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सुप्रीम कोर्ट में 'लोकायुक्त' की लड़ाई हार चुके हैं मोदी

Tue, 02 Apr 2013 11:29 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 02 Apr 2013 11:29 AM IST
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narendra modi had lost lokayukta battle in supreme court

लोकायुक्त नियुक्ति के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में मिली 'हार' के बाद मोदी सरकार लोकायुक्त बिल में संशोधन करने जा रही है।

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लोकायुक्त संशोधन विधेयक के तहत लोकायुक्त की नियुक्ति की ताकत मुख्यमंत्री के पास होगी। इस विधेयक में लोकायुक्त के साथ चार उपलोकायुक्त का प्रावधान है। अभी प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल के पास है।

छह सदस्यीय समिति करेगी चुनाव
छह सदस्यों की समिति इसका चुनाव करेगी। इसमें मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, एक मंत्री, विपक्ष का नेता, हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश और विजिलेंस कमिश्नर होंगे। यह समिति केवल लोकायुक्त के नाम का सुझाव करेगी। आखिरी फैसला चयन समिति के अध्यक्ष मुख्यमंत्री करेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट में मिली थी निराशा
उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त की नियुक्ति पर मोदी सरकार को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में निराशा हाथ लगी थी। दोनों अदालतों ने जस्टिस सेवानिवृत्त आरए मेहता को गुजरात का लोकायुक्त बनाए जाने के राज्यपाल कमला बेनीवाल के फैसले को सही ठहराया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सेवानिवृत्त आरए मेहता को गुजरात का लोकायुक्त बनाए जाने के राज्यपाल कमला बेनीवाल के फैसले को सही ठहराया था।

अदालत का कहना था कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के काम करने के लिए बाध्य है, लेकिन लोकायुक्त की नियुक्ति सही थी। राज्यपाल ने यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह के बाद लिया था।

हाईकोर्ट ने भी की थी आलोचना
इससे पहले गुजरात सरकार ने भी आरए मेहता की नियुक्ति को सही बताया था। मोदी की आलोचना करते हुए अदालत ने कहा था, 'मुख्यमंत्री इस भुलावे में काम कर रहे हैं कि वे चीफ जस्टिस की श्रेष्ठता और प्रमुखता को अनदेखा कर सकते हैं जो बाध्यकारी है।'

गुजरात में 2003 से ही लोकायुक्त का पद खाली था। इसके बाद राज्यपाल कमला बेनीवाल ने नए लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी थी। इसे लेकर राज्यपाल और नरेंद्र मोदी के बीच टकराव पैदा हो गया था।


लोकायुक्तः एक नजर में
लोकायुक्त की नियुक्ति सबसे पहले महाराष्ट्र में 1971 में हुई। लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। इसका कार्यकाल पांच साल होता है। लोकायुक्त का काम भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई करना है।

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