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फिर क्यों नवाज से बात कर रहे हैं मोदी?

Mon, 24 Nov 2014 05:55 PM IST
Updated Mon, 24 Nov 2014 05:55 PM IST
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narendra modi and nawaz sharif in saarc summit

नेपाल की राजधानी काठमांडू में हो रहे सार्क सम्मेलन

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में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुलाकात हो सकती है। भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालयों ने पहली बार ऐसे संकेत दिए।

रविवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन से जब ये पूछा गया कि क्या काठमांडू में मोदी और शरीफ की मुलाकात होगी? उन्होंने न हां जवाब दिया और न ना में। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान के लिए शांतिपूर्ण और सहयोगी रिश्तों के लिए सदैव तत्पर रहा है।

सैयद अकबरूद्दीन ने कहा कि प्रधानमंत्री दक्षिण एशिया के मुल्कों के साथ सार्थक बातचीत के लिए तैयार हैं। वह सभी तरह के संबंधों को ध्यान में रखकर बात कर सकते हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सार्क देशों के सम्मेलन के हाशिए पर प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सदस्य देशों से द्विपक्षीय और क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर बात करेंगे।

शायद मोदी ने नवाज का बयान नहीं सुना?

narendra modi and nawaz sharif in saarc summit

भारत और पाकिस्तान के रुख में बदलाव ऐसे समय आया जब जम्मू और कश्मीर में चुनाव हो रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत आने की स्वीकृति दे दी है।

लेकिन पिछले तीन-चार महीने में सीमा पर जैसी गोलीबारी हुई, उस परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से राजन‌यिक सौहार्द्र दिखाना कितना ठीक है? पाकिस्तान ने ऐसे क्या संकेत दे दिए हैं, जिससे लग रहा है कि वह बदल चुका है। कश्‍मीर पर अब भी उसका वही रवैया है, जिसका भारत सख्त विरोधी रहा है।

पाकिस्तान के सा‌थ बातचीत के लिए भारत की एक आवश्यक शर्त यह रही है कि दोनों मुल्कों के मसलो में तीसरा पक्ष शामिल नहीं किया जाएगा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पिछले सप्ताह पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में कहा था कि भारत से बातचीत करने से पहले वे कश्मीर के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।

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कश्मीरी अलगाववादियों पर क्या करेंगे प्रधानमंत्री?

narendra modi and nawaz sharif in saarc summit

भारत और पाकिस्तान के सचिवों के बीच 25 अगस्त को शांति वार्ता प्रस्तावित थी। हालांकि वार्ता से ठीक पहले भारत में पाकिस्तान के उच्‍चयुक्त अब्दुल ब‌ासित ने कश्मीर अलगाववादियों को शांति वार्ता के मुद़्दों पर मशविरा देने के लिए बुला लिया। भारत सरकार को पाकिस्तानी उच्‍चायोग की हरकत बहुत ही नागवार गुजरी।

पाकिस्तान के रवैये के विरोध में शांति वार्ता रद्द कर दी गई। कश्मीरी अलगाववादियों के मुद्दे पर एक बार बातचीत रद्द हो जाने के बाद भी नवाज शरीफ सार्क सम्मेलन से सप्ताह भर पहले उन्हें पुचकारते नजर आए।

भारत ने कश्मीर अलगाववादियों को हमेशा ही चुनाव के जरिए अपना बात कहने का मौका दिया, लेकिन उन्हें पाकिस्तान के जरिए अपना पक्ष रखने का रास्ता अधिक रास आता है। जम्मू-कश्मीर में कई दल और नेता अलगाववाद का रास्ता छोड़कर चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं।

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नवाज शरीफ पर भरोसा करना ठीक होगा?

narendra modi and nawaz sharif in saarc summit

नवाज शरीफ अपना एक हा‌थ भारत सरकार की ओर बढ़ाने की कोशिश में हैं और दूसरा कश्मीरी अलगाववादियों की ओर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काठमांडू में राजनयिक सौहर्द्रवश ही यदि नवाज की ओर से बढ़े हाथ को थामेंगे तो कश्मीर में उन नेताओं का उत्साह ठंडा पड़ जाएगा, जिन्होंने अलगाववाद का रास्ता छोड़कर चुनावों की डगर पर कदम बढ़ाया है।

नवाज से ना बात करने की फेह‌रिश्त में और भी कारण है। भारत ने कश्मीर के मसले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने का विरोधी रहा है। जबकि नवाज शरीफ ने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में कश्मीर का मुद्दा उठाया था। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल थे।

शपथ ग्रहण में भी तो बुलाया था?

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प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में नवाज शरीफ के बयान की भर्त्सना की थी। उन्होंने कहा था कि कश्मीर का मसला 'यहां-वहां' उठाने से काम नहीं चलेगा। अतंराष्ट्रीय सीमा पर पाक की ओर से होने वाली गोलबारी भी भारत और पाकिस्तान के बीच तल्‍खी का कारण रही है।

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान सौ से अधिक बार सीमा पर गोलीबारी कर चुकी है। कई नागरिकों की मौत हो चुकी है। पाकिस्तान की गोलबारी के कारण केंद्र सरकार विपक्ष के निशाने पर भी रही है।

ऐसे में प्रधामंत्री मोदी का काठमांडू में नवाज शरीफ से मुलाकात करना किस हद तक ठीक होगा। वह अपने शपथ ग्रहण समारोह में नवाज को बुला चुके हैं। बंद कमरों में दोनों बात भी कर चुके हैं, जबकि नतीजा सिफर ही रहा है।

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