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दुनिया के लिए भले दि एंड हो, इन जांबाजों के लिए थी वह एक नई शुरुआत
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 13 Feb 2016 03:45 PM IST
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जीवन में ऐसे कई पहल आते हैं जब हमें अपना नाम बनाने के लिए रिस्क लेना होता है मगर हम ठिठक जाते हैं। कदम पीछे लौट जाते हैं और जज़्बे के उस सफर का 'दि एंड' हो जाता है। कभी आत्मविश्वास डगमगा जाता है तो कभी सब कुछ असंभव सा लगने लगता है।मगर हम आपको मिलाने जा रहे हैं उन कुछ चेहरों से जिनके जीवन की एक नई शुरुआत ही इस 'दि एंड' से हुई।
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वे भी आपकी तरह युवा और जोश से भरे थे। जोखिम के सामने उनके भी कदम रुके लेकिन उन्होंने कदम बढ़ाने का रिस्क लिया और दुनिया में भारत को एक नई पहचान दिलाई। यह कहानी है एक विकलांग लड़की की एवरेस्ट के खिलाफ जंग की, कहानी है एकसाफ्टवेयर इंजीनियर के स्टंट राइडर बनने की जिद की, कहानी है एक हिन्दुस्तानी की - बेस जंपिंग जिसका जुनून था और यह कहानी है पुणे की 11वीं क्लास की लड़की की जिसने नॉर्थ पोल पर स्काई डाइविंग का सपना पूरा किया। इनके लिए यह सिर्फ एक रिस्क थामगर आने वाले वक्त में यह देश के लिए एक मिसाल बन गया। आइए सुनें उन जांबाजों की कहानियां जिनके हौसले को माउंटेन ड्यू सलाम करता है।
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अरुणिमा सिन्हाः जज़्बे के आगे पर्वत और किस्मत दोनों पराजित
आत्मविश्वास की जीती-जागती मिसाल बन चुकी यूपी की अरुणिमा सिन्हा भारत की पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने अपने पैर खो देने के बावजूद माउंट एवरेस्ट पर विजय हासिल की। एक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल खिलाड़ी के लिए हिम्मत का यह सफर आसान नहींथा, जिसने एक ट्रेन एक्सीडेंट में अपने पांव गंवा दिए हों। उनकी जिंदगी में सहसा अंधेरा छा गया। आर्टिफीशियल पैर की मदद से तो चलना भी मुश्किल होता है तो पहाड़ों की चोटियों पर पहुंचना...! उन्होंने भीतर की निराशा को पर्वतों के सामने चुनौती दी। ऊंचाइयों से भय तोलगा मगर एक बार जो सफर शुरू किया तो वह माउंट एवरेस्ट पर जाकर ही थमा। इससे पहले अरुणिमा अफ्रीका की किलिमंजारो पर्वत श्रृंखला और यूरोप व आस्ट्रेलिया की ऊंची चोटियों को फतह कर चुकी हैं और यह सफर जारी है।
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सत्येन्द्र वर्मा: हर कदम आत्मविश्वास की ओर
मेरठ के सत्येन्द्र वर्मा अपने जज़्बे से एडवेंचर स्पोर्ट्स प्रेमियों के दिलों में अपनी जगह बना चुके हैं। करीब एक हजार से ज्यादा स्काई डाइविंग कर चुके सत्येंद्र ने जब दिल्ली में 450 फीट के टावर से छलांग लगाई तो मीडिया में हर तरफ उनके चर्चे होने लगे। सत्येन्द्रने एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे पहली बार जब वे ऊंचाई पर पहुंचे तो तेज हवाओं के कारण उनके कदम ठिठक गए मगर फिर भी उन्होंने आगे बढ़ने का रिस्क लिया और उन्होंने जो किया वह शायद एडवेंचर स्पोर्ट्स में एक इतिहास बनाने की ओर मजबूत कदमथा। सत्येन्द्र वह पहले शख्स बन गए जो भारत में स्काई डाइविंग और बेस जंप जैसे एडवेंचर गेम लेकर आए हैं। उनके कदम ठिठके नहीं हैं अभी सफर जारी है।
शीतल महाजन: आसमान से छलांग लगाने वाली लड़की
पांच विश्व रिकॉर्ड और 14 नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाली पुणे की शीतल महाजन के लिए आसमान से छलांग लगाना आसान नहीं था। मगर एडवेंचर स्पोर्ट के प्रति उनकी दिलचस्पी थी कि बढ़ती गई और उन्होंने वो किया जिसे करने का रिस्क शायद ही कोई लेगा। आजशीतल दुनिया की पहली महिला हैं जिसने सुदूर नार्थ पोल में 2400 फीट की ऊंचाई से धरती पर छलांग लगाने की हिम्मत जुटाई जबकि तामपान शून्य से 37 डिग्री नीचे था। जज़्बे की यह कहानी खत्म नहीं हुई। उनका अगला कदम था अंटार्कटिका पर फ्री फॉल पैराशूटजंपिंग करके विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली टीम का नेतृत्व करना। कहानी खत्म नहीं होती। दो बच्चों की मां शीतल अब बाकायदा लोगों को पूना में एडवेंचर स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग देती हैं और सिखाती हैं कि कैसे हम हर चुनौती का सामना करके दुनिया में अपना नाम बनाने के नए दरवाज़े खोल सकते हैं।
घोस्ट राइडर्जः हम हैं प्रोफेशनल स्टंट राइडर्स
घोस्ट राइडर्ज के मिखिल मोहन बताते हैं कि कैसे भारत में स्टंट राइडिंग एक चैलेंज हैं। वे बताते हैं कि भारत में बाइक चलाने वाले उत्साही युवाओं की भरमार है। आज मिखिल के पास एक मिशन है स्टंट राइडिंग को एडवेंटर स्पोर्ट्स की मुख्यधारा का हिस्सा बनाना। आजघोस्ट राइडर्ज एक बड़ा नाम है। भारत में स्टंट राइडिंग को एक सम्मानजनक जगह दिलाने और इससे जुड़े हिम्मती युवाओं का दुनिया में नाम रोशन कराने में इसकी बड़ी भूमिका है।
इन जांबांजों ने अपनी लाइफ में रिस्क उठाया और दुनिया ने इनकी तरफ देखा। मगर यह भी दि एंड नहीं है। इन सबके लिए यह महज अगले सफर की शुरुआत है। अभी सत्येंद्र को विश्व रिकॉर्ड बनाना है। अभी मिखिल मोहन को भारत में ही नहीं विश्व के सर्वेश्रेष्ठ स्टंटराइडर्स में से एक कहलाना है। अभी अरुणिमा और शीलत को नए परचम लहराने हैं। दि एंड नहीं उनकी इस अगली शुरुआत को सलाम करता है माउंटेन ड्यू, क्योंकि 'नाम बनते हैं रिस्क से'।
#NaamBanteHainRiskSe
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