फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Narendra Modi should ask sorry for 2002 Gujrat riot

काश नरेंद्र मोदी ने 2002 के लिए मांगी होती माफी!

Mon, 14 Sep 2015 04:02 PM IST
Updated Mon, 14 Sep 2015 04:02 PM IST
विज्ञापन
Narendra Modi should ask sorry for 2002 Gujrat riot

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में चंडीगढ़ गए थे। उनके इस दौरे की वजह से स्कूल बंद किए गए, परीक्षाओं की तारीख़ बदली गई और एक शमशान की जगह पार्किंग में तब्दील कर दी गई।

विज्ञापन


इन वजहों से लोगों को काफी असुविधा हुई जिसके लिए मोदी ने माफी मांगी और जांच के आदेश दिए। कोई भारतीय नेता माफी मांगे तो हैरानी होती है और वह प्रधानमंत्री हो तो हैरानी और भी बढ़ जाती है। भारत में ऐसे मौके बहुत कम आए हैं जब किसी नेता ने माफी मांगी हो।
विज्ञापन


कोई नेता माफी मांगे, भारत के लोगों के लिए नई बात है। माफी मांगने की कला भारतीय नेता नहीं जानते हैं। उन्हें लगता है कि माफी मांगना उनके लिए भारी पड़ेगा और इसे हमेशा अपराधबोध की तरह लिया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

गुजरात दंगे और मोदी

Narendra Modi should ask sorry for 2002 Gujrat riot

लोग हमेशा यह कहते रहे हैं कि नरेंद्र मोदी को वर्ष 2002 की घटना के लिए माफी मांगनी चाहिए जो गुजरात में उनके शासनकाल में हुआ था। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि तब गुजरात में 1,200 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

भारत जैसे देश में कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है कि दुर्घटना के लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार नहीं होने के बावजूद रेलमंत्री इस्तीफा दे देते हैं। ऐसे देश में किसी नेता से उसके शासनकाल के दौरान हुए दंगों में लोगों की मौत के लिए माफी की मांग करना क्या कुछ ज्यादा है? वैसे दंगा रोकना रेल दुर्घटना रोकने से अधिक आसान है। लेकिन यदि दंगाइयों को पता हो कि पुलिस उनके साथ है तो हत्या, लूटपाट और आगजनी उनके लिए आसान हो जाती है।

ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें गुजरात दंगों के दौरान पुलिस की भूमिका पर कई सवाल खड़े होते हैं। यहां तक कि ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी रिपोर्ट का शीर्षक दिया था, ''वी हैव नो ऑर्डर्स टू सेव यू'' यानी 'आपको बचाने के लिए हमारे पास कोई आदेश नहीं है।'

बात नैतिक जिम्मेदारी की

Narendra Modi should ask sorry for 2002 Gujrat riot

नरेंद्र मोदी इन आरोपों से हमेशा इनकार करते रहे हैं। वह कहते रहे हैं कि ख़ासतौर पर दिल्ली की मीडिया ने तय कर लिया था कि उन्हें दोषी ठहराना है। लेकिन नरेंद्र मोदी गुजरात दंगों के दोषी नहीं भी थे तब भी वह इसकी नैतिक जिम्मेदारी तो ले ही सकते थे।
ऐसा करके मोदी शांति का संकेत दे सकते थे। लेकिन तब उन्होंने ऐसा नहीं किया और चुनाव प्रचार सांप्रदायिक रंग में रंगा गया।

जो लोग मोदी की राजनीतिक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) वाली विचारधारा से सहमत नहीं हैं, उन्होंने भी कहा कि असुविधा के लिए चंडीगढ़ के लोगों से माफी मांगकर मोदी ने अच्छा किया। इस तरह की माफी मन को छूती है क्योंकि इससे पता चलता है कि एक नेता ठीकरा फोड़ने के लिए हमेशा किसी दूसरे का सिर तलाश नहीं करता। वह आम आदमी के प्रति सहानुभूति भी दिखाना चाहता है।

वर्ष 2015 के नरेंद्र मोदी वर्ष 2002 के नरेंद्र मोदी से अलग हैं। लेकिन इस तरह के नेता हमारे राजनीतिक तंत्र की उपज हैं। यही वजह है कि नरेंद्र मोदी को नहीं लगता कि उन्हें ललित मोदी मामले में माफी मांगने की जरूरत है, भले ही ललित मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बीच कोई सीधा संबंध नहीं रहा हो।

1984 के दंगे और मनमोहन की माफी

Narendra Modi should ask sorry for 2002 Gujrat riot
वह क्षण दिल को सुकून देने वाला था जब मनमोहन सिंह ने वर्ष 1984 के सिख-विरोधी दंगों के लिए माफी मांगी थी। संसद में 12 अगस्त 2005 को माफी मांगते हुए मनमोहन सिंह ने कहा था, 'मुझे सिख समुदाय से माफी मांगने में कोई संकोच नहीं है। मैं सिर्फ सिख समुदाय से नहीं बल्कि पूरे भारत से माफी मांगता हूं क्योंकि 1984 में जो हुआ था, वो हमारे संविधान का उल्लंघन था।'

अमरीका के एक राजनयिक ने मनमोहन सिंह की इस माफी पर कहा था, 'प्रधानमंत्री का राजनीतिक साहस भरा यह एकमात्र काम वर्ष 1984 में सिखों के विरुद्ध भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की नफरत और अवसरवाद के विपरीत है। उनके मुताबिक, 'प्रधानमंत्री का राजनेता वाला यह काम उनकी पहले से मजबूत छवि को राष्ट्र की गांधीवादी विचारधारा के प्रतिनिधि के तौर पर और ऊंचा उठाएगा।'

वैसे भारतीय राजनीति के लिए यह कहीं अधिक महान क्षण होता यदि सोनिया गांधी 1984 के दंगों के लिए माफी मांगतीं। जब पत्रकार अर्णब गोस्वामी ने 1984 के दंगों पर राहुल गांधी को घेरा था तब राहुल गांधी माफी मांगकर बात खत्म कर सकते थे।
जर्जर और विभाजित समाज के लिए इस तरह की माफी बड़े मायने रखती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का माफी मांगना, उनके 'सबका साथ, सबका विकास' के सपने को साकार करने का जरिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed