फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   narendra modi addresses students of pune's fergusson college

'संकट देखते ही बुर्के में छिप जाती है कांग्रेस'

Mon, 15 Jul 2013 08:04 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 15 Jul 2013 08:04 AM IST
विज्ञापन
narendra modi addresses students of pune's fergusson college

कुत्ते के बच्चे की टिप्पणी वाले बयान को लेकर कांग्रेस के निशाने पर आए नरेंद्र मोदी ने रविवार को आक्रामक तेवर के साथ कांग्रेस और यूपीए सरकार पर दिन भर ताबड़तोड़ हमले बोले।

विज्ञापन


दोपहर के वक्त पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में उन्होंने यूपीए की गेमचेंजर योजना खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम पर निशाना साधा। वहीं, शाम को एक सार्वजनिक सभा में मोदी चुनावी मोड में दिखे।
विज्ञापन


उन्होंने कांग्रेस पर मुसलिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि उस पर जब-जब संकट आता है वह बुर्का पहनकर बंकर में छिप जाती है।

पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार खाद्य सुरक्षा कानून पर आनन-फानन में कदम उठा रही है, लेकिन इसका कितना और कैसा असर होगा यह संदेह के घेरे में है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मोदी ने कहा कि इस बिल को लागू करने का मतलब यह नहीं है कि लोगों की थाली में भोजन खुद-ब-खुद पहुंच जाएगा। साथ ही उन्होंने गरीबों के पेट भरने की सरकार की दलील पर भी सवाल उठाया। 

मोदी ने कहा कि गोदामों में अनाज सड़ते देख सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गरीबों में बांटने को कहा था, लेकिन कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। इस सरकार ने अनाजों को सड़ने दिया और बाद में वही अनाज शराब बनाने वाली कंपनियों को 65 पैसे की दर पर बेच दिया गया।

मोदी ने इसे एक साजिश करार दिया और कहा कि कांग्रेस को जनता के सामने इस बात का जवाब देना होगा।

मोदी ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम लिए बगैर उनके उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने भारत को 21वीं सदी में ले जाने की बात कही थी।

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की बातें सुन सुनकर मेरे कान पक गए हैं, लेकिन क्या किसी के पास देश को 21वीं सदी में ले जाने का कोई दृष्टिकोण है। अगर किसी के पास यह दृष्टिकोण होता तो हमारी स्थिति ऐसी नहीं होती जैसी आज है। आज देश में हर ओर निराशा का माहौल है, लेकिन मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी है।

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की विदेश नीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज हालात यह है कि कोई भी पड़ोसी भारत का दोस्त नहीं है।

एफडीआई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज हम पेट्रोलियम उत्पादों से अधिक खर्च सैन्य उपकरण के आयात पर करते हैं। इसके लिए भी हमारी नीतियां जिम्मेदार हैं।

मोदी ने सवाल किया कि क्या हमारे इंजीनियर देश में ऐसे उपकरण तैयार नहीं कर सकते। लेकिन हमारे इंजीनियरिंग कॉलेजों में डिफेंस इंजीनियरिंग को विषय के रूप में शामिल ही नहीं किया गया है।

मोदी ने केंद्र सरकार पर विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के प्रति गंभीर नहीं होने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार विदेश में जमा सारा काला धन गरीबों में बांट दे तो हर एक को तीन-तीन लाख रुपये मिल जाएंगे, लेकिन यह सरकार ऐसा नहीं करेगी। वह काला धन जमा करने वाले लोगों को बचा रही है।

पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में बोले मोदी

केंद्र सरकार पर जब भी कोई संकट आता है, वह सेक्युलरिज्म का बुर्का पहनकर बंकर में छिप जाती है। कांग्रेस की पिछले 50 सालों से बुर्का पहनकर बंकर में छिपने की चाल अब नहीं चलेगी। उसे बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी का जवाब देना होगा।

आजादी के समय रुपया डॉलर के बराबर हुआ करता था लेकिन आज एक डॉलर का मूल्य 60 रुपये से अधिक हो गया है। पीएम अर्थशास्त्री हैं तो रुपया जमीन पर क्यों है।

फर्ग्युसन कॉलेज में छात्र-छात्राओं से मुखातिब

दक्षिण कोरिया ने ओलंपिक और भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की। कोरिया ने ओलंपिक के माध्यम से अपने लिए सम्मान अर्जित किया। जबकि 120 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश ने दुनिया की नजर में गेम्स में भ्रष्टाचार की वजह से अपना सम्मान खो दिया।

हम अब पश्चिमी व्यवस्था की नकल करने लगे हैं। मैं आधुनिकता का पक्षधर हूं लेकिन पश्चिमीकरण नहीं चाहिए।

पहले शिक्षा मैन मेकिंग मशीन थी लेकिन अब यह मनी मेकिंग मशीन बन गई है। अच्छी शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं तो हमें अच्छे शिक्षक तैयार करने होंगे, जो अभी तक हमारी प्राथमिकता में नहीं है।

मैं हैरान हूं कि पड़ोस में हमारा कोई दोस्त नहीं बचा है

अन्य लोगों और हमारे में बड़ा अंतर है। अन्य लोगों की रुचि पावर (सत्ता) में होती है, हम (एम्पावरमेंट) सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हैं। वे सत्ता चाहते हैं और हम चाहते हैं कि प्रत्येक नागरिक सशक्त बने।


चीन की तारीफ

वर्ष 2000 में चीन की कोई यूनिवर्सिटी विश्व की टॉप 500 यूनिवर्सिटी में शामिल नहीं थी जबकि 2010 में 32 विश्वविद्यालय इस सूची में शामिल हैं। जबकि भारत की दो यूनिवर्सिटी उस सूची में थीं लेकिन अब संख्या घटकर एक रह गई है। आखिर चीन ने यह कैसे हासिल कर लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed