ये हैं मोदी मंत्रिमंडल के संभावित चेहरे
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भाजपा अध्यक्ष के तौर पर भाजपा को बड़ी जीत दिलाने वाले राजनाथ सिंह भाजपा में सियासी गुरु के नाम से फेमस हैं।
बनारस के पास चंदौली में जन्में राजनाथ सिंह भाजपा में एक कुशल प्रशासक के तौर पर जाने जाते हैं। भाजपा के अध्यक्ष पद से पहले राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश भाजपा के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। भौतिकी के प्रोफेसर रह चुके राजनाथ 13 साल की उम्र से ही संघ से जुड़ गए थे।
राजनाथ सिंह 2000 से 2002 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और एनडीए के शासनकाल में कृषि मंत्री रह चुके हैं। यूपी में बतौर शिक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयास आज भी याद किए जाते हैं। इस दौरान उन्होंने एंटी-कॉपिंग एक्ट लागू करवाया और वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में शामिल करवाया था।
राजनाथ सिंह की खासियत ये है कि वो अपने सभी भाषण शुद्ध हिंदी में देते हैं। राजनाथ सिंह ने 'Unemployment, its Reasons and Remedies' नामक किताब भी लिखी है।
अरुण जेटली
1952 में दिल्ली में जन्में अरुण जेटली भाजपा के युवा और तीसरी पीढ़ी के नेताओं में से एक हैं। एनडीए के शासनकाल में न्याय मंत्री रह चुके अरुण जेटली पिछले कई साल से संगठन का कामकाज देख रहे थे। दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने वाले जेटली भाजपा के कानूनी मामलों के देखते आए हैं।
1974 में दिल्ली विश्विद्यालय के छात्र संघ के चुनाव के दौरान जेटली राजनीतिक परिदृश्य से प्रभावित हुए और भाजपा के छात्र गुट एबीवीपी से जुड़ गए।
जेटली ने जयप्रकाश नारायण द्वारा चलाए गए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में भी हिस्सा लिया और तभी वे भाजपा के करीब आए।
कम ही लोगों को पता है कि वीपी सिंह सरकार में उन्हें 1989 में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया। उन्होंने बोफोर्स घोटाले की जांच में पेपरवर्क भी किया।
1999 में जेटली भाजपा के सदस्य बने और 1999 में भाजपा के प्रवक्ता। एनडीए की सरकार में जेटली को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। जेटली विनिवेश मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार के मंत्री रह चुके हैं।
अरुण शौरी
पद्मभूषण अरूण शौरी पेशे से वकील होने के साथ साथ एक बेहतरीन पत्रकार और लेखक भी हैं। शौरी भारतीय योजना आयोग के सलाहकार भी रह चुके हैं और विश्व बैंक के अर्थशास्त्री का ओहदा भी संभाल चुके हैं।
1941 में जालंधर में जन्मे शौरी एनडए सरकार में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं इनमें विनिवेश, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय शामिल हैं। अरुण शौरी इंडियन एक्सप्रेस के संपादक रह चुके हैं।
जय प्रकाश नारायण के आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाले शौरी तीन बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। बेहतरीन पत्रकारिता के लिए उन्हें 1982 का 'मेग्सेसे पुरस्कार' मिला था।
2002 में बिजनेस वीक ने शौरी को स्टार ऑफ इंडिया के पुरस्कार से नवाजा था।
सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज भाजपा की तीसरी पीढ़ी के नेताओं में शुमार हैं। छह बार सांसद और तीन बार विधायक के पद पर चुनी जा चुकी सुषमा पंद्रहवी लोकसभा में विपक्ष की नेता हैं। सुषमा एक बेहद कुशल प्रवक्ता के साथ साथ संसद में मुखर रहने वाली नेत्री हैं।
हरियाणा के कैंट में 14 फरवरी 1953 को जन्मी सुषमा के राजनीतिक जीवन की शुरूआत एबीवीपी से हुई। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन के दौरान ही सुषमा भाजपा के करीब आई।
जुलाई 1977 में सुषमा को लोकदल और भाजपा की गठबंधन सरकार की कैबिनेट में शिक्षा मंत्री बनाई गई। महज 27 वर्ष की उम्र में वे 1979 में जनता पार्टी (हरियाणा) की अध्यक्ष बनाई गई।
1996 में मात्र 13 दिन चली वाजपेयी सरकार में सुषमा सूचना प्रसारण मंत्री बनाई गई थी। हालांकि 12वीं लोकसभा में भी उन्हें वही प्रभार मिला लेकिन साथ ही अतिरिक्त प्रभार के तौर पर दूरसंचार मंत्रालय भी सौंपा गया।
अक्तूबर 1998 में सुषमा दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनाई गई। लेकिन विधानसभा चुनावों में जब भाजपा को हार मिली तो सुषमा को राष्ट्रीय राजनीति में वापस बुला लिया गया।
सुषमा 1999 में बेल्लारी लोकसभा सीट से सोनिया गांधी को चुनौती दे चुकी हैं।
सुषमा के साथ कई दिलचस्प रिकार्ड जुड़े हैं। वे किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता, भाजपा की पहली महिला मुख्यमंत्री, केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री, महासचिव, प्रवक्ता और नेता प्रतिपक्ष रही हैं। सुषमा स्वराज ऐसी अकेली महिला एमपी हैं जिन्हें असाधारण सांसद का पुरस्कार मिला है।
नितिन गडकरी
पहली बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे नितिन गडगरी 2009 में भाजपा के अध्यक्ष और महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं।
नितिन 1995 से 1999 तक महाराष्ट्र के लोक निर्माण मंत्री भी रह चुके हैं। इस पद पर रहते हुए राज्य में बहुत सारी सड़कों, राजमार्गों और फ्लाईओवर्स का निर्माण किया गया था।
नागपुर में जन्मे नितिन गडकरी युवावस्था में ही पहले एबीवीपी से और बाद में अखिल भारतीय युवा मोर्चा से जुड़ गए थे। महाराष्ट्र विधायी परिषद में नेता प्रतिपक्ष रह चुके नितिन खुद को राजनेता कहलवाना पसंद नहीं करते। उनका कहना है कि वो एक व्यापारी उद्योगपति हैं।
एनडीए सरकार की तरफ से नितिन को नेशनल रूरल रोड डेवलपमेंट कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने 60 हजार करोड़ रुपए की एक महत्वाकांक्षी का खाका पेश किया। वही योजना आज प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के नाम से लोकप्रिय है।
राम विलास पासवान
लोकजनशक्ति पार्टी के मुखिया राम विलास पासवान बिहार की राजनीति के स्तंभ माने जाते हैं। 1946 में बिहार के खगरिया जिले में जन्मे रामविलास पासवान ने पटना यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान की शिक्षा ली है।
1977 में छठी लोकसभा के चुनावों में पासवान जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनकर संसद गए थे। 1983 में दलित उत्थान के लिए दलित सेना का गठन करने वाले रामविलास पासवान ने 2000 में जनता दल यू से अलग होकर लोकजनशक्ति पार्टी का निर्माण किया।
मुरली मनोहर जोशी
भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक डाक्टर मुरली मनोहर जोशी 1980 में भाजपा अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्तमान में वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले जोशी अपनी युवावस्था में जोशी संघ से जुड़ गए थे और संघ के गौरक्षा आंदोलन में उन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
जोशी तीन बार इलाहाबाद से संसद पहुंच चुके हैं। हालांकि 2004 में उन्हें हार देखनी पड़ी लेकिन 15वीं लोकसभा में बनारस से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
1996 में 13 दिन की एनडीए सरकार में जोशी गृह मंत्री बनाए गए थे। 15 वीं लोकसभा के दौरान भी उन्हें लोक लेखांकन समिति का अध्यक्ष बनाया गया। लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा के घोषणापत्र को तैयार करने की जिम्मेदारी जोशी ही निभाते आ रहे हैं।
उमा भारती
भाजपा की फायरब्रांड नेता और मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी उमा भारती राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभा चुकी हैं। ग्वालियर में राजमाता विजयाराजे के सानिध्य के चलते भाजपा में आई उमा भारती हुबली में तिरंगा फहराने के चलते चर्चा में आई।
उमा भारती ने पहला चुनाव 1984 में लड़ा लेकिन हार गई। 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में उमा भारतीय खुजराहो से जीतकर संसद पहुंची।
1999 में उमा ने भोपाल सीट से लोकसभा चुनाव लड़ी और जीत गई। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार में उमा भारती को मानव संसाधन विकास और पर्यटन मंत्री बनाया गया। दूसरी बार जब एनडीए की सरकार बनी तो उमा को युवा मामले एवं खेल मंत्रालय सौंपा गया। इसके अलावा उमा कोयला और खदान जैसे विभाग भी संभाल चुकी हैं।
2003 में उमा भारती को मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिम्मा सौंपा गया। इन चुनावों में भाजपा ने तीन चौथाई बहुमत प्राप्त किया और उमा को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन हुबली में सांप्रदायिक दंगों के संबंध में दायर मामलों के चलते वारंट जारी होने पर उमा को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
2004 में आडवाणी के खिलाफ बयान देने पर उमा को भाजपा से निकाल दिया गया था लेकिन 2005 में उन्हें वापस पार्टी में बुलाया गया और संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया। उमा भाजपा की तरफ से चलाई जा रही गंगा बचाओ योजना का अहम हिस्सा हैं।
एम वेंकैया नायडू
एम वेंकैया नायडू 2002 से 2004 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। नायडु अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री का पदभार संभाल चुके हैं।
1949 आंध्र प्रदेश के नेलोर ज़िले में एक किसान परिवार में जन्मे नायडु ने राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा महासचिव के तौर पर 1993 में प्रवेश किया। सुषमा स्वराज की तरह नायडु भी पार्टी के बेहतरीन प्रवक्ताओँ में गिने जाते हैं।
वेंकैया स्कूली दिनों में ही संघ से जुड़ाव महसूस करने लगे थे। कॉलेज के दिनों में वेंकैया की नजदीकी एबीवीपी से बढ़ी और 1973 में नायडु आंध्र यूनिवर्सिटी में एबीवीपी के अध्यक्ष चुने गए। 1974 में जय प्रकाश आंदोलन के दौरान वेंकैया ने बढ़ चढ कर हिस्सा लिया और आंध्र प्रदेश की छात्र संघर्ष समिति के संयोजक बने।1977 से 80 तक वेंकैया भाजपा के युवा मोर्चा के अध्यक्ष पद पर रहे।
अपनी वाकशैली और कर्मठता के चलते वेंकैया आंध्र विधानसभा में उदयागिरी विधानसभा सीट से दो बार आंध्र विधानसभा के सदस्य चुने गए। इसके पश्चात वे आंध्र में भाजपा का जाना पहचाना चेहरा बन गए।
2004 में लोकसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद उन्होंने लाल कृष्ण आडवाणी की खातिर भाजपा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और 2005 में भाजपा के उपाध्यक्ष चुने गए।