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इराक संकट: दोहरे दबाव में मोदी सरकार

Tue, 24 Jun 2014 12:26 PM IST
Updated Tue, 24 Jun 2014 12:26 PM IST
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Narendra modi government in crisis over iraq issue

इराक संकट को लेकर केंद्र सरकार दोहरे दबाव में फंसी है।

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एक तरफ सरकार में कोई भी ऐसा मुस्लिम चेहरा नहीं है जिसकी खाड़ी के देशों में पूर्व विदेश राज्य मंत्री ई.अहमद या सलमान खुर्शीद जैसी साख या दोस्ती हो।

दूसरी तरफ इससे निबटने में जुटे विदेश मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों को कुवैत संकट के दौरान इंदर कुमार गुजराल और इराक युद्ध के समय जसवंत सिंह और बृजेश मिश्रा जैसे अनुभवी नेतृत्व का अभाव खटक रहा है।

तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रहा है काम

Narendra modi government in crisis over iraq issue

यह जानकारी देने वाले केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दक्षिणपंथी पृष्ठभूमि और इजरायल के प्रति झुकाव की वजह से खाड़ी के देशों की सरकारें और प्रशासन तंत्र पहले से ही असहज हैं।

इसका भी असर भारतीयों की सुरक्षित वापसी की मुहिम पर पड़ रहा है। सरकार की पहली प्राथमिकता आतंकवादियों के चंगुल में फंसे बंधकों को सकुशल रिहाई की है,इसलिए इराक में फंसे बाकी भारतीयों को वापस लाने का काम तेज गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

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अनुभवहीनता भी बड़ी समस्या

Narendra modi government in crisis over iraq issue

विदेश मंत्रालय के अधिकारी याद करते हैं कि 1990 में जब इराक ने कुवैत पर हमला किया था तब तत्कालीन विदेश मंत्री इंदर कुमार गुजराल ने खुद इराक और कुवैत पहुंचकर वहां फंसे भारतीयों को हवाई और समुद्री रास्ते से सुरक्षित भारत पहुंचाने के ऑपरेशन का संचालन किया था।

यह विश्व का सबसे बड़ा ऐसा ऑपरेशन था जिसमें दो महीने के भीतर एअर इंडिया की करीब 500 उड़ानों के जरिए एक लाख 76 हजार लोगों को भारत लाया गया।

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बेहतर प्रशासक की कमी

Narendra modi government in crisis over iraq issue

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि रोमेश भंडारी, बृजेश मिश्रा, जे.एन.दीक्षित जैसा एक भी राजनयिक प्रधानमंत्री कार्यालय में नहीं है जिसके खाड़ी के देशों की सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों से निजी रिश्ते हों।

न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, नरसिंह राव और इंदर कुमार गुजराल जैसा अंतर्राष्ट्रीय मामलों का अनुभव या मध्य पूर्व एशिया के देशों के शासकों के साथ संपर्क है।

सुषमा स्वराज इन मामलों में नई

Narendra modi government in crisis over iraq issue

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी अपने पूर्ववर्तियों जसवंत सिंह, नटवर सिंह, प्रणव मुखर्जी, सलमान खुर्शीद की तुलना में वैदेशिक मामलों में नई हैं।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र और अतिरिक्त प्रधान सचिव पी.के. मिश्र को राज्यों और केंद्र सरकार में काम करने का अनुभव तो है, लेकिन खाड़ी के देशों की कूटनीति और दांवपेंच समझने का अनुभव नहीं है। ऐसे में सब कुछ विदेश मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों के भरोसे छोड़ दिया गया है।

सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ही अकेले ऐसे शख्स हैं जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मामलों से निबटने और खुफिया ऑपरेशन चलाने का अनुभव है। इसलिए उनका सारा जोर अगवा किए गए चालीस भारतीयों का पता लगाकर अपहर्ताओं से संपर्क स्थापित करने और सुरक्षित रिहाई पर है।

इराक से सीधे लोगों को लाना हुआ मुश्क‌िल

Narendra modi government in crisis over iraq issue

दूसरा अहम मुद्दा फंसे हुए हजारों भारतीयों की वतन वापसी का है। जिन्हें सुरक्षित लाने की जिम्मेदारी विदेश मंत्रालय की है। खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इसके लिए बैठकें कर रही हैं। लेकिन इस दिशा में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है।

विदेश मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि इराक की हालत ऐसी है कि वहां से सीधे लोगों को लाना नामुमकिन है। बगदाद हवाई अड्डे से उड़ाने बंद हैं।

कुवैत संकट के समय भी इराक और कुवैत के हवाई अड्डे बंद हो गए थे। तब भारत ने ओमान और जोर्डन के जरिए लोगों को निकाला था।

तब विदेश मंत्री गुजराल ने खुद खाड़ी के तमाम देशों केअपने निजी संपर्कों का इस्तेमाल किया था। इसी तरह एक बार भारतीय विमान के अपहरण के बाद रोमेश भंडारी ने अपने निजी संपर्कों का इस्तेमाल करके बंधक यात्रियों की वापसी सुनिश्चित कराई थी।

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