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मोदी देंगे समावेशी विकास का अपना नया मॉडल
विनोद अग्निहोत्री/गांधीनगर
Updated Mon, 23 Sep 2013 01:30 AM IST
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लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी गुजरात के समावेशी विकास मॉडल का एक नया रूप देश के सामने पेश करने करने वाले हैं।
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मोदी का यह समावेशी विकास मॉडल विरोधियों के उन आरोपों का जवाब होगा जो विकास के मोदी मॉडल को सिर्फ कार्पोरेट घरानों का स्वर्ग बताते हैं।
दिलचस्प है कि मोदी का यह नया समावेशी विकास मॉडल कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल्य वर्धन योजना (नेशनल स्किल डेवेलपमेंट स्कीम) से ही निकला है, जिसमें गुजरात के सामने कांग्रेस और अन्य दलों द्वारा शासित राज्य फिसड्डी साबित हुए हैं।
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अगले सप्ताह गांधीनगर में मोदी जब विकास का अपना नया मॉडल प्रस्तुत करते हुए अन्य राज्यों को इससे सीखने और लागू करने की सलाह देंगे तो उन्हें सुनने के लिए देश के सभी राज्यों के अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद होंगे, जिनमें नीतीश कुमार की बिहार, माकपा की त्रिपुरा, नेशनल कांफ्रेंस की जम्मू कश्मीर, बीजद की उड़ीसा, तृणमूल की पश्चिम बंगाल, एआईडीएमके की तमिलनाडु और कांग्रेस शासित सभी राज्यों की सरकारों के नुमाइंदे भी शामिल होंगे।
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मोदी का यह विकास मॉडल विभिन्न क्षेत्रों में कौशल्य वर्धन के जरिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा करके साधारण और कमजोर वर्गों के उन युवाओं और महिलाओं को सशक्त करता है जो विकास की दौड़ में पिछड़कर छूट सकते हैं।
अपने इस कौशल्य वर्धन मॉडल का देश के सामने आगाज़ करने के लिए गुजरात सरकार ने 25 सिंतबर को गांधीनगर में एक राष्ट्रीय कौशल्य वर्धन सम्मेलन बुलाया है, जिसमें देश के सभी राज्यों से पांच हजार से ज्यादा प्रतिनिधि भाग लेंगे।
गुजरात के मुख्य सचिव वरेश सिन्हा ने अमर उजाला को बताया कि राज्य में कौशल्य वर्धन कार्यक्रमों को बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है।
इसमें बड़ी संख्या में शहरों के साथ साथ कस्बों और गावों के युवकों और महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित करके उन्हें रोजगार लायक बनाया जा रहा है।
गुजरात के कौशल्य वर्धन कार्यक्रमों की कामयाबी को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को इस क्षेत्र के प्रधानमंत्री सम्मान से सम्मानित भी किया है।
राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों में जुटी गुजरात सरकार के श्रम एवं रोजगार विभाग के रोजगार एवं प्रशिक्षण आयोग की आयुक्त सोनल मिश्रा के मुताबिक गुजरात कौशल्य वर्धन (स्किल डेवलपमेंट) मिशन के अंतर्गत श्रम एवं रोजगार विभाग द्वारा 7,86,659, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 55,000, शिक्षा विभाग द्वारा डेढ़ लाख, उद्योग एंव खनन विभाग द्वारा 50 हजार, शहरी विकास विभाग द्वारा 1,10,000 और आदिवासी विकास विभाग द्वारा 22,00 लोगों को मिलाकर प्रति वर्ष 11,53,859 लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कुशलता का प्रशिक्षण देने की क्षमता है।
गुजरात सरकार का दावा है कि कौशल्य वर्धन के अपने अनेक प्रयोगों और कार्यक्रमों को सफलता पूर्वक अमल में लाने की वजह से 2005 से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों केलिए रोजगार सृजन, 2002 से रोजगार कार्यालयों के जरिए रोजगार उपलब्ध कराने, 2006 से महिलाओं को रोजगार दिलाने, पिछले पांच सालों से रिक्त पदों को अधिसूचित करने में गुजरात सबसे आगे है।
श्रम ब्यूरो चंडीगढ़ की वार्षिक रोजगार एवं बेरोजगारी सर्वेक्षण 2011-12 द्वितीय रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में बेरोजगारी की दर देश में सबसे कम राष्ट्रीय औसत दर 38 के मुकाबले दस और एनएसएसओ 68वें अखिल भारतीय सर्वेक्षण रिपोर्ट 2013 के अनुसार गुजरात में बेरोजगारी की दर देश में सबसे कम राष्ट्रीय औसत 29 के मुकाबले सात प्रति एक हजार व्यक्ति है।