जरूरत न पड़े और जो साफ-सफाई के मामले में फ्लश टॉयलेट से भी बढ़िया हो।
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गेट्स को आशा है कि वैज्ञानिक और इंजीनियर जल्दी ही इस दिशा में कामयाब होंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो? वह कहते हैं कि हम हार नहीं मानेंगे। युवा और नए वैज्ञानिकों को इस दिशा में काम करने के लिए धन देंगे।
उल्लेखनीय है कि भारत जैसे विकासशील देशों में किफायती टॉयलेट की सख्त जरूरत है। भारत में मात्र 46.9 प्रतिशत घरों में टॉयलेट हैं। जबकि 3.2 लोग सार्वजनिक टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं 49.8 प्रतिशत जनसंख्या आज भी खुले में शौच निवृत्त होती है।