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काला धन वापस लाने के लिए ये है पीएम मोदी का प्लान

Sun, 16 Nov 2014 02:20 PM IST
एजेंसी/ब्रिस्बेन
एजेंसी/ब्रिस्बेन Updated Sun, 16 Nov 2014 02:20 PM IST
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narendra modi will raise black money issue boldly in g20.

विदेश में जमा काले धन को वापस लाने में दुनिया के देशों के ‘असहयोग’ के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 के मंच पर इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की तैयारी कर ली है। जी-20 बैठक में शामिल होने से पहले ब्रिक्स देशों के प्रमुखों के साथ एक अनौपचारिक मुलाकात में उन्होंने शनिवार को कहा कि दुनिया के प्रमुख औद्योगिक और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश काले धन के मसले पर साथ आएं। साथ ही उन्होंने गुपचुप तरीके से आर्थिक सुधारों को लागू करने की जगह इस प्रक्रिया को जनता से जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुधारों का विरोध होना तय है पर हमें इसे राजनीति से दूर रखना चाहिए।

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ब्रिक्स देशों के प्रमुखों- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा और ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रॉसेफ के साथ मुलाकात में प्रधानमंत्री ने कहा कि काले धन को स्वदेश लाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है और इस लक्ष्य को हासिल करने में वह दुनिया के देशों के साथ करीबी सहयोग चाहते हैं।
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उन्होंने इस मसले पर भारत के रुख को गंभीरता से नहीं लेने वाले देशों को आगाह करते हुए कहा कि काला धन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि काले धन के मसले पर दुनिया के देशों के साथ करीबी सहयोग उनके लिए एक अहम मुद्दा है। घरेलू मोर्चे पर काले धन को लेकर विपक्ष के निशाने पर आए मोदी ने इन नेताओं के समक्ष यह स्पष्ट किया कि उनके लिए काले धन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को उठाना क्यों बेहद अहम है।
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आखिर क्या है मोदी का मकसद?

narendra modi will raise black money issue boldly in g20.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और ऑस्ट्रेलिया टोनी एबॉट सहित दुनिया के कई अन्य शासनाध्यक्षों से मुलाकात में मोदी ने आर्थिक सुधारों के बारे में अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि यह निश्चित रूप से जनहित में और जनता द्वारा संचालित होना चाहिए। ऐसा नहीं होने के कारण इसे सरकारी कार्यक्रम समझ लिया गया है और जनता इसे अपने ऊपर बोझ समझने लगी है, जिसे तुरंत बदलने की जरूरत है।

दुनिया के नेताओं से मोदी की मुलाकात के संदर्भ में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब काले धन को सुरक्षा के पहलू से जोड़ा गया है। जी-20 सम्मेलन की मेजबानी कर रहे ऑस्ट्रेलिया ने शुक्रवार को कर चोरी के खिलाफ कड़े कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई थी। भारत चाहता है कि दुनिया के औद्योगिक और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का संगठन जी-20 भी काले धन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि काले धन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मुद्दे को वे जोर-शोर से उठाएंगे। इसी के साथ वह जी-20 सम्मेलन में कर चोरी के मामलों से निपटने में भारत के सहयोग की प्रतिबद्धता भी दोहराएंगे।

क्या है मोदी का मकसद

घरेलू राजनीति में काले धन के मसले पर घिरी मोदी सरकार की कोशिश काले धन के सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाले देशों पर जी-20 के जरिए दबाव डलवाना है, जिससे कि भारत को काले धन के मसले पर ज्यादा से ज्यादा उपयोगी सूचनाएं मिल सके। कई देशों के साथ दोहरे कराधान संबंधी संधि के बावजूद भारत कर की चोरी करने वालों और विदेश में अवैध धन रखने वाले अपने नागरिकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में अभी सक्षम नहीं है।

नाराज पुतिन बीच में ही छोड़ेंगे जी-20 सम्मेलन
यूक्रेन और ऑस्ट्रेलियाई समुद्र में रूसी युद्धक पोतों को लेकर अपनी आलोचनाओं से नाराज रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जी-20 सम्मेलन बीच में ही छोड़कर जा सकते हैं। इन मुद्दों को लेकर पुतिन लगातार पश्चिमी देशों के नेताओं के निशाने पर हैं। पुतिन के एक सहयोगी ने ऐसे संकेत दिए हैं कि पुतिन के कार्यक्रम में कटौती की जा रही है। पुतिन रविवार को सम्मेलन के सत्र में हिस्सा लेंगे, मगर दोपहर को होने वाले भोज में शामिल नहीं होंगे और न ही पत्रकारों से बात करेंगे।

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