आदर्श घोटाले के आरोपी बने रहेंगे चव्हाण, हाईकोर्ट से राहत नहीं
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बंबई हाईकोर्ट के जज जस्टिस एम एल तहिलयानी ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने आदर्श घोटाले में अपना नाम हटाने की गुहार लगाई थी। गौरतलब है कि आदर्श हाउसिंग सोसाइटी में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ था।
चव्हाण ने पिछले साल दिसबंर महीने में सीबीआई अदालत के उस आदेश के खिलाफ एक याचिका दायर की थी जिसमें आदर्श घोटाले से उनका नाम को हटाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री की इस मांग को खारिज हो जाने के बाद उन पर अब भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला चलाया जाएगा क्योंकि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आदर्श सोसाइटी में कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की थी।
चव्हाण की दलील, नहीं मिला पक्ष रखने का मौका
चव्हाण ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें आरोपी बनाए जाने के मसले पर अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
सीबीआई ने इससे पहले निचली अदालत का संपर्क किया था और उसने चव्हाण का नाम इस आधार पर आरोपी के तौर पर हटाने की अनुमति मांगी थी कि राज्यपाल ने उनके खिलाफ मामला चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। सीबीआई अदालत द्वारा इसको खारिज किए जाने के बाद ही मामला उच्च न्यायालय पहुंचा।
हालांकि जस्टिस तहिलयानी ने सीबीआई की उस याचिका को नवंबर में खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि इस मामले में चव्हाण पर भारतीय दंड संहिता के तहत षड्यंत्र रचने का मामला नहीं चलाया जा सकता है, लेकिन उन्होंने यह कहा कि उन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला अब भी चलाया जा सकता है।