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तंदूर में जले नैना के टुकड़े, दिल दहलाने वाली कहानी...

Tue, 08 Oct 2013 01:13 PM IST
अमर उजाला दिल्ली
अमर उजाला दिल्ली Updated Tue, 08 Oct 2013 01:13 PM IST
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naina sahni tandoor kaand background

नैना साहनी हत्याकांड देश भर में तंदूर कांड के नाम से कुख्यात है। इस मामले में जिसकी हत्या हुई, उसकी लाश के टुकड़े कर तंदूर में जला दिए गए थे।

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यह मामला करीब 18 साल पुराना है। सुशील शर्मा को अपनी पत्नी नैना साहनी और मतलूब करीम नाम के शख्स की दोस्ती से नफरत थी।

पढ़िए:- नैना साहनी हत्याकांडः फांसी की सजा उम्रकैद में बदली
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नैना और मतलूब साथ पढ़ चुके थे और साथ में ही कांग्रेस के लिए काम कर रहे थे। सुशील दिल्ली यूथ कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष था। नैना भी कांग्रेस की कार्यकर्ता थी। सुशील को शक था कि नैना और मतलूब के बीच अवैध संबंध हैं।
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घटना ने खड़े किए रोंगटे
2 जुलाई, 1995 की रात जो कुछ घटा, उसके बारे में जानकर देश के होश फाख्ता हो गए। घटना पर यकीन करना मुश्किल हो गया।

इस रात सुशील घर लौटा, तो नैना फोन पर बात कर रही थी। सुशील शराब पी रहा था और नैना ने उसे देखकर फोन रख दिया। सुशील ने फोन रिडायल किया, तो दूसरे छोर पर मतलूब था।

गुस्से में आकर सुशील ने नैना की गोली मारकर हत्या कर दी। किस्सा यही खत्म नहीं हुआ। वह बगिया नामक रेस्तरां गया, ताकि नैना की लाश को ठिकाने लगाया जा सके। इसमें रेस्तरां के मैनेजर केशव कुमार ने उसकी मदद की।


तंदूर से निकली बू ने खोली पोल
नैना की लाश के टुकड़े किए गए और उन्हें जलाने के लिए तंदूर में डाल दिया। लेकिन सुशील कामयाब नहीं हुआ। तंदूर से निकलने वाले धुएं और बू ने करीब में काम करने वाली एक महिला का ध्यान खींचा, जिसने पुलिस को जानकारी दी।

पुलिस ने केशव को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन शर्मा भागने में कामयाब रहा। सुशील ने 10 जुलाई, 1995 को सरेंडर कर दिया। एम्स के प्रोफेसर टी डी डोगरा की अगुवाई में बोर्ड ने दूसरा पोस्टमार्टम किया।

इस बार सिर और गर्दन के हिस्से से दो गोलियां निकली, जो पहले पोस्टमार्टम में नहीं मिली थी। रिपोर्ट से यह साफ हुआ कि नैना की मौत गोली लगने से हुई थी।

सुशील को 7 नवंबर, 2003 को सजा-ए-मौत सुनाई गई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया।

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