{"_id":"27520","slug":"national-27520","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनडी तिवारी ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
एनडी तिवारी ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वरिष्ठ कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी ने पितृत्व विवाद मामले में डीएनए टेस्ट करवाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल को टेस्ट करवाने का निर्देश जारी करते हुए यह भी कहा था यदि तिवारी अदालत के आदेश का पालन करने में कोताही बरतते है तो उनका ब्लड लेने के लिए पुलिस बल का प्रयोग किया जा सकता है। दूसरी ओर, तिवारी की दलील है कि उनके साथ इस मामले में जबरदस्ती नहीं की जा सकती। ऐसा किया जाना शीर्षस्थ अदालत के कई फैसलों और संविधान में प्रदत्त अधिकारों का हनन है।
शीर्षस्थ अदालत में तिवारी की ओर से विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। याद रहे कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एनडी के पुत्र होने का दावा करने वाले रोहित शेखर की याचिका स्वीकार करते हुए अप्रैल में तिवारी को बड़ा झटका दिया था। तिवारी इस मामले में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ पहले भी शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं जिस पर अदालत ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया था।
विज्ञापन
एकल पीठ ने पितृत्व विवाद में तिवारी को डीएनए परीक्षण के लिए खून का नमूना देने की छूट प्रदान की थी जबकि डबल बेंच ने एकल पीठ के सितंबर, 2011 के फैसले को खारिज करते हुए साफ किया था कि ऐसे आदेश का फायदा ही क्या जिसे अदालत पालन न करवा सके।
तिवारी का कहना है कि शीर्षस्थ अदालत के तमाम फैसलों में यह कहा गया है कि किसी भी व्यक्तिको मेडिकल जांच के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह संविधान के तहत मिलने उनके अधिकारों का भी उल्लंघन है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल को टेस्ट करवाने का निर्देश जारी करते हुए यह भी कहा था यदि तिवारी अदालत के आदेश का पालन करने में कोताही बरतते है तो उनका ब्लड लेने के लिए पुलिस बल का प्रयोग किया जा सकता है। दूसरी ओर, तिवारी की दलील है कि उनके साथ इस मामले में जबरदस्ती नहीं की जा सकती। ऐसा किया जाना शीर्षस्थ अदालत के कई फैसलों और संविधान में प्रदत्त अधिकारों का हनन है।
विज्ञापन
शीर्षस्थ अदालत में तिवारी की ओर से विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। याद रहे कि हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एनडी के पुत्र होने का दावा करने वाले रोहित शेखर की याचिका स्वीकार करते हुए अप्रैल में तिवारी को बड़ा झटका दिया था। तिवारी इस मामले में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ पहले भी शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं जिस पर अदालत ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया था।
विज्ञापन
एकल पीठ ने पितृत्व विवाद में तिवारी को डीएनए परीक्षण के लिए खून का नमूना देने की छूट प्रदान की थी जबकि डबल बेंच ने एकल पीठ के सितंबर, 2011 के फैसले को खारिज करते हुए साफ किया था कि ऐसे आदेश का फायदा ही क्या जिसे अदालत पालन न करवा सके।
तिवारी का कहना है कि शीर्षस्थ अदालत के तमाम फैसलों में यह कहा गया है कि किसी भी व्यक्तिको मेडिकल जांच के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह संविधान के तहत मिलने उनके अधिकारों का भी उल्लंघन है।