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मोदी के बहाने शिवसेना का भाजपा को कड़ा संदेश

Wed, 26 Jun 2013 12:37 AM IST
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री Updated Wed, 26 Jun 2013 12:37 AM IST
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narendra modi stance in uttarakhand rescue detrimental says uddhav thackeray

शिवसेना ने एक बार फिर भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान के प्रमुख गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अपने तेवर कड़े कर लिए हैं।

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पहले शिवसेना प्रमुख उद्दव ठाकरे ने सवाल किया था कि जद(यू) के एनडीए से बाहर जाने के बाद एनडीए में नए सहयोगी दलों को जोडऩे की भाजपा की योजना क्या है।

अब शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में लिखे संपादकीय में नरेंद्र मोदी की उत्तराखंड यात्रा को निशाना बनाते हुए कहा गया है कि किसी भी आपदा में मदद देना धर्म है मेहरबानी नहीं और इसमें दलगत या क्षेत्रीय भावना की कोई जगह नहीं है।

शिवसेना के यह कड़े तेवर दरअसल भाजपा नेतृत्व को एक संदेश हैं कि उसे हल्के में न लिया जाए।

शिवसेना सूत्रों के मुताबिक भाजपा में पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और कुछ दूसरे बड़े नेता जिस तरह से मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ बातचीत करके यह संकेत दे रहे हैं कि भाजपा महाराष्ट्र में मनसे के साथ भी गठबंधन कर सकती है, उससे शिवसेना नेतृत्व खासा असहज है।
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विशेषकर उद्धव ठाकरे को लगता है कि शिवसेना भाजपा गठबंधन के मुख्य शिल्पकार प्रमोद महाजन की मृत्यु के बाद शिवसेना की उपेक्षा भाजपा में शुरु हो गई और नितिन गडकरी के कार्यकाल में भाजपा ने राज ठाकरे के साथ सियासी पींगे बढ़ाने की तैयारी भी शुरु कर दी।
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अब भाजपा के शिखर पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी जिस तरह से पार्टी में हाशिए पर चले गए हैं, उससे भी ठाकरे को लगता है कि भाजपा में शिवसेना की उपेक्षा और बढ़ सकती है।

क्योंकि भाजपा के कई नेता मानते हैं कि शिवसेना के सामने एनडीए में बने रहने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

इसलिए अगर राज ठाकरे को भी एनडीए में शामिल कर लिया जाए तो न सिर्फ एनडीए की ताकत महाराष्ट्र में बढ़ेगी बल्कि शिवसेना भी दबाव में रहेगी। ठाकरे इसे मंजूर करने को तैयार नहीं हैं।

भाजपा शिवसेना गठबंधन की एक मजबूत कड़ी आडवाणी और शिवसेना संस्थापक अध्यक्ष बाल ठाकरे की निजी दोस्ती भी रही है। ठाकरे की मृत्यु के बाद यह कड़ी भी कमजोर पड़ी है।

कुछ दिनों पहले भाजपा में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर चली बहस में शिवसेना प्रमुख ने यह कहकर सुषमा स्वराज का नाम आगे बढ़ाया था कि बाला साहब ठाकरे ऐसा चाहते थे।

शिवसेना प्रमुख के इस बयान ने भाजपा में प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार नरेंद्र मोदी खेमे को असहज कर दिया था।

सूत्रों के मुताबिक राज ठाकरे के साथ संवाद की एक खिड़की खोले जाने के पीछे मोदी की भी सहमति है। जिस तरह एनडीए का हिस्सा न होते हुए भी तीसरी बार मोदी के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण समारोह में राज ठाकरे को आमंत्रित किया गया, उससे भी शिवसेना नेता आशंकित हैं।

हालाकि हाल ही में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की मुंबई यात्रा में उद्धव ठाकरे ने यह कहा था कि नरेंद्र मोदी के नाम पर शिवसेना को कोई एतराज नहीं है, क्योंकि इससे हिंदुत्व मजबूत होगा।


राजनाथ ने उद्धव को एनडीए संयोजक बनने का भी प्रस्ताव किया, जिस पर शिवसेना प्रमुख ने कोई फैसला नहीं लिया।

लेकिन जिस तरह पिछले दो दिनों में शिवसेना ने मोदी पर अपने तेवर कड़े किए हैं, उससे साफ संकेत है कि जद(यू) की एनडीए से विदाई के बाद शिवसेना भाजपा पर अपना दबाव बढ़ाकर एनडीए में अपनी अहमियत बढ़ा रही है और भाजपा नेतृत्व को संकेत दे रही है कि राज ठाकरे से सियासी पींगें न बढ़ाएं।

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