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'मौसम' को हथियार बनाकर चीन को मात देंगे मोदी

Tue, 16 Sep 2014 04:13 PM IST
Updated Tue, 16 Sep 2014 04:13 PM IST
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Narendra Modi government to launch project mausam to check china maritime might

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार को अहमदबाद में जिस समय भारत और चीन के नए रिश्तों की रूपरेखा तैयार करेंगे, उसी समय भारत सरकार हिंद महासागर में चीन के प्रभाव को कम करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही होगी।

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नरेंद्र मोदी सरकार की नई विदेश नीति को चीन के खिलाफ अब तक की सबसे कारगर रणनीति माना जा रहा है। सरकार ने नई विदेश नीति की कार्ययोजना तैयार कर ली है और जल्द ही इस पर अमल किया जा सकता है।
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दरअसल, भारत पर लंबे समय से हिंद महासागर में चीन के विस्तार को मूकदर्शक की भांति देखने का आरोप लगता रहा है। चीन अपने आर्थिक हितों को बढ़ावा देने के लिए 'मेरिटाइम सिल्क रूट' प्रस्ताव पर काम भी कर रहा है, जबकि भारत सरकार निष्क्रिय बनी रही। हालांकि नरेंद्र मोदी सरकार ने उन आरोपों से बरी होने की ठान ली है।
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'मौसम' है मोदी की नई पर‌ियोजना

Narendra Modi government to launch project mausam to check china maritime might

मोदी सरकार ने हिंद महासागर में चीन के प्रभाव को कम करने, अपने आर्थिक हितों के विस्तार और हिंद महासागर के देशों के साथ अपने सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जिवित करने के लिए 'मौसम' परियोजना पर काम करने के निर्णय लिया है।

इस परियोजना के तहत भारत से जुड़ने वाले पुराने समुद्री रास्तों को फिर से इस्तेमाल किया जाएगा। प्रोजेक्ट का पूरा नाम 'प्राजेक्ट मौसमः मेरिटाइम रूट्स एंड कल्चरल लैंडस्केप एक्रॉस दी ‌इंडियन ओशियन' है।

प्राचीन भारत में समुद्री यात्राओं के लिए भारतीय नाविक हवाओं के रुख से अपना रास्ता तय करते थे। मानसूनी हवाओं इसमें सबसे मददगार होती थीं।

चूंकी मानसूनी हवाओं की समय और दिशा लगभग तय रहती थी, इसलिए रास्ते भी उन्हीं के मुताबिक तय हो जाते थे।

चीन की सिल्क रूट परियोजना से खतरा

Narendra Modi government to launch project mausam to check china maritime might

मानसूनी हवाओं के रास्तों पर पड़ने वालों देशों के स‌ाथ भारत के आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध अन्य मुल्कों की तुलना में बेहतर रहे। विदेश सचिव सुजाता सिंह ने हाल ही में संस्कृति सचिव रविंद्र सिंह के साथ मुलाकात की थी और मौसम परियोजना पर बातचीत की थी।

सूत्रों के मुताबिक, प्रोजेक्ट मौसम के जरिए पूर्वी अफ्रीका, अरब प्रायद्वीप, भारतीय उपमहाद्वीप, श्रीलंका और पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों के विस्तार की संभावनाओं की तलाश की जाएगी।

चीन ने अपना महत्वाकांक्षी सिल्क रूट पर‌ियोजना में शामिल होने का प्रस्ताव भारत समेत कई एशियाई देशों को दिया है। श्रीलंका और मालदीव ने परियोजना में रूचि भी दिखाई है। चीन राष्ट्रपति की आगामी यात्रा में सिल्क रूट पर भी चर्चा होने की संभावना है।

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