फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   narendra modi's interview to pti

...तो यह जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ होता

Fri, 29 May 2015 07:57 AM IST
Updated Fri, 29 May 2015 07:57 AM IST
विज्ञापन
narendra modi's interview to pti

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल के अपने कार्यकाल के बारे में कहा है कि उन्होंने इस दौरान सरकारी मशीनरी को ठीक करने के लिए सहज और लोकलुभावन तरीके अपनाने के बजाय कठिन रास्तों को चुना।

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि सत्ता संभालने के बाद उनके पास दो विकल्प थे। एक विकल्प व्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर करने के लिए चीजों को व्यवस्थित तरीके से सुधारने का था, जबकि दूसरा विकल्प लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा कर चर्चा में बने रहना था। उन्होंने कहा कि पहले विकल्प पर चलने से दीर्घ अवधि में देश को फायदा होगा, वहीं दूसरे विकल्प पर चलना जनता को मूर्ख बनाना है। दूसरा विकल्प आसान है और जनता भी इससे अवगत है।
विज्ञापन


एक साल के कार्यकाल पर पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरे विकल्प के बजाय पहले को चुना। उन्होंने कहा कि अगर वह लोकलुभावन तरीके को अपनाते तो यह जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ होता। सरकार के कामकाज में बदलाव के लिए उठाए गए तरीकों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को यह याद दिलाने की कोशिश की है कि वे जनता के सेवक हैं। इसके साथ ही सरकार ने केंद्र सरकार के दफ्तरों में अनुशासन कायम किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

'एक छोटी सी चीज की'

narendra modi's interview to pti

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने एक छोटी सी चीज की है। वह अधिकारियों से चाय पर चर्चा करते हैं। यह उनके काम करने के तरीका का हिस्सा है। यह सरकार के बाहर के लोगों को बहुत छोटी चीज लगती है, लेकिन इससे अधिकारियों का मनोबल बढ़ता है।

उन्होंने आगे कहा कि उनका मानना है कि देश तभी विकास करेगा जब वे एक टीम के रूप में काम करें। उन्होंने कहा कि पीएम और सीएम एक टीम है। कैबिनेट और राज्य मंत्री एक दूसरी टीम है। केंद्र और राज्यों के अधिकारी अन्य दूसरी टीम है।

उन्होंने कहा कि देश के विकास का यही एक मात्र तरीका है। इसके लिए उनकी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इस दिशा में योजना आयोग को खत्म कर उसकी जगह नीति आयोग का गठन अहम कदम है। नीति आयोग में राज्य पूर्ण साझेदार हैं।

प्रधानमंत्री ने देश के विकास के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण कानून और जीएसटी विधेयक को जरूरी बताते हुए कहा कि भारत को आज निवेश के लिए पसंदीदा जगह बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति हुई है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। जहां तक रोजगार सृजन का सवाल है तो हमारे पास स्थानीय स्तर पर काफी क्षमता है और इस दिशा में सरकार काम कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed