दादरी और गुलाम अली जैसी घटनाएं दुखद: मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि दादरी की घटना या पाकिस्तानी गायक गुलाम अली के विरोध की घटना गलत है, लेकिन इसमें केंद्र सरकार की क्या भूमिका है? केंद्र ऐसे मामलों में क्या करे?
आनंद बाजार पत्रिका को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों हुई सांप्रदायिक घटनाओं और देश में बढ़ रहे सांप्रदायिक माहौल पर खुलकर बात की। उल्लेखनीय है कि विपक्ष समेत देश के कई साहित्यकार प्रधानमंत्री से लगातार इन मुद्दों पर टिप्पणी की मांग कर रहे थे।
प्रधानमंत्री की चुप्पी के विरोध में कई साहित्यकारों ने अपने पुरस्कार भी लौटा दिए। पिछले दिनों बिहार के नवादा में एक चुनावी सभा में भी प्रधानमंत्री ने हिंदू और मुस्लिमों को आपस में लड़ने के बजाय गरीबी से लड़ने का संदेश दिया था।
पीएम ने विपक्ष को भी लिया आड़े हाथों
प्रधानमंत्री ने साक्षात्कार में सुधींद्र कुलकर्णी पर कालिख पोतने की घटना की भी चर्चा की। उल्लेखनीय है कि मुंबई में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी की किताब के विमोचन समारोह का आयोजन करने के कारण सोमवार को शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने भाजपा के पितृपुरुष लालकृष्ण आडवाणी के करीबी सुधींद्र कुलकर्णी के मुंह पर कालिख पोत दी थी।
मोदी ने आनंद बाजार पत्रिका से कहा कि ऐसे विवाद देश में पहले भी हुए हैं। भाजपा ने छद्म धर्मनिरपेक्षता का हमेशा विरोध किया है। भाजपा ऐसी घटनाओं का समर्थन नहीं करती। इन मु्द्दों का समाधान बातचीत से भी संभव है।
साक्षात्कार में मोदी ने मौजूदा मामलों पर विपक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के जरिए विपक्ष भाजपा पर सांप्रदायिकता का आरोप लगा रहा है लेकिन क्या विपक्ष खुद ध्रुवीकरण की राजनीति नहीं कर रहा है?'