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मोदी ने दिया संदेश, केवल हिंदुओं का ही नेता नहीं हूं
हरिद्वार/शेषमणि शुक्ल
Updated Fri, 26 Apr 2013 09:52 PM IST
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अब अपनी हार्डकोर हिंदू छवि से बाहर निकलने को छटपटा रहे हैं। उनकी यह छटपटाहट शुक्रवार को हरिद्वार में पंतजलि योग पीठ के कार्यक्रम में दिखी।
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संतों के मंच पर मोदी ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वे केवल हिंदुओं के ही नेता नहीं हैं। सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया संस्कार में पले-बढ़े हैं और उसी का पालन करते हैं।
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मोदी की यह कोशिश दरअसल बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार द्वारा उनका विरोध किए जाने के बाद बढ़ी है। मोदी यह मानने लगे हैं कि गुजरात दंगे के बाद बनी उनकी कट्टर हिंदू की छवि प्रधानमंत्री बनने में रोड़ा है।
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अभी जदयू उनका विरोध कर रहा है, आगे अन्य सहयोगी भी इसी तरह आगे आए तो मोदी की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। इसलिए मोदी अपनी छवि तोड़ने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। वे लगभग हर उस फोरम पर अपनी बात रखने पहुंच रहे हैं, जहां से उन्हें लगता है कि उनकी कट्टर हिंदू की छवि टूटेगी और नए नरेंद्र मोदी के तौर पर वे स्थापित होंगे।
हरिद्वार में चालीस मिनट के अपने भाषण में मोदी ने महर्षि अरविंद, विवेकानंद और दक्षिण के ख्यातिलब्ध दलित प्रणेता संत नारायण गुरू का जिक्र कई बार किया। अपनी धर्मनिरपेक्षता सिद्ध करने को मोदी ने संतों से भरे मंच पर यह कहने में भी गुरेज नहीं किया कि उन्होंने कभी भी हिंदू भवंति सुखिन: नहीं कहा।
यानी वे सिर्फ हिंदुओं के ही नेता नहीं हैं, बल्कि सभी जाति, धर्म और संप्रदाय को समान भाव से देखते और मानते हैं। इसकी पुष्टि उन्होंने इस बात से करने की कोशिश की कि पिछले 12 वर्षों में गुजरात में कोई दंगा नहीं हुआ।
मोदी ने कहा कि लोग उनके इरादों पर शक करते हैं। जबकि 2002 में चुनाव जीतने के बाद ही उन्होंने कहा था कि जिसने वोट दिया, वह भी उनका, जिसने नहीं दिया और जिसने विरोध किया, वह भी उनका है। यह भाषण यू ट्यूब पर भी उपलब्ध है। उनके भीतर किसी के प्रति राग-द्वेष नहीं है।
मोदी ने बिना नाम लिए नितीश कुमार पर हमला करते हुए कहा कि उनके बारे में लोग जाने क्या-क्या कहते हैं और कह रहे हैं। दुर्भाग्य है कि कोई सामर्थ्य की चर्चा नहीं करता। संकेतों में मोदी ने यह जताने की कोशिश की कि पीएम बनने का उनमें पूरा सामर्थ्य है।
लेकिन उन्हें संतों को भी खुद से अलग नहीं होने देना चाहते, इसलिए यह कहते हैं कि इस देश को किसी राजनेता और सरकार ने नहीं, बल्कि ऋषि-मुनियों और संत-महात्माओं ने बनाया है। दरअसल, संत इस समय मोदी की जरूरत हैं।