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भारी भरकम जुलूस से मोदी ने साधे कितने निशाने?

Fri, 25 Apr 2014 12:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 25 Apr 2014 12:43 PM IST
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narendra modi nomination procession

भाजपा ने अपने पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी के नामांकन जुलूस में भारी भीड़ जुटाकर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की। मोदी की विश्वस्त ‘टीम गुजरात’ के सदस्यों ने इस रणनीति का खाका पहले से ही तैयार कर रखा था।

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टीम ने ऐसा ब्लूप्रिंट बनाया था विरोधी कोई सवाल उठाएं तो रोड शो को नजीर के रूप में पेश कर उनको माकूल जवाब दिया जा सके।

पहली रणनीति तो यह थी कि नामांकन के दिन समर्थकों की इतनी बड़ी संख्या सड़कों पर दिखे कि विरोधी दलों के हौसले पस्त किए जा सके। इसके लिए करीब दस दिन पहले से ही दिल्ली, हरियाणा और गुजरात से बड़ी संख्या में समर्थकों को यहां बुला लिया गया था। दक्षिण भारत से भी लोग आए थे।

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स्थानीय बनाम शहरी प्रत्याशी

narendra modi nomination procession

इसके अलावा मोदी की ओर से उन आप्रवासी भारतीयों को भी बुलाया गया था जो यहां ग्रामीण इलाकों में जाकर लगातार कन्वेंसिंग कर रहे थे। गुरुवार को रोड शो के दौरान बाहर से आए ये लोग तो शामिल हुए ही, पूर्वांचल के अन्य जिलों से भी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में यहां पहुंचे थे। मकसद था माहौल बनाना।

दूसरा अहम मसला सामने आ रहा था स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी का। इसके लिए रोड शो के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों को राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से आगे खड़ा कर इस मुद्दे की काट खोज निकाली गई।

मुख्तार अब्बास नकवी, रविशंकर प्रसाद जैसे बड़े कद के नेता मोदी के वाहन पर अनुप्रिया पटेल, रवींद्र जायसवाल, रामगोपाल मोहले के पीछे खड़े दिखे।

पूर्वांचल-बिहार की 20 सीटों पर फतह!

narendra modi nomination procession

मोदी के बगल में अनुप्रिया को रखकर कार्यकर्ताओं और आमजन को यह संदेश दिया गया कि गठबंधन में जोर है। इससे रोहनिया और सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र के करीब दो लाख पटेल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की योजना को अमलीजामा पहनाने की कोशिश की गई।

अमित शाह समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि मोदी के वाराणसी से लड़ने का मतलब है पूर्वांचल और बिहार की कम से कम 20 सीटों पर भगवा परचम फहराना। इसके लिए पहले से ही रोड शो को प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही थी।

मोदी के रोड शो में भीड़ तो जुटी लेकिन अब यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे कि इस भीड़ को पार्टी वोट में तब्दील कर पाती है या नहीं।

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