गंगा सफाई को अब सरकार लेगी आम जनता का सहारा
केंद्र सरकार गंगा की सफाई के लिए शुरू किए गए बेहद महत्वाकांक्षी अभियान नमामि गंगे अभियान को रफ्तार देने के लिए अब आम लोगों को साथ लेगी। सरकार इसके लिए खास तौर पर ग्रामीणों को जागरुक बनाने का अभियान शुरू करने वाली है।
इस कड़ी में सरकार सबसे पहले गंगा किनारे बसे गांवों के ग्राम प्रधानों को जोड़ना चाहती है ताकि वे अपने गांव में लोगों को गंगा स्वच्छता के मामले पर जागृत कर सकें।
नमामि गंगे अभियान के परवान न चढ़ पाने के वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद चिंतित हैं। यही वजह है कि अभियान को रफ्तार देने की तैयारी हो रही है।
गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए शुरू हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से शनिवार 30 जनवरी को हितधारकों और सलाहकारों का राष्ट्रीय आयोजन होगा। इसमें गंगा सफाई पर जागरुकता अभियान को एक नई दिशा दी जाएगी।
सम्मेलन में गंगा किनारे बसे ग्राम पंचायतों से 1,649 ग्राम प्रधानों को बुलाया गया है। इसमें उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के गांवों से आने वाले ग्राम प्रधान शामिल होंगे।
सम्मेलन को केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी, स्मृति ईरानी, उमा भारती, प्रकाश जावड़ेकर, महेश शर्मा और श्रीपाद यशो नाईक संबोधित करेंगे।
उत्तराखंड और झारखंड के मुख्यमंत्रियों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित रहने की हामी भरी है। गंगा स्वच्छता से आम लोगों को जोड़ने के लिए सरकार गंगा विचार मंच नाम से वेब पोर्टल भी बनवा रही है।
अभियान की धीमी रफ्तार से मोदी चिंतित
इस कवायद को बीते दिनों पीएमओ के साथ नितिन गडकरी और उमा भारती की हुई कसरत का नतीजा माना जा रहा है। नमामि गंगे अभियान के परवान न चढ़ पाने के वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद चिंतित हैं।
गंगा के अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र और दो केंद्रीय मंत्रियों अरुण जेटली तथा नितिन गडकरी को पहले ही उमा भारती के साथ जोड़ा है। बताया जा रहा है कि बीते चंद दिनों में ही मिश्र ने गडकरी और उमा लगातार तीन बैठकें की हैं।
पिछली बैठक में उन्होंने गंगा से जुडे़ जल संसाधन मंत्रालय और नदी विकास के सभी शीर्ष अधिकारियों को तलब कर उनसे गहन मंत्रणा की थी। उसके बाद ही सरकार ने गंगा के अभियान में जनता की भागीदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है।
दरअसल जमीन पर नमामि गंगे अभियान के न उतर पाने से सरकार को सियासी चिंता भी सता रही है। सरकार के रणनीतिकार मानते हैं कि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कुछ दिखने वाले काम कर वे सियासी लाभ ले सकते हैं। वरना यह मुद्दा भी राम मंदिर की तरह उनके लिए भारी पड़ सकता है।