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करुणानिधि से मिलने पहुंचे नारायणसामी
चेन्नई/एजेंसी
Updated Thu, 25 Oct 2012 11:36 PM IST
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केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच केंद्रीय मंत्री वी. नारायणसामी ने बृहस्पतिवार को डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि से मुलाकात की। इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक महीने में यह दूसरा मौका है जब पीएमओ में राज्यमंत्री नारायणसामी डीएमके सुप्रीमो से मिले हैं।
तृणमूल कांग्रेस के केंद्र सरकार से अलग होने के बाद डीएमके यूपीए की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके लोकसभा में 18 सांसद हैं। नारायणसामी करुणानिधि से उनके सीआईटी कालोनी स्थित आवास पर मिले। इस दौरान दोनों नेताओं में क्या बातचीत हुई इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। डीएमके सूत्रों के अनुसार बैठक में इन दोनों नेताओं के अलावा और कोई नहीं था।
नारायणसामी इससे पहले पिछले महीने के अंत में करुणानिधि से मिले थे। तब वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दूत के रूप में डीएमके प्रमुख से मिलने पहुंचे थे। तब उन्होंने टेलीकॉम घोटाले के मुद्दे पर ए. राजा और दयानिधि मारन के इस्तीफे की वजह से खाली डीएमके कोटे के दो मंत्री पदों को भरने के मुद्दे पर बातचीत की थी।
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बहरहाल, बाद में करुणानिधि ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इतना ही नहीं, एफडीआई और डीजल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ विपक्ष पार्टियों की ओर से 20 सितंबर को बुलाए गए बंद को समर्थन देकर करुणानिधि ने यूपीए की मुश्किलें भी बढ़ा दी थी।
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तृणमूल कांग्रेस के केंद्र सरकार से अलग होने के बाद डीएमके यूपीए की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके लोकसभा में 18 सांसद हैं। नारायणसामी करुणानिधि से उनके सीआईटी कालोनी स्थित आवास पर मिले। इस दौरान दोनों नेताओं में क्या बातचीत हुई इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। डीएमके सूत्रों के अनुसार बैठक में इन दोनों नेताओं के अलावा और कोई नहीं था।
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नारायणसामी इससे पहले पिछले महीने के अंत में करुणानिधि से मिले थे। तब वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दूत के रूप में डीएमके प्रमुख से मिलने पहुंचे थे। तब उन्होंने टेलीकॉम घोटाले के मुद्दे पर ए. राजा और दयानिधि मारन के इस्तीफे की वजह से खाली डीएमके कोटे के दो मंत्री पदों को भरने के मुद्दे पर बातचीत की थी।
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बहरहाल, बाद में करुणानिधि ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इतना ही नहीं, एफडीआई और डीजल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ विपक्ष पार्टियों की ओर से 20 सितंबर को बुलाए गए बंद को समर्थन देकर करुणानिधि ने यूपीए की मुश्किलें भी बढ़ा दी थी।