इन 5 मुद्दों को हर हाल में उठाएंगे मोदी
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30 सितम्बर को जब भारत के पीएम नरेंद्र मोदी व्हाइट हाउस के ओवल हाउस में ओबामा के साथ बैठक करेंगे तब दोनों के बीच पांच ऐसे मुद्दे होंगे जिन पर हर हाल में चर्चा होगी। इनमें व्यापार नीति, रक्षा भागीदारी, दुनिया में बढ़ता आईएस नेटवर्क और पाकिस्तान व हाफिज सईद बड़े मुद्दे होंगे।
1. व्यापार नीति होगी चर्चा का केंद्र
दरअसल, नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पहले जो वायदे किए थे उन्हें पूरा करने के लिए एक बड़ा रास्ता देश में एफडीआई की राह आसान करना है, ताकि रोजगार बढ़ाने और कारोबारियों के अनुकूल माहौल बनाकर देश का जीडीपी बढ़ाया जा सके। ऐसा करने से महंगाई पर नियंत्रण और देश में हताशा का वातावरण खत्म होने की मोदी को गुंजाइश दिखाई देती है। इसीलिए ओबामा के साथ मुलाकात में व्यापार नीति पर खासतौर पर चर्चा होनी तय है।
अमेरिका और भारत के बीच फिलहाल करीब 100 बिलियन से 120 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है। अमेरिका चाहता है कि 2030 तक दोनों के बीच करीब दस खरब डॉलर का व्यापार हो। अमेरिका को पूरी आशा है कि यह सपना मोदी की इकॉनॉमिक डिप्लोमेसी पूरा सकती है। मोदी भी भारत में निवेश के लिए इसे पूरा करने को तत्पर हैं, ताकि चुनाव से पहले जनता से रोजगार और देश के विकास के लिए जीडीपी बढ़ाने का वायदा पूरा किया जा सके।
2. एजेंडा में स्नूपिंग व न्यूक्लियर लायइबिलिटी भी
दूसरी तरफ, दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों में यूपीए-2 सरकार के दौरान 2010 में उस वक्त खिंचाव आ गया था जब देश की संसद ने न्यूक्लियर लाइबिलिटी बिल पास किया। मोदी ने अपनी अमेरिकी यात्रा से पहले ही संकेत दे दिए थे कि वे इस बिल में संशोधन करने को तैयार हैं। कयास इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि मोदी अपनी इस मुलाकात के दौरान ओबामा के सामने स्नूपिंग (जासूसी) का मुद्दा भी उठा सकते हैं।
3. रक्षा भागीदारी पर आम राय की संभावना
दोनों देशों के बीच एक बड़ा मुद्दा रक्षा संबंधी भागीदारी को लेकर भी है। दुनिया भर में भारत रक्षा उत्पादों को खरीदने में सबसे ज्यादा खर्च करता है। अमेरिका से यह उत्पाद भारत को निर्यात होते हैं। अमेरिका चाहता है कि डिफेंस स्ट्रेटेजिक डील को भारत पांच साल के लिए और आगे बढ़ा दे जो फिलहाल दस वर्षों के लिए ही है। दूसरी तरफ, नरेंद्र मोदी ओबामा से इस बात का आग्रह भी कर सकते हैं कि अमेरिका अपनी तकनीक स्थानांतरण नीति को और आसान बनाए तथा अमेरिका स्टेट ऑफ द आर्ट डिफेंस उपकरण भारत को दे। ऐसा करने से भारत और अमेरिका दोनों के हित भी सुरक्षित रहेंगे और भारत में रक्षा एफडीआई को बल मिलेगा।
4. आतंकवाद के खिलाफ हो सकती है बड़ी शुरूआत
वर्तमान में भारत और अमेरिका दोनों ही देश आतंकवाद से जूझ रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र भाषण में मोदी पहले ही यह मुद्दा पुरजोर तरीके से उठा चुके हैं, इसलिए मोदी-ओबामा मुलाकात का एक बड़ा एजेंडा यह भी रहेगा। इस मुलाकात में भारत और अमेरिका के इस बात पर राजी होने की पूरी संभावना है कि दोनों देशों की इंटेलीजेंस एजेंसियों के बीच सूचनाएं साझा करने की शुरूआत हो। इसके लिए होमलेंड सचिव स्तर की बातचीत और ज्वाइंट वर्कग्रुप बनाया जा सकता है। आतंकी संगठनों पर एक साथ कार्रवाई पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा हो सकती है।
5. मास्टर माइंड के आजाद घूमने पर भी वार्ता
इराक और सीरिया में मौजूद आईएसआईएस के खात्मे को लेकर अमेरिका ने हाल ही में हवाई हमले शुरू किए हैं, और चाहता है कि भारत का भी उसे समर्थन मिले। ओबामा इस जंग में मोदी से भारत की मदद मांग सकते हैं। मोदी भी चाहते हैं कि भारत के 39 अगवा नागरिकों पर अमेरिका से मिलकर कोई हल निकालें, इसलिए आईएस के खिलाफ जंग में भारत के योगदान पर चर्चा को व्हाइट हाउस खास नजरिए से देख रहा है।
इसी बीच भारत 26/11 हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद के पाकिस्तान में आजाद घूमने और पाकिस्तान द्वारा सीजफायर उल्लंघन के मुद्दे को उठाकर मामले का और अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश करेगा।