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नरेंद्र मोदी ने पहना कांटों का ताज

Sat, 14 Sep 2013 12:36 PM IST
हरीश लखेड़ा/नई दिल्ली
हरीश लखेड़ा/नई दिल्ली Updated Sat, 14 Sep 2013 12:36 PM IST
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narendra modi has big challenge

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद भाजपा नेताओं ने नरेंद्र मोदी को फूलों की मालाओं से लाद दिया, लेकिन इन मालाओं के साथ उनके सिर पर एक ऐसा ताज भी पहनाया गया जिसे किसी ने देखा तो नहीं, लेकिन महसूस सभी ने किया। वह ताज कांटों भरा है।

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इस कांटों भरे ताज में मोदी के सामने अब ढेरों चुनौतियां छिपी हैं। सबसे बड़ी चुनौती एक दशक से केंद्र की सत्ता से बाहर भाजपा को दिल्ली का तख्त दिलाने की है। इसके लिए भाजपा को लोकसभा चुनाव में 272 का आंकड़ा पार करना है।
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इस जादुई आंकड़े को पाने के लिए उन्हें लोकसभा में भाजपा की झोली में कम से कम 200 सीटें दिलानी होंगी व एनडीए का विस्तार भी कर नए साथी तलाशने होंगे। जबकि गुजरात के दंगों के कारण मोदी के नाम पर भाजपा के लिए अब नये साथी जुटाना भी आसान कार्य नहीं है।
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मोदी के नाम पर बिहार में भाजपा का सबसे विश्वसनीय साथी जदयू पहले ही अलग राह चल पड़ा है। हालांकि भाजपा का दावा है कि मोदी के नाम पर देशभर में भारी लहर है और पार्टी लोकसभा चुनाव में 200 का आंकड़ा पार कर लेगी।



मोदी तो अब तक गुजरात की सीमा के भीतर ही सियासी पारी खेलते रहे हैं, लेकिन अब वे उन्हें पूरे देश में अपनी काबिलियत साबित करनी होगी।

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी के सामने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव भी हैं। मिजोरम में तो भाजपा पहले से कमजोर है, लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में सत्ता में लौटने तथा राजस्थान व दिल्ली को कांग्रेस से छीनने का प्रयास में है। इन राज्यों के चुनाव नतीजे भी मोदी के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं होंगे।


modi

















यदि ये चुनाव नतीजे भाजपा के अनुकूल नहीं आए तो आडवाणी खेमा उनकी लोकप्रियता का गुब्बारे की हवा भी निकालने में पीछे नहीं रहेगा। मोदी के सामने आंतरिक कलह से जूझ रही पार्टी को लोकसभा चुनाव के लिए तैयार करना भी बड़ी चुनौती है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खुले तौर पर मोदी के विरोध में आ जाने से माना जा रहा है कि यह खेमा आगे भी उनकी राह में कांटे बिछाता रहेगा।

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