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इसलिए राव -मनमोहन से भी कमजोर PM हैं मोदी!

Tue, 26 May 2015 10:10 PM IST
Updated Tue, 26 May 2015 10:10 PM IST
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narendra modi performs and narsingh rao manmohan singh

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही अपनी सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर देशवासियों को पत्र लिखकर उपलब्धियां गिना रहे हों, उनके मंत्री और सांसद प्रेस कांफ्रेंस कर एक साल के कामकाज की तारीफ कर रहे हों, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत तमाम नेता और कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी सरकार की पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन पिछले ढाई दशकों में सेंसेक्स के प्रदर्शन पर गौर करें तो नरेंद्र मोदी निवेशकों की निगाह में पीवी नरसिंह राव और मनमोहन सिंह से बहुत ही कमजोर प्रधानमंत्री साबित हुए हैं।

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वॉलस्ट्रीट जर्नल के एक आलेख के अनुसार, एक वर्ष पूर्व आज ही के दिन नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उस समय निवेशकों को ये लगा था कि वे उद्योग जगत के लिए भारत के अब तक सर्वाधिक अनुकूल प्रधानमंत्री साबित होंगे। हालांकि ये उम्मीदें चंद दिनों में ही काफूर हो गई।
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मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद चंद दिनों तक सेंसेक्स में उछाल दिखा था। लेकिन जैसे-जैसे मोदी प्रधानमंत्री के रूप में पुराने पड़ते गए, सेंसेक्स जमीन पर आता चला गया और वैसे ही निवेशकों का उत्साह भी।
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राव के आगे कहीं नहीं ठहरते मोदी के एक साल

narendra modi performs and narsingh rao manmohan singh

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के पहले एक वर्ष में सेंसेक्स में 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल के पहले एक वर्ष में यानी 2004-05 में सेंसेक्स में 31 फीसदी की वृद्घि हुई थी।

कांग्रेस के ही एक अन्य प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के कार्यकाल के पहले एक वर्ष में 126 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। उल्लेखनीय है कि नरसिंह राव के कार्यकाल में ही भारत ने अपने बाजार और संसाधनों को विदेश निवेशकों के लिए खोला था। लाइसेंसराज को खत्म कर उदारवादी नीतियों को लागू किया गया था।

सेंसेक्स के प्रदर्शन के आधार पर देखें तो केवल अटल बिहारी वाजपेयी ही बतौर प्रधानमंत्री अपने पहले एक वर्ष में निवेशकों की निगाह में नरेंद्र मोदी से कमजोर रहे। 1998-99 में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में सेंसेक्स की वृद्घिदर नाकारात्मक रही थी।

मोदी के कामकाज पर क्या कहते हैं जानकार

narendra modi performs and narsingh rao manmohan singh

अटल बिहारी वाजपेयी के शासन के पहले एक साल में सेंसेक्स बढ़ने के बजाय 4 फीसदी नीचे चला गया था।

उल्लेखनीय है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद संभालते ही परमाणु परीक्षणों की इजाजत दे दी थी। भारत ने उस समय दो दिनों के अंतराल में पांच परमाणु बमों का परीक्षण किया था।

उन परीक्षणों से नाराज होकर अमेरिका समेत कई मुल्कों ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया था, जिसका खामियाजा अर्थव्यस्‍था को भुगतना पड़ा।

सेंसेक्स के आंकड़ों में प्रधानमंत्री मोदी का एक साल कमजोर जरूर साबित होता है, फिर भी जानकारों का कहना है कि किसी भी प्रधानमंत्री या सरकार का आंकलन एक साल के कामकाज के आधार पर नहीं किया जा सकता है। विकास के लिए बनी नई नीतियों और फैसलों को क्रियान्वित करने में कई साल लगा जाता है, जबकि सेंसेक्स कई बार रोजमर्रा अपना व्यवहार बदलता रहता है।

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