मोदी के तेवर तीखे, राज ठाकरे को दिया दो टूक जवाब
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प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के पुराने तेवर एक बार फिर दिखने लगे हैं। चुनावी रण में विरोधी दलों पर वे ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। महाराष्ट्र में मंगलवार को आयोजित चुनावी रैली में उन्होंने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे पर परोक्ष हमला किया।
मोदी ने कहा कि मुंबई के बिना महाराष्ट्र नहीं हो सकता और महाराष्ट्र के बिना भारत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ये झूठ फैलाया जा रहा है कि महाराष्ट्र के टुकड़े होने वाले हैं। मैं जब तक दिल्ली में बैठा हूं, छत्रपति शिवाजी के महाराष्ट्र को कोई बांट नहीं सकता।
उल्लेखनीय है मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा था कि भाजपा मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहती है। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रधामंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अपने 60 सालों का हिसाब दिया कि वे मुझसे 60 दिनों का हिसाब मांग रही हैं।
कांग्रेस को भी नहीं बख्शा
सिंधखेड़ में आयोजित रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताओं की आदत होती है कि वे चुनावी रैलियों में वादे करते हैं और भूल जाते हैं। लेकिन मैं नेता नहीं हूं, मैं सेवक हूं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यही वजह है कि मैं वापस आया हूं, ताकि मै आपको एक बार फिर अपने वादे याद दिला सकूं। मैं अपने कामों का पूरा ब्योरा दूंगा। मोदी ने कहा कि हम कभी चुनावी जीतने के लिए वादे नहीं करते। हम आदिवासियों और ग्रामीणों का जीवन बदलने के लिए वादे करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने झूठे वादे किए हैं। क्या कांग्रेस ने कभी भी अपने 60 सालों के काम का हिसाब दिया है। वे मुझसे मेरे 60 दिनों का हिसाब मांग रहे हैं।
मोदी ने कहा कि चुनाव की गर्मी का असर ऐसा हो रहा है कि जो हारने के कगार पर हैं वे झूठ बोलने लगे हैं। मोदी ने कहा कि महाराष्ट्र में पानी में भ्रष्टाचार किया गया। आपको सिंचाई को पानी मिलना चाहिए था। लेकिन आपको पानी नहीं मिला और उनके बैंक खाते भर गए।
शिवसेना का तीखा जवाब रुख
वहीं, सोमवार को बाला साहेब ठाकरे के सम्मान की खातिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिव सेना पर हमला न करने के ऐलान को शिव सेना ने खारिज कर दिया। अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना ने लिखा है कि तब बाला साहेब का सम्मान कहां गया था जब सीटों के बंटवारे को लेकर गठबंधन टूट गया।
शिवसेना और भाजपा के बीच 25 साल पुराना गठबंधन इसलिए टूट चुका है क्योंकि सीटों की संख्या पर सहमति नहीं बन पाई। अब तक कम सीटों पर चुनाव लड़ती रही भाजपा इस बार लोकसभा चुनाव में मिली भारी जीत से उत्साहित है और शिवसेना से ज्यादा सीटों की मांग कर रही थी।
शिवसेना अपनी सीटों को कम करने पर राजी नहीं हुई और गठबंधन टूट गया।