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मोदी-ओबामा की दोस्ती से चीनी सरकार चिंतित

Tue, 27 Jan 2015 03:32 PM IST
Updated Tue, 27 Jan 2015 03:32 PM IST
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narendra modi barack obama and china

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की दोस्ती चीन को रास नहीं आई है।

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चीनी मीडिया ने दोनों नेताओं के बीच उभरती हुई केमेस्ट्री को 'सतही दोस्ती' करार दिया है। न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत को सदस्यता दिलाने के अमेरिकी वादे पर चीन ने ठंडे अंदाज में कहा है कि ऐसे किसी भी कदम पर सभी सदस्य देशों द्वारा सावधानीपूर्वक विचार किए जाने की जरूरत है।

चीनी सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में नए सदस्यों को शामिल करने पर विचार-विमर्श हो लेकिन भारत भी समूह में मानकों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। समूह के मानकों से चीन का आशय परमाणु अप्रसार संधि से माना जा रहा है। माना जा रहा है कि चीन की इच्छा है कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल होने से पहले भारत परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत करे। चीन की इच्छा भारत के रास्ते का रोड़ा भी बन सकती है। भारत परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत करने के मसले पर शायद ही तैयार हो।
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उल्लेखनीय है कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप ही परमाणु संबंधी सभी कारोबारों को नियंत्रित करता है। समूह का सदस्य बनने के बाद सदस्य देशों के बीच तकनीकी और परमाणु सामग्रियों का आदान-प्रदान सरलता से होता है।
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एकाएक पाकिस्तान पर उमड़ने लगा चीन का प्यार

narendra modi barack obama and china

चीनी प्रवक्ता के बयान को भारत और अमेरिका के रिश्तों में आई गर्माहट से पैदा हुई घबराहट के रूप में देखा जा रहा है। चीन का रुख अमे‌रिकी राष्ट्रप‌ति बराक ओबामा और चीन सरकार के बीच मतभेदों का संकेत भी देता है।

दरअसल न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में भारत के प्रवेश से दक्षिण एशिया के भू-राजनीति समीकरणों में भी तब्दीली आ सकती है। दक्षिण एशिया में चीन का प्रमुख सहयोगी पाकिस्तान शक्ति संतुलन के समीकरणों से बाहर जा सकता है। अमेरिका भारत को चीन के विकल्प के रूप में खड़ा कर सकता है।

चीन ने कहा है कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की सदस्यता की बहस को भारत तक सीमित करने के बजाय, नए सदस्यों को शामिल करने पर विचार किया जाना चा‌हिए। जानकारों को कहना है कि चीन की इस बात का सीधा मतलब समूह में पकिस्तान के प्रवेश से है।

दरअसल चीन, पाकिस्तान को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल कराना चाहता है। जानकारों को मानना है कि चीन के नए रवैये का सीधा अर्थ है यह है कि अमेरिकी अगर भारत को आगे बढ़ाएगा तो चीन पाकिस्तान को बढ़ाएगा।

चीनी म‌ीडिया ने भी मिलाया अपनी सरकार के सुर में सुर

narendra modi barack obama and china

भारत और अमेरिका की दोस्ती चीनी मीडिया को भी रास नहीं आई है। उन्होंने भारत को अमेरिकी जाल और पश्चिमी प्रभाव से बचने की नसीहत भी दे डाली है। चीनी मीडिया संस्‍थान ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीन और भारत ये नहीं चाहते लेकिन पश्चिमी प्रभाव में भारत फिसलता चला जा रहा है।

चीनी मीडिया ने ये भी कहा है कि मोदी और ओबामा केवल बाहरी तौर पर एक साथ हैं क्योंकि दोनों नेताओं के बीच अभी कई मुद्दों पर भारी मतभेद बरकरार हैं।

शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने अमे‌रिका और भारते के बीच उभरे कूटनीतिक मतभेद को याद करते हुए मोदी और ओबामा की दोस्ती को और गर्मजोशी को 'सतही' बताया है और कहा है कि दोनों देश के दिग्गजों के बीच भारी मतभेद हैं।

एजेंसी का कहना है, “ये एक सतही मेल-मिलाप है जिसे एक सौदे की तरह देखा जाना चाहिए क्योंकि ओबामा को भारत की ज़रूरत है ताकि अमेरिका राजनीति में वे अपनी उपलब्धियां गिना सकें।"

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