फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   narayanan suppressed video of rajiv assassination

‘नारायणन ने दबा दिया था राजीव हत्याकांड का वीडियो’

Tue, 30 Oct 2012 11:43 PM IST
चेन्नई/नयी दिल्ली/एजेंसी
चेन्नई/नयी दिल्ली/एजेंसी Updated Tue, 30 Oct 2012 11:43 PM IST
विज्ञापन
narayanan suppressed video of rajiv assassination

राजीव गांधी हत्याकांड की जांच करने वाले सीबीआई के एक पूर्व अधिकारी ने दावा किया है कि श्रीपेरुंबुदूर में आमसभा में हत्यारी धानु को दिखाने वाले वीडियो को तत्कालीन आईबी प्रमुख एमके नारायणन ने दबा दिया था। नारायणन वर्तमान में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं।

विज्ञापन


तत्कालीन मुख्य जांच अधिकारी के रागोथमन ने अपनी हालिया किताब ‘कांसपिरेसी टू किल राजीव गांधी-फ्रॉम सीबीआई फाइल्स’ में कहा है कि इस संदर्भ में नारायणन द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को लिखे पत्र में वीडियो का जिक्र है। लेकिन इसे कभी भी विशेष जांच दल के संज्ञान में नहीं लाया गया।
विज्ञापन


राजीव हत्याकांड की जांच के लिए गठित जस्टिस वर्मा आयोग के जिक्र के बाद एसआईटी को वीडियो के बारे में पता चला। इस बारे में नारायणन टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। कोलकाता में राजभवन के सूत्रों ने कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया गए हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


रैली के आयोजकों ने उस दिन की आमसभा की वीडियोग्राफी एक स्थानीय वीडियोग्राफर से कराई थी। किताब के परिशिष्ट में प्रकाशित नारायणन के पत्र में कहा गया है कि बैठक स्थल पर बैरीकेडिंग कमजोर थी। इसलिए लोगों का विशेष क्षेत्र में पहुंचना संभव था।

हालांकि यह साफ नहीं हो सका कि राजीव गांधी के घटनास्थल पर पहुंचने पर धानु वहां पहुंची या वह पहले से ही वहां मौजूद थी। नारायणन के पत्र में कहा गया है कि बैठक के इस हिस्से के वीडियो की फिलहाल स्क्रीनिंग कर महिला की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। रागोथमन ने कहा कि यह उनकी ओर से सुइसाइड नोट था।

अगर उन्होंने यह नहीं लिखा होता तो इसके बारे में पता नहीं चलता। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी के तत्कालीन प्रमुख डी. आर. कार्तिकेयन ने मामले को तूल नहीं दिया और नारायणन बच निकले। इन आरोपों पर कार्तिकेयन ने कहा कि टिप्पणी करने से पहले वह किताब को पढ़ेंगे।


उन्होंने कहा कि 22 वर्ष पहले की घटना है और देश एवं दुनिया के अखबारों, पत्रिकाओं में लाखों पन्ने लिखे गए। उन्होंने एक अंग्रेजी चैनल से कहा कि दो आयोगों ने जांच की और कई साल से अदालतों में सुनवाई चल रही है और अंतिम फैसला दिया जा चुका है। वीडियो के बारे में पूछने पर कार्तिकेयन ने कहा कि मुझे इस बारे में कुछ भी याद नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed