सियासी 'डील' फेल, अब डॉन का नमो-प्रेम!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी में लोकसभा चुनावों की आंच जैसे-जैसे तेज हो रही है, राजनीतिक दल अपनी-अपनी रोटियां सेंकने के लिए नए-नए पैंतरे दिखा रहे हैं। नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल और अजय राय की लड़ाई में कौमी एकता दल कवायद में सबसे आगे है।
कौमी एकता दल के नेता चंद दिनों पहले तक मुस्लिमों का खैरख्वाह बनकर 'सेक्यूलर' अरविंद केजरीवाल के खेमे में दिखने की कोशिश कर रहे थे। अब उन्होंने मुस्लिमों की तरक्की के पैरोकार बनकर 'विकास पुरुष' नरेंद्र मोदी के बगल में खड़े होने की कोशिश की है।
माफिया सरगना मुख्तार अंसारी के बड़े भाई और कौमी एकता दल के नेता अफजाल अंसारी ने कहा है कि देश को नरेंद्र मोदी की जरूरत है। उन्होंने कहा है कि भाजपा हमेशा से मुस्लिमों की हिमायती रही है। हालांकि, अफजाल का मोदी प्रेम एक सियासी 'डील' के फेल हो जाने के बाद उभरा है।
मोदी से प्यार, मुलायम के खिलाफ हो गए अफजाल
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को आड़े हाथों लेते हुए अफजाल अंसारी ने कहा कि, गुजरात दंगों के दरम्यान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राजधर्म निभाने का निर्देश दिया और उन्होंने निभाया भी, जबकि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री अखिलेश को एक बार भी राजधर्म की याद नहीं दिलाया।
अफजाल के मुताबिक, मुलायम मुस्लिमों के लिए बहुत खतरनाक है। वह केवल मुस्लिमों का अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
अफजाल ने दावा किया कि पूर्वांचल में मोदी की लहर है और घाघरा के दोनों किनारों की 27 लोकसभा सीटों में से 24 भाजपा की जीत होगी। शेष तीन में दो कौमी एकता दल और एक कांग्रेस के हिस्से जाएंगी।
मोदी के खिलाफ साझा प्रत्याशी का सुझाव भी भूले
अफजाल अंसारी कुछ दिनों पहले तक वाराणसी में मोदी के खिलाफ साझा प्रत्याशी उतारने की बात कर रहे थे। उनकी इच्छा थी कि कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी मोदी के खिलाफ उनके छोटे भाई मुख्तार अंसारी का साझा प्रत्याशी के रूप में समर्थन करें।
सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव खारिज होने के बाद ही मुख्तार ने वाराणसी सीट चुनाव न लड़ने का फैसला लिया था।
पिछले लोकसभा चुनाव में मुख्तार अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के मुकाबले से दूसरे स्थान पर रहे थे। उन्हें 1,85,911 वोट मिले थे, जबकि जोशी को 2,03,122 वोट।
सियासी 'डील' फेल होन के बाद उभरा मोदी-प्रेम
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अफजाल अंसारी का मोदी-प्रेम एक सियासी 'डील' फेल हो जाने के बाद उभरा है। दरअसल, कौमी एकता दल पिछले कई दिनों से समाजवादी पार्टी के साथ में समझौते की कोशिश में था।
कौमी एकता दल ने वाराणसी में समाजवादी पार्टी प्रत्याशी कैलाश चौरसिया को समर्थन देने का प्रस्ताव रखा था। बदले में पार्टी ने गाजीपुर और घोसी में क्रमशः अफजाल अंसारी और मुख्तार अंसरी को सपा प्रत्याशी बनाने की मांग की थी।
हालांकि, सपा ने गाजीपुर से अपनी प्रत्याशी शिवकन्या कुशवाहा को हटाने से इनकार कर दिया। शिवकन्या, पूर्व मंत्री बाबू लाल कुशवाहा की पत्नी हैं। सपा शिवकन्या कुशवाहा को हटाकर कुशवाहा मतदाताओं की नारजगी मोली नहीं लेना चाहती थी।
केजरीवाल के पत्र की पहेली अभी सुलझी ही नहीं
पिछले दिनों वाराणसी में अरविंद केजरीवाल के नाम से आम आदमी पार्टी के लेटरहेड पर मुख्तार अंसारी को लिखी गई चिट्ठी भी चर्चा में थी।
चिट्ठी में केजरीवाल ने मुख्तार अंसारी को धन्यवाद देते हुए लिखा था कि उनके चुनाव से हटने से मुस्लिम वोट ‘आप’ के खाते में आएंगे। साथ ही सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई मजबूत होगी।
हालांकि, आप ने चिट्ठी को फर्जी बताया था और इसे भाजपा की साजिश करार दिया था। ये चिट्ठी फर्जी थी या वास्तविक इस पर कौमी एकता दल ने भी आज तक चुप्पी साधे रखी है।