'भतीजी' को लाभ दिलाने के मामले में फंसे नरेंद्र मोदी के मंत्री
मोदी कैबिनेट में कृषि राज्य मंत्री और भाजपा नेता संजीव बालियान पर अपने पद का इस्तेमाल करते हुए अपनी 'कथित भतीजी' मोनिका को कुछ निजी कंपनियों द्वारा लाभ पहुंचाने का आरोप लगा है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक बालियान के कार्यालय से कुछ कंपनियों को एक पत्र जारी किया गया है। हालांकि बालियान ने ऐसे आरोप को सिरे से नकार दिया है।
इस पत्र में मोनिका बालियान के जल्द लांच होने वाले एक मोबाइल ऐप के लिए फंड जुटाने की बात कही गई है। इस मेल में मोनिका को संजीव बालियान की भतीजी बताया गया है। बालियान के कार्यालय से जारी हुए इस मेल में उन कंपनियों से इस ऐप के लिए फंड एकत्रित करने के लिए कहा गया था। इसके लिए उन कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात का समय मांगा गया है।
इन कंपनियों को यह मेल भारत सरकार के केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कार्यालय के ऑफिशियल मेल से भेजा गया है। इन कंपनियों को भेजे गए मेल में कहा गया कि मोनिका बालियान जो कि संजीव बालियान की भतीजी हैं तो वह एक ऐप लांच करना चाहती हैं।
इस ऐप को लांच के लिए कुछ फंड की जरूरत होगी। मोनिका चाहती हैं कि इस बारे में आप सब से बातचीत की जाए। मेल में उन कंपनियों की प्रतिनिधियों से मोनिका से मिलने का अनुरोध किया गया था।
यह मेल इस केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री के कार्यालय से संदीप आरोड़ा द्वारा भेजा गया था। संदीप अरोड़ा ही इस ऑफिस के लिए भेजे जाने वाले मेल के लिए अधिकृत हैं। जब उनसे इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह सभी मेल आदेशों के तहत ही भेजते हैं। लेकिन उुन्होंने इस तरह का कोई मेल नहीं किया है। जरूर कहीं पर कुछ मिस कम्युनिकेशन हुआ है।
बालियान ने किया खंडन
इस बारे में जब इंडियन एक्सप्रेस ने संजीव बालियान से उनका पक्ष जाना तो उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन दिनों से दिल्ली में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह मोनिका बालियान को भी जानते हैं और उनके पिता को भी लेकिन मोनिका उनकी भतीजी नहीं हैं और न ही उन्होंने अपने ऑफिस से इस तरह कोई मेल करने के लिए किसी को आदेश दिया है।
संजीव बालियान ने यह भी कहा कि मोनिका उनसे किसी भी तरह से संबंधित नहीं है और उन्होंने उसको लाभ दिलाने के लिए कुछ भी नहीं किया। बालियान ने कहा कि जो भी कहा जा रहा है यह पूरी तरह से झूठ है।
मोदी के मंत्री ने कहा कि यह जरूर है मोनिका बालियान नाम की लड़की ने खुद को उनकी भतीजी बताते हुए उनके ऐप के लिए फंड जुटाने का अनुरोध किया था। लेकिन मेरे ऑफिस से ऐसा कोई मेल इन कंपनियों को नहीं किया गया।
उधर इस बारे में मोनिका से पक्ष जानने के लिए जब इंडियन एक्सप्रेस ने उनको मेल किया तो उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया।