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मोदी-शरीफ की इस तस्वीर से हैरत में है पाकिस्तान

Sun, 30 Nov 2014 03:35 PM IST
अशोक कुमार/बीबीसी संवाददाता
अशोक कुमार/बीबीसी संवाददाता Updated Sun, 30 Nov 2014 03:35 PM IST
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narendra modi and nawaz sharif's photo gives shock to pak media.

इन दिनों पाकिस्तान उर्दू अखबारों में काठमांडू में हुई सार्क बैठक पाकिस्तानी उर्दू अखबारों में बीते हफ्ते काठमांडू में हुई सार्क बैठक की खासी चर्चा रही।

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औसाफ ने लिखा है कि सार्क कांफ्रेंस में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ न तो भारत की तरफ से राष्ट्राध्क्षों या सरकार प्रमुखों के लिए मुहैया कराई गई बुलेटप्रूफ गाड़ी में बैठे और न उन्होंने भाषण के लिए जाते समय भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दुआ सलाम की।
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अखबार के मुताबिक ये सब देखकर पाकिस्तान के ज्यादातर लोग बड़े खुश हुए, लेकिन हैरत उस वक्त हुई जब मुस्कराते हुए नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की हाथ मिलाते हुए तस्वीर सामने आई।
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अखबार को ऐतराज है कि शरीफ ने इस मुलाकात में विदेश सचिव स्तर की वार्ता टालने पर तो शिकवा किया पर यह नहीं कहा कि भारत नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी क्यों नहीं रोकता। वहीं जंग ने सार्क को मजबूत और फायदेमंद बनाने पर जोर दिया है।

अखबार लिखता है कि सार्क कांफ्रेस अपने आठ सदस्य देशों के लगभग दो अरब लोगों की शांति, विकास और तरक्की से जुड़ी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर सकी लेकिन रीजनल इलेक्ट्रिक ग्रिड के जरिए बिजली समझौते पर हस्ताक्षर करके यह सम्मेलन पूरी तरह विफलता के दाग से बच गया है।

अखबार ने सार्क की मजबूती के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर समेत सभी लंबित मुद्दों के हल की जरूरत पर जोर दिया है। उधर नवा-ए-वक्त की सलाह है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भारत को लेकर पहले जैसी खुशफहमी में न रहें।

निशाने पर पोलियो टीमें

narendra modi and nawaz sharif's photo gives shock to pak media.

क्वेटा में पोलियो टीम पर हमले में चार लोगों की मौत पर पेशावर से छपने वाला मशरिक लिखता है कि हमले के बाद पोलियोरोधी दवा पिलाने का अभियान रोक दिया गया है। अखबार कहता है कि मुश्किल यह है कि जो लोग इस बीमारी को खत्म करने में लगे हैं, उन्हें ही मौत के घाट उतारा जा रहा है।

वहीं वक्त ने 30 नवंबर यानी आज होने वाली विपक्षी नेता इमरान खान की रैली पर लिखा है कि इमरान का यह कहना कि अगर उन्हें रोका गया तो मुकाबला करेंगे, क्या लोकतांत्रिक कहा जा सकता है।

अखबार की हिदायत है कि विरोध की राजनीति करने वाले सकारात्मक रवैया अपनाएं क्योंकि रचनात्मक तब्दीली के लिए संवैधानिक रास्ता ही चुनना होगा।

रुख भारत के अखबारों का करें तो बदायूं मामले में सीबीआई जांच से आए नए मोड़ पर हिंदोस्तान एक्सप्रेस लिखता है कि दो बहनों ने आत्महत्या की या फिर उनका कत्ल किया गया, सच क्या है, इस पर से पर्दा उठना अभी बाकी है।

अखबार के मुताबिक यूपी पुलिस की थ्योरी और सीबीआई जांच से मेल नहीं खाती है। अखबार कहता है कि ये मामला परत-दर-परत हालात और घटनाक्रम की उलझी हुई गुत्थियां हैं।

अख़बार-ए-मशरिक का संपादकीय है- सौ दिन में काला धन वापस लाने का सवाल, मोदी जवाब दें: क्या हुआ। अखबार कहता है कि काले धन पर जो बातें यूपीए सरकार कहती थी, वही अब वित्त मंत्री अरुण जेटली घुमा-फिराकर कह रहे हैं।

अखबार का कहना है कि काश कि चुनावी वादों पर कोई रोक लग पाती जिनसे प्रभावित होकर लोग राजनेताओं के झांसे में आ जाते हैं।

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