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अपने ही कुनबे में इन 5 से है मोदी की टक्कर

Sat, 02 Mar 2013 01:56 PM IST
कार्तिकेय तिवारी/नई दिल्ली
कार्तिकेय तिवारी/नई दिल्ली Updated Sat, 02 Mar 2013 01:56 PM IST
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narendra modi will have to fight against these five within bjp

‘सुशासन संकल्प, भाजपा विकल्प’ के नारे के साथ भाजपा लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने में जुटी हुई है। भाजपा में कई नेता गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर घोषित करने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं। लेकिन भाजपा के अंदर ही मोदी को पांच लोगों से चुनौती मिल रही है। या यह कहें कि इन पांच नेताओं की दावेदारी से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मोदी की घोषणा पर प्रश्न चिह्न लगा हुआ है।

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पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी
मोदी की तुलना में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक कद काफी बड़ा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की बात रही हो या फिर राम मंदिर आंदोलन के लिए रथ यात्रा, आडवाणी ने भाजपा की कमान मजबूती से अपने हाथों में पकड़े रखी। उस दौरान देश के एक वर्ग विशेष के बीच वह जन नेता के तौर पर उभरे। राजग सरकार में उन्होंने एक दृढ़ गृहमंत्री की छवि पेश की।
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अटल बिहारी वाजपेयी के बाद 2008 के लोक सभा चुनाव में उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को देखते हुए आडवाणी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रस्तुत किया गया। लेकिन चुनावों में हार के बाद आडवाणी पीएम इन वेटिंग ही रहे। पार्टी में उनके समर्थक और राजग के सहयोगी भी आडवाणी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रस्तुत करना चाहते हैं लेकिन उनके विरोधियों का मानना है कि आज के युवाओं के बीच आडवाणी की चमक फीकी पड़ गई है। युवा देश के सामने कोई युवा ही प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार प्रस्तुत करना चाहिए।
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सुषमा स्वराज
भाजपा में जब किसी महिला नेता का जिक्र होता है तो पहला नाम सुषमा स्वराज का आता है। लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वाराज मोदी के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। भाषण कला में निपुण सुषमा स्वराज पार्टी में महिला नेताओं की एक प्रतिबिंब हैं। सोनिया गांधी को चुनावी मैदान में घेरना हो या फिर यूपीए सरकार को संसद में, सुषमा स्वराज पार्टी का बखूबी प्रतिनिधित्व करती हैं। सोनिया गांधी जब पहली बार बेल्लारी लोकसभा से चुनाव लड़ी तो उनके खिलाफ सुषमा पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरीं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर अपने प्रशासनिक कौशल को भी वह पहले दिखा चुकी हैं। साथ ही पार्टी में जो जिम्मेदारी उन्हें दी गई उसे उन्होंने बखूबी निभाया। शिवसेना के साथ-साथ पार्टी के कुछ नेता उनको महिला प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रस्तुत करने की वकालत करते हैं। लेकिन पाक-साफ छवि वाली सुषमा को उनके विरोधी एक जन नेता के तौर पर स्वीकार नहीं करते।

राजनाथ सिंह

देश के सबसे बड़े राज्य यूपी की कमान संभालने वाले राजनाथ सिंह दूसरी बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं। कल्याण सिंह के पार्टी से विदाई के बाद राजनाथ सिंह तेजी से उत्तर प्रदेश की राजनीति में उभरे। जब भाजपा में अंतर्कलह चरम पर थी उस दौरान पहली बार दिसंबर 2005 में उनको पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। जब पूर्व अध्यक्ष नीतिन गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो फिर पार्टी के पास एक मात्र सर्वमान्य व्यक्ति के रुप में राजनाथ ही थे।

माना जाता है कि राजनाथ सिंह कुनबे के घमासान को खत्म करने की काबिलियत रखते हैं। उनके साथ बैक डोर इंट्री का भी सवाल नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षियों के प्रेशर गेम को भी वह हैंडल करना जानते हैं। पार्टी नेताओं के साथ-साथ संघ भी उनका मुरिद है।


अरुण जेटली
राज्य सभा में नेता विपक्ष अरुण जेटली पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। कानून की बारिकियों को समझने वाले जेटली को पार्टी की अंदरूनी मसलों को निपटाने का जिम्मा मिलता है। उन्हें पार्टी के अंदर और बाहर (आरएसएस) भी समर्थन प्राप्त है। अब तक उनका राजनीतिक जीवन पाक-साफ रहा है। लेकिन उन्हें जनता का समर्थन प्राप्त नहीं है। मतलब उनके विरोध बैक डोर इंट्री (राज्य सभा) वाले नेता के तौर पर उनको प्रस्तुत करते हैं।


shivraj singh chauhan












शिवराज सिंह चौहान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार दो बार से मध्य प्रदेश की कमान संभाले हुए। 1990 में पहली बार बुधनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने वाले शिवराज के कामकाज को केंद्र सरकार ने भी सराहा है। दो बार से पार्टी को सत्ता में लाकर शिवराज ने 'जन स्वीकार्य नेता' के तौर पर अपनी छवि प्रस्तुत करने की कोशिश की है। माना जाता है कि शिवराज को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संघ का वरदहस्त भी प्राप्त है। लेकिन वह एक राज्य तक ही सीमित हैं। उनकी छवि एक राष्ट्रीय नेता के रुप में अभी स्वीकार्य नहीं है। लेकिन मोदी के दामन पर जहां गुजरात दंगों के दाग हैं वहीं भाजपा के इस नेता का दामन पाक साफ है। हालांकि वे मोदी की तरह फायर ब्रांड नेता नहीं हैं।

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