मोदी सरकार का CSAT पर आखिरी फैसला
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सरकार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा से सी-सैट को हटाने की मांग स्वीकार नहीं करेगी। भाजपा संसदीय दल की बैठक में पीएमओ में मंत्री जितेंद्र सिंह ने सरकार का सी-सैट पर रुख साफ कर दिया है।
बैठक में उन्होंने सांसदों से कहा कि सिविल सेवा परीक्षा में अंग्रेजी के 22.5 अंक को मेरिट या ग्रेडिंग में शामिल न करने, वर्ष 2011 में परीक्षा देने वालों को वर्ष 2015 में एक और मौका देने और अंग्रेजी का हिंदी में अनुवाद को सुधारने के फैसले के बाद यह विवाद खत्म हो गया है।
हालांकि इस मुद्दे पर मंगलवार को भी संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ। पहले ऐसा माना जा रहा था कि छात्रों के आंदोलन और विपक्षी दलों के हंगामे के कारण सरकार सी-सैट पर नए सिरे से विचार करेगी।
अंग्रेजी के अंक पात्रता के लिए मान्य ही नहीं होंगे
मंगलवार को हुई संसदीय दल की बैठक में जितेंद्र सिंह ने सांसदों को समझाया कि अंग्रेजी के अंकों का महत्व खत्म कर सरकार ने हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं से होने वाले भेदभाव को खत्म कर दिया है।
उन्होंने कहा कि जब अंग्रेजी के अंक पात्रता के लिए मान्य ही नहीं होंगे, तब सी-सैट का विरोध बेमतलब है। उन्होंने सांसदों को बताया कि सरकार ने इस मामले में फैसला कर विवाद की जड़ को खत्म कर दिया है।
सरकार पर लगा वादाखिलाफी का आरोप
राज्यसभा में जदयू के शरद यादव ने कहा कि मुख्य मांग सी-सैट को हटाने की थी। मगर सरकार ने मूल मुद्दे से ही दूरी बना ली। उच्च सदन में अन्नाद्रमुक, बसपा, सपा, जदयू और राजद ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
लोकसभा में सपा के धर्मेंद्र यादव ने कहा कि सरकार ने हिंदी भाषी छात्रों को ठगा है क्योंकि मुद्दा सी-सैट को हटाने का था। अंग्रेजी के अंक को रैंकिंग में नहीं जोड़ने के ऐलान से बात नहीं बनेगी।
वेल में किया हंगामा
स्पीकर से इजाजत न मिलने पर सपा के साथ कांग्रेस और राजद के सदस्यों ने वेल में आकर हंगामा किया। मगर स्पीकर ने साफ कर दिया कि सरकार का फैसला आने के बाद वह अब महज चर्चा की ही अनुमति दे सकती हैं।
लोकसभा और राज्यसभा में जदयू, राजद, सपा और अन्नाद्रमुक के सांसदों ने वेल में आ कर भारी हंगामा किया। इन दलों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और सीसैट को तत्काल वापस लेने की मांग की।
लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने यह कह मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी कि सरकार के फैसले के बाद अब इस मुद्दे पर महज चर्चा ही हो सकती है।